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Independence Day 2020: आजादी का दीवाना था यह दिग्गज कारोबारी, महात्मा गांधी के आश्रम के लिए दान की थी बड़ी रकम और जमीन

दो दशकों तक वह कांग्रेस के लिए एक फाइनेंसर की तरह रहे। इतिहासकार बिपिन चंद्रा ने भी लिखा है कि जमनालाल बजाज समेत कई ऐसे पूंजीवादी थे, जो उस दौर में कांग्रेस से जुड़े थे।

mahatma gandhi jamnalal bajajजमनालाल बजाज के साथ महात्मा गांथी (फोटो: जमनालाल बजाज फाउंडेशन)

भारत की आजादी के लिए स्वतंत्रता सेनानियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने वाले कारोबारी जमनालाल बजाज को महात्मा गांधी अपना दत्तक पुत्र मानते थे। राजस्थान में एक मारवाड़ी परिवार में 4 नवंबर, 1889 को जन्मे जमनालाल बजाज महात्मा गांधी के अनुयायी थे और उनके कहने पर किसी भी काम के लिए अपने योगदान को तैयार रहते थे। महज 12 साल की उम्र में शादी होने के बाद जमनालाल बजाज ने महाराष्ट्र के वर्धा में परिवार के बिजनेस को बढ़ाने का फैसला लिया था। महज 17 साल की उम्र में कारोबार संभालने वाले जमनालाल ने एक बाद एक कई कंपनियों की स्थापना की थी, जो आगे चलकर बजाज ग्रुप कहलाया है। आज यह देश के अहम कारोबारी घरानों में से एक है। आइए स्वतंत्रता दिवस से पहले जानते हैं, उनके बारे में…

जमनालाल बजाज ने कारोबार के साथ ही सामाजिक जीवन में भी अहम भूमिकाएं अदा कीं। एक समाज सुधारक और स्वतंत्रता सेनानी के तौर पर याद किए जाने वाले जमनालाल बजाज को महात्मा गांधी ने अपना 5वां पुत्र कहा था। महात्मा गांधी के दक्षिण अफ्रीका से वापस आने के बाद से ही जमनालाल बजाज उनसे प्रभावित थे। इसके बाद उन्होंने ही महात्मा गांधी को वर्धा में स्वतंत्रता आंदोलन का केंद्र बनाने की सलाह दी थी। इसके लिए उनकी ओर से 20 एकड़ जमीन भी डोनेट की गई थी। महात्मा गांधी का उन पर ऐसा प्रभाव था कि अंग्रेजों से मिली राय बहादुर की उपाधि को उन्होंने लौटा दिया था और आजादी की जंग में कूद पड़े।

असहयोग आंदोलन, नागपुर झंडा सत्याग्रह, सायमन कमिशन का बहिष्कार, डांडी मार्च और अन्य कई आंदोलनों में वह सक्रिय तौर पर शामिल रहे। यहां तक की डांडी मार्च में महात्मा गांधी की गिरफ्तारी के बाद जमनालाल बजाज को भी दो साल के लिए नासिक सेंट्रल जेल में रहना पड़ा। खुद महात्मा गांधी ने उनके योगदान का जिक्र करते हुए कहा था कि मैं कोई काम नहीं कर सकता, यदि जमनालाल बजाज की ओर से तन, मन और धन से सहयोग न हो। मुझे और उन्हें राजनीति में कोई दिलचस्पी नहीं है।

आजादी के महानायकों में से एक रहे बालगंगाधर तिलक का 1920 में निधन हुआ था और 1921 में उनके नाम पर ऑल इंडिया तिलक मेमोरियल फंड बना था। इसमें जमनालाल बजाज ने तबके दौर में 1 करोड़ रुपये की बड़ी पूंजी दान की थी। इस रकम का देश भर में खादी की लोकप्रियता के लिए इस्तेमाल किया गया था। करीब दो दशकों तक वह कांग्रेस के लिए एक फाइनेंसर की तरह रहे। इतिहासकार बिपिन चंद्रा ने भी लिखा है कि जमनालाल बजाज समेत कई ऐसे पूंजीवादी थे, जो उस दौर में कांग्रेस से जुड़े थे।

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