67 साल बाद होगी ‘महाराजा की घर वापसी’? एयर इंडिया के लिए टाटा की बोली हो सकती है सफल

जेआरडी टाटा ने 1932 में पहली भारतीय एयरलाइन टाटा एयरलाइंस की स्थापना की थी। इसका नाम 1946 में बदलकर एयर इंडिया कर दिया गया था। 67 साल पहले सरकार ने एयर इंडिया का नियंत्रण अपने हाथों में ले लिया था।

First Indian Airline Tata Airlines
जेआरडी टाटा ने भारत की पहली एयरलाइन कंपनी की स्थापना की थी। (Source: Twitter @TataCompanies)

सरकारी एयरलाइन एयर इंडिया (Air India) की नीलामी अंतिम चरण में है। इसके लिए टाटा समूह (Tata Group) और स्पाइसजेट (Spicejet) के चेयरमैन अजय सिंह ने बोलियां पेश की हैं। उद्योग जगत के विशेषज्ञ टाटा की बोली को बेहतर बता रहे हैं। ऐसे में करीब एक सदी पुरानी वह ऐतिहासिक घटना ताजी हो गई है, जब टाटा समूह ने जेआरडी टाटा (JRD Tata) की अगुवाई में पहली भारतीय एयरलाइन (First Indian Airline) कंपनी शुरू की थी, जो आजादी के बाद सरकार के पास चली गई थी। यदि टाटा की बोली सफल हुई तो यह सच्चे अर्थों में ‘महाराजा की घर वापसी (Maharaja Ki Ghar Wapasi)’ होगी।

Tata Airlines की पहली उड़ान के पायलट बने थे JRD Tata

भारतीय उद्योग जगत के दिग्गज जेआरडी टाटा (JRD Tata) ने 1932 में भारत की पहली एयरलाइन कंपनी की शुरुआत की थी। उन्होंने तब दो लाख की पूंजी से इस कंपनी को शुरू किया था। रोचक बात यह है कि जेआरडी टाटा खुद पहली भारतीय एयरलाइन कंपनी की पहली उड़ान के पायलट बने थे। यह उड़ान कराची से मद्रास (अब चेन्नई) तक की थी, जिसमें बम्बई (अब मुंबई) में भी कुछ देर का स्टॉपेज था। तब कंपनी का नाम टाटा एयरलाइंस (Tata Airlines) रखा गया था।

1946 में Air India हुआ नाम, 1953 में हुआ Nationalisation of Air India

दूसरे विश्वयुद्ध के चलते कई साल उड़ानें बंद रहीं। इसके बाद बदली परिस्थितियों में विमानन सेवाएं शुरू हुईं। आजादी से ठीक एक साल पहले यानी 1946 में टाटा समूह ने अपनी विमानन कंपनी का नाम बदलकर एयर इंडिया कर दिया। 1947 में भारत जब आजाद हुआ तो सरकार के पास अपनी कोई एयरलाइन नहीं थी। इस समस्या को दूर करने के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू (Jawaharlal Nehru) की सरकार ने 1953 में एयर इंडिया का राष्ट्रीयकरण (Nationalisation of Air India) कर दिया। इसके बाद एयर इंडिया का नियंत्रण टाटा समूह के पास न रहकर भारत सरकार के हाथों चला गया। हालांकि जेआरडी टाटा 1977 तक एयर इंडिया के चेयरमैन बने रहे थे।

भ्रष्टाचार से हार गए महाराजा

समय अपनी रफ्तार से दौड़ता गया और महाराजा आसमान नापते रहे। महाराजा की उड़ान में आर्थिक उदारीकरण (Liberalisation) और वैश्वीकरण (Globalisation) का रोड़ा आया। 2000 आते-आते एयर इंडिया में जमकर भ्रष्टाचार की खबरें आने लगीं। कंपनी हर साल घाटे में जाने लगी। सरकार तब से ही एयर इंडिया को बेचने के प्रयास में लगी हुई थी।

कई साल से चल रहा Air India को बेचने का प्रयास

सरकार ने 2007 में एयर इंडिया में इंडियन एयरलाइंस (Indian Airlines) का विलय कर महाराजा को संभालने का प्रयास किया। यह कदम उल्टा पड़ गया और अब महाराजा की बीमारी गंभीर हो गई। साल दर साल घाटा उठाने के बाद सरकार ने 28 जून 2017 को एयर इंडिया को बेचने की घोषणा की। एयर इंडिया को बेचने के सरकार के प्रयास असफल होते रहे। इस बार की बोली में सरकार को अंतत: सफलता हाथ लगने की उम्मीद है।

सरकार ने अभी नहीं लिया है निर्णय

यदि विशेषज्ञों के कयास ठीक हुए तो टाटा समूह की बोली को सफलता मिलेगी और 67 साल हिचकोले खाने के बाद महाराजा की घर वापसी हो जाएगी। हालांकि अभी इस बारे में सरकार ने निर्णय नहीं लिया है। टाटा समूह की बोली को चुने जाने की खबरों के बीच वित्त मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि अभी निर्णय नहीं हुआ है। जब निर्णय हो जाएगा तब सरकार आधिकारिक तौर पर जानकारी देगी।

इसे भी पढ़ें: मां से मिले 25 रुपये से खड़ा किया होटल साम्राज्य, जानिए क्लर्क से करियर शुरू करने वाले ओबेरॉय की कहानी

Vistara, Air Asia India में भी है Tata Group का हिस्सा

आपको बता दें कि अभी टाटा समूह पहले से ही विस्तार (Vistara) और एयर एशिया (Air Asia India) के माध्यम से एयरलाइन सेक्टर में मौजूद है। यदि एयर इंडिया के लिए बोली सफल हो गई तो टाटा समूह का इंडियन एयरलाइन सेक्टर में दबदबा स्थापित हो जाएगा। इस सौदे में सफल पार्टी को महाराजा के साथ उनका कुनबा भी हाथ लगेगा। इस कुनबे में घरेलू एयरपोर्ट पर घरेलू उड़ानों के लिए 4,400 और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए 1,800 लैंडिंग एंड पार्किंग स्लॉट, विदेशी हवाईअड्डों के 900 स्लॉट, एयर इंडिया एक्सप्रेस (Air India Express) का 100 प्रतिशत शेयर और ग्राउंड हैंडलिंग कंपनी एआईएसएटीएस (AISATS) का 50 प्रतिशत शेयर शामिल है।

पढें व्यापार समाचार (Business News). हिंदी समाचार (Hindi News) के लिए डाउनलोड करें Hindi News App. ताजा खबरों (Latest News) के लिए फेसबुक ट्विटर टेलीग्राम पर जुड़ें।

अपडेट