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जन धन योजना के चलते अपराध पर भी लगी है लगाम, भारतीय स्टेट बैंक की रिपोर्ट में सामने आई बात

रिपोर्ट के मुताबिक प्रधानमंत्री जनधन योजना का इस्तेमाल मजदूरों की दिहाड़ी जमा करने, कर्ज लेने, उपभोग और हेल्थकेयर पर खर्च करने के लिए इस्तेमाल किया गया है। खासतौर पर ग्रामीण इलाकों में इनका काफी इस्तेमाल हुआ है और इसके चलते अपराध में भी कमी आई है।

jan dhan yojana accountsजन धन खाताधारकों को मिलती हैं कई सहुलियतें।

कोरोना वायरस के संकट के दौर में जन धन खातों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। एसबीआई की एक रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक नए जनधन खातों में 60 फीसदी का इजाफा हुआ है और इससे अपराध में कमी आई है। 14 अक्टूबर को आए नए डाटा के मुताबिक जन धन खातों की संख्या 41.05 करोड़ हो गई है। इन खातों में 1.31 लाख करोड़ रुपये की रकम जमा है। एसबीआई रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक 1 अप्रैल से अब तक 3 करोड़ नए जन धन खाते खुल गए हैं, इसके अलावा जन धन खातों में जमा रकम में भी 11,060 करोड़ रुपये का इजाफा हुआ है। अप्रैल महीने में जन धन खातों में औसतन 3,400 रुपये की रकम जमा थी, जो सितंबर में घटकर 3,168 रुपये हो गई थी। हालांकि अक्टूबर में यह आंकड़ा मामूली तौर पर बढ़ते हुए ₹3,185 हो गया।

रिपोर्ट के मुताबिक प्रधानमंत्री जनधन योजना का इस्तेमाल मजदूरों की दिहाड़ी जमा करने, कर्ज लेने, उपभोग और हेल्थकेयर पर खर्च करने के लिए इस्तेमाल किया गया है। खासतौर पर ग्रामीण इलाकों में इनका काफी इस्तेमाल हुआ है और इसके चलते अपराध में भी कमी आई है। जन धन योजना के चलते अपराध में कमी का उल्लेख करते हुए रिपोर्ट में स्टेटवाइज क्राइम डाटा का जिक्र किया गया है। भारतीय स्टेट बैंक के चीफ इकनॉमिक एडवाइजर सौम्य कांति घोष ने कहा, ‘फिक्स्ड इफेक्ट्स मॉडल से संकेत मिलता है कि पीएम जन धन योजना के खातों की संख्या और उनके बैलेंस में इजाफे के चलते अपराध की दर में कमी आई है।’

रिपोर्ट में कहा गया है कि समाज के निचले स्तर के लोगों के धन के जन धन योजना खाते में जमा होने से अपराध में कमी आई है। इसके अलावा अपराध में कमी के कई सामाजिक, आर्थिक, डेमोग्रेफिक, लोकल और संस्थागत कारण भी हैं। रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और हरियाणा जैसे राज्यों में जन धन योजना के इस्तेमाल का अपराध दर में कमी पर बड़ा असर देखने को मिला है। इसके अलावा पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल जैसे राज्यों पर भी लगातार इसका असर दिख रहा है। यही नहीं गुजरात और कर्नाटक जैसे राज्यों पर भी सकारात्मक असर देखने को मिला है।

सौम्या कांति घोष ने अपनी रिपोर्ट में यह भी सिफारिश की है कि जन धन खातों में सरकार को तीसरा पैकेज जारी करते हुए कुछ रकम पहुंचानी चाहिए। ऐसा मनरेगा के दायरे को बढ़ाकर भी किया जा सकता है। इसके अलावा शहरी गरीबों के लिए भी मनरेगा जैसी कोई स्कीम लॉन्च करके जन धन योजना में ज्यादा रकम पहुंचाई जा सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह संतोषजनक है कि जन धन योजना के खातों के इस्तेमाल से इस कठिन समय में सामाजिक सौहार्द को बनाने में मदद मिली है।

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