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अमीरों पर 40 पर्सेंट तक का टैक्स लगाने की सिफारिश, बिना मांगे सलाह देने पर IRS अधिकारियों के खिलाफ शुरू हुई जांच

वित्त मंत्रालय की आपत्ति के बाद केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि उसकी ओर से इस तरह की रिपोर्ट तैयार करने को नहीं कहा गया था। आयकर विभाग ने इस संबंध में जांच भी शुरू कर दी है।

Author Edited By सूर्य प्रकाश नई दिल्ली | Updated: April 27, 2020 1:23 PM
income taxIRS अधिकारियों की रिपोर्ट को गैरजिम्मेदार बता शुरू हुई जांच

कोरोना संकट से निपटने को फंड जुटाने के लिए 1 करोड़ रुपये सालाना से अधिक कमाई वाले लोगों पर 40 फीसदी तक टैक्स लगाना चाहिए। इसके अलावा 40 लाख रुपये सालाना से ज्यादा कमाने वाले लोगों को 4 पर्सेंट का कोरोना सेस लगना चाहिए। यही नहीं 5 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई वालों पर बढ़े हुए वेल्थ टैक्स का प्रस्ताव आना चाहिए। भारतीय राजस्व सेवा के कुछ अधिकारियों ने कोरोना संकट से निपटने के लिए दिए गए अपने सुझावों में सरकार से यह सिफारिश की है। हालांकि सरकार ने इन सुझावों को गैरजिम्मेदार करार देते हुए खारिज कर दिया है। ‘वित्तीय विकल्प और कोरोना महामारी से निपटने की रणनीति’ नाम से तैयार रिपोर्ट में अधिकारियों ने ये सुझाव दिए थे। अब इन अधिकारियों के खिलाफ केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने जांच शुरू कर दी है।

हालांकि वित्त मंत्रालय ने इस सुझाव को गलत करार दिया। यही नहीं आईआरएस एसोसिएशन की ओर से अपने ट्विटर हैंडल और वेबसाइट पर सरकार को भेजे गए पत्र को साझा करने पर आपत्ति भी जताई है। यही नहीं इसे गलत आचरण करार देते हुए सरकार ने अधिकारियों से सफाई मांगी है। वित्त मंत्रालय ने कहा है कि यह कुछ अधिकारियों का गैर-जिम्मेदाराना बर्ताव है। वित्त मंत्रालय की आपत्ति के बाद केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि उसकी ओर से इस तरह की रिपोर्ट तैयार करने को नहीं कहा गया था। आयकर विभाग ने इस संबंध में जांच भी शुरू कर दी है।

इस रिपोर्ट को करीब 50 य़ुवा इंडियन रेवेन्यू सर्विसेज के अधिकारियों ने तैयार किया था। इस ग्रुप में सबसे सीनियर अधिकारी 2014 बैच के हैं। रिपोर्ट में 1 करोड़ रुपये से ज्यादा कमाने वालों पर सीमित समय के लिए 40 फीसदी टैक्स का सुझाव देते हुए कहा था कि मोटी कमाई करने वाले ज्यादातर लोग अब भी वर्क फ्रॉम होम की सुविधा में काम कर रहे हैं। ऐसे में उनसे इस संकट में टैक्स के तौर पर वसूली की जा सकती है। रिपोर्ट में यूरोपीय अर्थशास्त्रियों का हवाला देते हुए कहा गया कि अमीरों पर टैक्स लगाना सबसे प्रगतिशील राजकोषीय व्यवस्था है।

इन लोगों के लिए की थी छूट की बात: रिपोर्ट में ऐसे लोगों को टैक्स से छूट का भी प्रस्ताव रखा गया था, जिनकी नौकरी चली गई हो। रिपोर्ट में कहा गया था कि सेक्शन 80सी के तहत छूट को बढ़ा देना चाहिए ताकि उपभोग को बढ़ावा मिल सके। खासतौर पर होम लोन पर ब्याज और ऑटोमोबाइल की खरीद पर टैक्स में कमी की जानी चाहिए ताकि उपभोग में इजाफा हो सके।

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