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PM मोदी पर रवीश कुमार का तंज, सपने बेचने को अब किसान मिले हैं, हर दो साल पर चाहिए नई जनता

पीएम नरेंद्र मोदी पर तंज कसते हुए रवीश कुमार ने लिखा है, 'प्रधानमंत्री इतिहास और टर्निंग प्वाइंट से नीचे का कोई काम नहीं करते हैं। उनका काम बहसों और दावों में ही ऐतिहासिक नज़र आता है।'

Author Edited By सूर्य प्रकाश नई दिल्ली | Updated: September 25, 2020 11:03 AM
farmers protestकिसानों के आंदोलन को लेकर रवीश कुमार ने पीएम मोदी पर कसा तंज

संसद से खेती-किसानी से जुड़े तीन नए कानूनों को मंजूरी के खिलाफ किसानों ने आज भारत बंद का आयोजन किया है। विधेयकों के पास होने के साथ ही शुरु हुआ विरोध अब लगातार मुखर होता दिख रहा है। इस भारत बंद को 31 किसान संगठनों ने वैचारिक मतभेदों को भुलाते हुए अपना समर्थन दिया है। इस बीच अर्थव्यवस्था की हालत और बेरोजगारी के मुद्दे पर अकसर सवाल उठाने वाले वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार ने अब किसानों के मुद्दे पर भी सरकार पर तंज कसा है। वरिष्ठ पत्रकार ने फेसबुक पोस्ट में लिखा है कि पीएम मोदी को हर दो साल पर सपने बेचने के लिए नई जनता चाहिए, अब किसानों की बारी आई है।

मोदी सरकार की कई योजनाओं पर सवाल उठाते हुए रवीश कुमार ने लिखा है, ‘प्रधानमंत्री इतिहास और टर्निंग प्वाइंट से नीचे का कोई काम नहीं करते हैं। उनका काम बहसों और दावों में ही ऐतिहासिक नज़र आता है। पलट कर आप उनकी कई योजनाओं की समीक्षा करेंगे तो यही हाल मिलेगा कि प्रधानमंत्री खुद ही उसे इतिहास के कूड़ेदान में डाल चुके हैं। स्मार्ट सिटी, स्किल इंडिया, मेक इन इंडिया और ये ई-नाम। 4 साल में देश की 10 प्रतिशत मंडियां ही जुड़ सकीं।’

खासतौर पर ई-नाम (ई-नेशनल एग्रिकल्चर मार्केट) पोर्टल की सफलता पर सवाल उठाते हुए उन्होंने लिखा है कि खेती से जुड़े तीन नए कानूनों को लेकर प्रधानमंत्री मोदी जो सपने दिखा रहे हैं, वही सपने वे 2016 में ई-नाम को लेकर दिखा चके हैं। 14 अप्रैल 2016 को ई-नाम योजना लांच हुई थी। उसके भाषण में प्रधानमंत्री मोदी ने जो कहा था मोटा-मोटी वही बातें इस बार भी कह रहे हैं। वह सपना फेल हो गया। उन्होंने लिखा कि ई-नाम की असफलता के बाद भी प्रधानमंत्री मोदी उसी सपने को इस बार भी दिखा रहे हैं। भारत के किसानों को 14 अप्रैल 2016 का उनका भाषण सुनना चाहिए।

बता दें कि जिन किसान संगठनों ने भारत बंद का ऐलान किया है, उनमें अखिल भारतीय किसान संघ (AIFU), भारतीय किसान यूनियन (BKU), अखिल भारतीय किसान महासंघ (AIKM) और अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति (AIKSCC) प्रमुख हैं। किसानों के आंदोलन का सबसे ज्यादा असर पंजाब और हरियाणा में देखने को मिल रहा है, लेकिन कर्नाटक, तमिलनाडु और महाराष्ट्र के किसानों निकायों ने भी बंद का आह्वान किया है। यही नहीं किसानों के इस बंद को देश की कई ट्रेड यूनियंस ने भी अपना समर्थन दिया है।

विपक्षी दलों का भी समर्थन: किसानों के भारत बंद को कांग्रेस के अलावा तमाम विपक्षी पार्टियों का समर्थ मिल रहा है। अब तक एनडीए की सहयोगी रही अकाली दल इस मुद्दे पर खासी मुखर है। इसके अलावा आम आदमी पार्टी, लेफ्ट पार्टियां, एनसीपी, डीएमके, राजद, बसपा, सपा टीएमसी समेत कई पार्टियों ने बंद का समर्थन किया है। करीब 18 विपक्षी पार्टियों ने राष्ट्रपति कोविंद से संसद से पास कराए गए इन विधेयकों पर हस्ताक्षर न करने की मांग भी की है।

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