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रत्न, जेवरात निर्यात अप्रैल-जुलाई में करीब 12% बढ़ा

समीक्षाधीन अवधि में तराशे हीरे का निर्यात बढ़कर 7.25 अरब डॉलर हो गया जो पिछले साल की इसी अवधि में 6.89 अरब डॉलर था।

Author नई दिल्ली | August 25, 2016 5:33 PM
चित्र का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है।

देश का रत्न एवं जेवरात का निर्यात चालू वित्त वर्ष के पहले चार महीनों में 11.7 प्रतिशत बढ़कर 11.4 अरब डॉलर हो गया जो अमेरिका जैसे भारत के प्रमुख बाजारों में मांग बढ़ने से प्रेरित रहा। रत्न एवं जेवरात निर्यात संवर्द्धन परिषद (जीजेईपीसी) के आंकड़े के मुताबिक पिछले वित्त वर्ष की अप्रैल-जुलाई की अवधि में इस क्षेत्र से 10.21 अरब डॉलर का निर्यात हुआ। देश के कुल निर्यात में रत्न एवं जेवरात का करीब 14 प्रतिशत योगदान है। अप्रैल-जुलाई में निर्यात में बढ़ोतरी मुख्य तौर पर तराशे एवं पॉलिश किए गए हीरों के निर्यात की मदद से हुआ।

समीक्षाधीन अवधि में तराशे हीरे का निर्यात बढ़कर 7.25 अरब डॉलर हो गया जो पिछले साल की इसी अवधि में 6.89 अरब डॉलर था। चालू वित्त वर्ष की समीक्षाधीन अवधि में चांदी के जेवरात का निर्यात 51 प्रतिशत बढ़कर 1.30 अरब डॉलर हो गया। एक अधिकारी ने कहा, ‘अमेरिका जैसे बाजारों में मांग लगातार बढ़ रही है जिससे इस क्षेत्र में निर्यात में वृद्धि में मदद मिल रही है।’ अप्रैल से जुलाई 2016 की अवधि में सोने के जेवरात का निर्यात हालांकि 25.13 प्रतिशत घटकर एक अरब डॉलर रह गया जो पिछले साल की इसी अवधि में 1.36 अरब डॉलर था।

सोने के सिक्कों और मेडेलियन का निर्यात भी 9.51 प्रतिशत घटकर 1.48 अरब डॉलर रह गया। सरकार को उम्मीद है कि तीन प्रतिशत ब्याज सब्सिडी और शुल्क वापसी की दर बढ़ाने से निर्यात में गिरावट में मदद मिलेगी। जीजेईपीसी के आंकड़े मुताबिक अप्रैल-जुलाई 2016 के दौरान कच्चे हीरे का आयात 13.27 प्रतिशत बढ़कर छह अरब डॉलर हो गया। इधर सोने की छड़ों का आयात भी करीब 40 प्रतिशत बढ़कर 1.72 अरब डॉलर हो गया।

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