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अब सरकारी इंश्यारेंस कंपनी पर खतरा, छह महीने चलाने के लिए चाहिए 3000 करोड़! वित्त मंत्रालय को लिखी गई चिट्ठी

एक अधिकारी ने बताया, 'सरकार को कंपनी में करीब तीन हजार करोड़ रुपए लगाने होंगे ताकि अगली दो तिमाहियों तक कंपनी काम करती रहे। वित्त मंत्रालय को तीन सरकारी जनरल इंश्योरेंस कंपनियों के विलय के प्रस्ताव पर तेजी से काम करना होगा।'

Author नई दिल्ली | July 23, 2019 12:34 PM
तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है।

नेशनल इंश्योरेंस कंपनी की खराब वित्तीय हालत पर चिंता जताते हुए इंश्योरेंस रेगुलेटर ने वित्त मंत्रालय को पत्र भेजा है। अंग्रेजी अखबार ईटी ने एक अधिकारी के हवाले से बताया कि़ इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IRDA) ने नेशनल इंश्योरेंस कंपनी की खराब वित्तीय हालत का मुद्दा केंद्र सरकार के सामने कई बार उठाया। क्योंकि कंपनी की सॉल्वेंसी रेशियो एक पर्सेंट से नीचे चला गया है जबकि रेगुलेशन के मुताबिक सभी इंश्योरेंस कंपनियों को अपनी देनदारियों का डेढ़ गुना सरप्लस बनाए रखना होता है।

IRDA के विशेष प्रबंध के बाद भी नेशनल इंश्योरेंस कंपनी की सॉल्वेंसी रेशियो, रेगुलेटरी लिमिट से नीचे आ गई है। IRDA ने इससे पहले ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी और यूनाइटेड इंडिया एंश्योरेंस कंपनी की सॉल्वेंसी रेशियो मार्च 2018 के आखिर तक 1.5 फीसदी तक लाने में मदद की थी। किसी बीमा कंपनी को अपनी देनदारी के मुकाबले जितनी एसेट्स अनिवार्य रूप से रखनी होती हैं, उसे सॉल्वेंसी मार्जिन कहा जाता है। यह बैंकों की कैपिटल रेशियो जैसा मामला है।

अधिकारी ने बताया, ‘सरकार को कंपनी में करीब तीन हजार करोड़ रुपए लगाने होंगे ताकि अगली दो तिमाहियों तक कंपनी काम करती रहे। वित्त मंत्रालय को तीन सरकारी जनरल इंश्योरेंस कंपनियों के विलय के प्रस्ताव पर तेजी से काम करना होगा।’ बता दें कि केंद्र ने साल 2019-20 के बजट में जनरन इंश्योरेंस कंपनियों के मर्जर के लिए पैसा आवंटित नहीं किया था। मगर जनरल इंश्योरेंस बिजनेस (नेशनलाइजेशन) एक्ट 1972 में संशोधन करने और ‘चार कंपनियां होंगी’ के वाक्यांश की जगह ‘चार तक कंपनियां होंगी’ करने का प्रस्ताव उसने फाइनेंस बिल में दिया था।

हालांकि सरकार ने साल 2018-19 के बजट में अनलिस्टेड इंश्योरेंस कंपनियों… ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस जैसी कंपनी को मिलाकर एक कंपनी बनाने की घोषणा की थी। इसके अलावा न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी को अलग रखने की बात भी कही गई थी।

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