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KFC तक ने नहीं दी थी नौकरी, 800 रुपए महीने कमाने वाले ने खड़ी कर दी 3 लाख करोड़ की कंपनी

हांगचौ में जन्मे मा (54) कॉलेज के एंट्रेस एग्जाम में शुरुआती दो मौकों में फेल हो गए थे। 2016 में वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम के मंच पर उन्होंने खुलासा किया था कि हार्वर्ड यूनिवर्सिटी ने भी उन्हें 10 बार रिजेक्ट कर दिया था।

चीनी ई-कॉमर्स कंपनी अलीबाबा के संस्थापक जैक मा आज भले ही तीन लाख करोड़ रुपए की कंपनी के सर्वेसर्वा हों। मगर उन्हें भी शुरुआती दिनों में संघर्षों के पहाड़ का सामना करना पड़ा था। कॉलेज से लेकर नौकरियों तक में उन्होंने रिजेक्शन की मार झेली। एक बार तो जानी-मानी फूड चेन कंपनी केंट्यूकी फ्राइड चिकेन (केएफसी) ने भी उन्हें काम देने से इन्कार कर दिया था। आइए जानते हैं कि कैसे तब 867 रुपए प्रति माह कमाने वाले मा बगैर किसी मैनेजमेंट डिग्री और बिजनेस बैकग्राउंड के ही चीन के सबसे अमीर लोगों की फेहरिस्त में शुमार हो गए।

हांगचौ में जन्मे मा (54) कॉलेज के एंट्रेस एग्जाम में शुरुआती दो मौकों में फेल हुए थे। 2016 में वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम के मंच पर उन्होंने खुलासा किया था कि हार्वर्ड यूनिवर्सिटी ने भी उन्हें 10 बार रिजेक्ट कर दिया था। यह भी कहा जाता है कि किशोरावस्था में वह टूरिस्ट गाइड का काम भी करते थे। तब उनकी उम्र 12 साल थी। टूरिस्टों से बातचीत करते-करते उन्होंने अंग्रेजी भी सुधार ली थी।

1999 में अलीबाबा की शुरुआत करने से पहले उन्होंने कई जगह पर नौकरियों के लिए इंटरव्यू दिए थे। पर उस दौरान भी उन्हें सबने रिजेक्ट कर दिया था। केएफसी भी उन कंपनियों में से एक थी। फिर उन्हें एक स्थानीय यूनिवर्सिटी में अंग्रेजी टीचर के रूप में रखा गया, जहां उन्हें हर महीने के हिसाब से 868 रुपए मिलते थे।

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उन्होंने 17 दोस्तों के साथ मिलकर अलीबाबा की नींव रखी। यह काम उनके अपार्टमेंट के बाहर से ही शुरू किया गया था। अलीबाबा शुरुआत में कारोबारियों के लिए एक ऑनलाइन मार्केट के रूप में था, जहां पर वे अपने उत्पादों को बेचते थे। पर 2013 तक यह कुछ खास कमाल न दिखा सका। लिहाजा देश में ई-बे को टक्कर देने के लिए कंपनी ने ताओबाओ नाम की शॉपिंग साइट लॉन्च की थी। यह मा की मेहनत, जुनून और पागलपन ही था, जो उन्हें सफलता की बुलंदियों तक लेकर आया।

मा को उनकी कंपनी में टीचर मा के नाम से भी जाना जाता है। कारण- कंपनी के कार्यक्रमों में उन्होंने कई बार कहा था कि कंपनी के कामों से मुक्त होने के बाद वापस टीचिंग की दुनिया में लौट जाएंगे। 2014 में उन्होंने अपने उसी सपने को ध्यान में रखते हुए जैक मां फाउंडेशन की स्थापना की, जिसका उद्देश्य चीन के ग्रामीण इलाकों में शिक्षा के स्तर में सुधारा लाना है।

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