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कोरोना काल में कटी है सैलरी? ग्रैच्युटी में भी उठाना पड़ सकता है बड़ा नुकसान, समझें पूरा कैलकुलेशन

मान लीजिए कि किसी कर्मचारी की सैलरी बीते साल तक अधिक रही हो और फिर कोरोना के संकट में कटौती का सामना करना पड़ा हो तो फिर नौकरी छोड़ने या रिटायरमेंट की स्थिति में ग्रैच्युटी के तौर पर बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है।

coronavirusकोरोना काल में सैलरी कट से ग्रैच्युटी पर भी हो सकता है नुकसान

कोरोना के संकट में लाखों कर्मचारियों को सैलरी में कटौती के संकट का सामना करना पड़ा है। इसके चलते सैलरीड क्लास पर कोरोना संकट के दौरान दोहरी मार पड़ी है। एक तरफ कोरोना के चलते हेल्थ पर संकट है तो दूसरी तरफ डॉकडाउन के चलते वेल्थ पर संकट आ गया है। यही नहीं सैलरी कट के चलते भविष्य की जमा पूंजी पर भी विपरीत असर पड़ने की आशंका है। खासतौर पर ऐसे कर्मचारी जो आने वाले कुछ वक्त में रिटायर होने वाले थे, उन्हें भविष्य की पूंजी कही जाने वाली ग्रैच्युटी में बड़ी कटौती का सामना करना पड़ सकता है। दरअसल ग्रैच्युटी को लेकर यह नियम होता है कि कर्मचारी को जो आखिरी महीने में सैलरी मिली हो, उसके मुताबिक सर्विस के प्रत्येक साल के 15 दिन की बैसिक सैलरी नौकरी छोड़ने या फिर रिटायरमेंट के तौर पर दी जाती है।

ग्रैच्युटी ऐक्ट के तहत ऐसे कर्मचारियों को ही लाभ मिल सकता है, जिन्होंने अपनी नौकरी में 5 साल पूरे किए हों। ऐसे में मान लीजिए कि किसी कर्मचारी की सैलरी बीते साल तक अधिक रही हो और फिर कोरोना के संकट में कटौती का सामना करना पड़ा हो तो फिर नौकरी छोड़ने या रिटायरमेंट की स्थिति में ग्रैच्युटी के तौर पर बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है।

यदि आपने एक ही कंपनी में लगातार 5 साल पूरे कर लिए हों तो फिर भले ही आप अगले ही दिन नौकरी बदल लें, तब भी आप ग्रेच्युटी की पूरी रकम के हकदार होंगे। ग्रैच्युटी आपकी ही सैलरी का बेहद अहम हिस्सा होता है, जो 5 साल में नौकरी छोड़ने के बाद आपकी कई जरूरतों को हल कर सकता है। पेमेंट ऑफ ग्रेच्युटी ऐक्ट, 1972 के सेक्शन 4 (1) के मुताबिक कोई भी एंप्लॉयी लगातार 5 साल तक की जॉब के बाद ग्रेच्युटी का हकदार होता है।

…तो 5 साल से कम की नौकरी पर भी मिलेगी ग्रैच्युटी: अब अहम सवाल यह कि यदि 5 साल पूरे होने में कुछ महीने रह जाते हैं तो फिर क्या होगा। ग्रेच्युटी एक्ट के ही सेक्शन 4(2) में इसका जवाब है। सेक्शन 4 (2) में ग्रेच्युटी के कैलकुलेशन का फॉर्मूला बताया गया है। इसके मुताबिक किसी भी एंप्लॉयी के ग्रेच्युटी का हकदार होने के लिए यह जरूरी है कि उसने हर साल 6 महीने या उससे ज्यादा समय तक नौकरी की हो। ग्रेच्युटी हर साल के 6 महीने या उससे अधिक की नौकरी पर कैलकुलेट की जाती है। इस तरह से यदि आपने बीते 4 सालों में हर वर्ष या 6 महीने या उससे अधिक नौकरी की हो और फिर 5वें साल में भी 6 महीने या उससे ज्यादा नौकरी के बाद छोड़ रहे हैं तो फिर आप ग्रेच्युटी के हकदार हो सकते हैं।

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