आज से नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत के साथ ही नया इनकम-टैक्स एक्ट, 2025 लागू हो गया है। इस नियम ने दशकों पुराने आयकर नियम, 1962 की जगह ले ली है। इस बीच, सरकार ने असेसमेंट ईयर (AY) 2026-27 के लिए सभी इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फॉर्म भी नोटिफाई कर दिए हैं, जिससे आने वाले फाइलिंग सीजन की तैयारी शुरू हो गई है।
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने इनकम-टैक्स रूल्स, 1962 के तहत ITR-1 से ITR-7, साथ ही ITR-U और ITR-V जारी किए हैं। इन फॉर्म्स का इस्तेमाल FY 2025-26 में हुई इनकम के लिए रिटर्न फाइल करने के लिए किया जाएगा।
खास बात यह है कि भले ही नया इनकम-टैक्स एक्ट, 2025 और संशोधित नियम 1 अप्रैल, 2026 से लागू होंगे, फिर भी टैक्सपेयर्स इस असेसमेंट ईयर के लिए मौजूदा कानूनी ढांचे के तहत ही रिटर्न फाइल करना जारी रखेंगे।
किन्हें कौन सा फॉर्म फाइल करना चाहिए?
ITR-1 (सहज)
उन निवासी व्यक्तियों के लिए जिनकी आय सैलरी, हाउस प्रॉपर्टी और अन्य स्रोतों से (सीमित कैपिटल गेन्स के साथ) 50 लाख रुपये तक है।
ITR-2 और ITR-3
उन व्यक्तियों और HUF के लिए जिनकी इनकम ज्यादा जटिल है, जिसमें कैपिटल गेन्स और बिज़नेस इनकम शामिल है।
ITR-4 (सुगम)
अनुमानित कराधान (presumptive taxation) के तहत आने वाले छोटे बिज़नेस और प्रोफेशनल्स के लिए ये फार्म है।
ITR-5, 6, 7
आईटीआर 5, 6, 7 फर्म, कंपनियों और ट्रस्ट के लिए है।
ITR-U
48 महीनों के भीतर रिटर्न अपडेट करने के लिए है।
ITR-V
अगर हम आईटीआर-वी की बात करें तो ये रिटर्न के सत्यापन (verification) के लिए है।
बिना ऑडिट वाले मामलों के लिए रिटर्न फाइल करने की अंतिम तारीख 31 जुलाई, 2026 ही रहेगी।
नई जानकारी सामने आने से नियमों का पालन करने वालों की संख्या बढ़ सकती है –
हालांकि फ़ॉर्म्स का ढांचा मोटे तौर पर वैसा ही है, लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि खुलासे की बढ़ी हुई जरूरतें टैक्सपेयर्स पर काफी असर डाल सकती हैं। टैक्स कनेक्ट एडवाइजरी सर्विसेज के पार्टनर विवेक जालान ने कहा: “बहुत से लोग ITR फाइल नहीं करते, जबकि वे ऐसा करने के हकदार होते हैं। उदाहरण के लिए, भले ही टैक्स देने की सीमा (थ्रेशोल्ड लिमिट) पार न हुई हो यानी नई व्यवस्था में 4 लाख रुपये और पुरानी व्यवस्था में 2.5 लाख रुपये फिर भी किसी व्यक्ति को अपना ITR फाइल करना होगा, अगर किसी और ने उसके PAN नंबर पर (डिडक्टी के तौर पर) 25000 रुपये से ज्यादा का TDS काटा हो या अगर उसके करंट अकाउंट में 1 करोड़ रुपये से ज़्यादा जमा हों आदि।”
ये शर्तें कोई नई नहीं हैं, लेकिन अब नए फॉर्म में ज्यादा साफ और विस्तृत जानकारी देनी होती है, जहां ऐसी शर्तें लागू होती हैं।
इसका मतलब है कि जिन लोगों को लगता है कि वे टैक्स देने की सीमा से नीचे आते हैं जिनमें वेतनभोगी कर्मचारी, पेंशनभोगी और NRI शामिल हैं, उन्हें भी रिटर्न फाइल करना पड़ सकता है, अगर वे इन रिपोर्टिंग शर्तों को पूरा करते हैं।
जिन लोगों ने फाइलिंग छोड़ दी है और NRI पर खास ध्यान
अपडेटेड जानकारी देने का यह नया तरीका, नियमों के पालन में रह गई कमियों को दूर करने के मकसद से बनाया गया लगता है। जैसा कि जालान ने बताया, “बहुत से लोग ITR फाइल करना छोड़ देते थे और जब इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को दूसरों से उस व्यक्ति के बारे में जानकारी मिलती थी, तो उन लोगों को कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ता था।”
उन्होंने आगे कहा कि NRI भी उन लोगों में शामिल रहे हैं जिन्होंने फाइलिंग छोड़ दी, खासकर उन मामलों में जहाँ रिपोर्टिंग की ये शर्तें लागू होती थीं।
इस समस्या को हल करने के लिए, बदले हुए फॉर्म (खासकर ITR-2, ITR-3 और ITR-4) अब ऐसे मामलों में खास तरह की घोषणाएं मांगते हैं, जो टैक्स देने वालों के लिए एक चेकलिस्ट की तरह काम करते हैं।
टैक्सपेयर्स को इन बातों का रखना चाहिए ध्यान
टैक्सपेयर्स को रिटर्न फाइल करने से पहले अपने बैंक लेन-देन, टीडीएस की एंट्री, विदेश यात्रा पर हुए खर्च और बड़े खर्चों की सावधानी से जांच करनी चाहिए।
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आज से नए महीने की शुरुआत के साथ ही नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत हो गई है। 1 अप्रैल 2026 से हमारे रोजमर्रा के जीवन और वित्तीय लेन-देन से जुड़े कई महत्वपूर्ण नियमों में बड़ा बदलाव हुआ है। इन नियमों में रेलवे टिकट कैंसिलेशन से लेकर पैन कार्ड के नियमों तक शामिल है। इन बदलावों का सीधा असर आपकी महीने की बचत, खर्च करने के तरीके पर पड़ सकता है। आइए जानते हैं आज से लागू हुए 7 बड़े बदलाव…
[ डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी देने के मकसद से लिखा गया है और इसे पेशेवर टैक्स सलाह नहीं माना जाना चाहिए। टैक्स कानूनों और व्यवस्थाओं में सरकार द्वारा अक्सर बदलाव किए जाते हैं। पाठकों को कोई भी वित्तीय निर्णय लेने से पहले, आधिकारिक आयकर विभाग की सूचनाओं से विवरण की पुष्टि कर लेनी चाहिए या किसी चार्टर्ड अकाउंटेंट से सलाह लेनी चाहिए। ]
