ताज़ा खबर
 

रेलवे के सस्‍ते किराये से महंगी हो रही आपकी बिजली, जानिए कैसे

रेलवे के कुल माल ढुलाई में 44 फीसदी हिस्सा कोयला का है। एक यूनिट बिजली के लिए करीब 63 ग्राम कोयला की जरूरत होती है। इसके लिए ट्रांस्पोर्टेशन कॉस्ट 13 पैसे से लेकर 1.85 रुपए प्रति यूनिट तक आती है।

तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है। (एक्सप्रेस फोटो)

भारतीय रेलवे (आईआर) परंपरागत रूप से दोहरी अपेक्षाओं से जुड़ा हुआ है: एक सार्वजनिक उपयोगिता जो एक तरफ बड़े पैमाने पर नागरिकों का सबसे सस्ता ट्रांसपोर्ट का साधन है और एक वाणिज्यिक इकाई जो लाभदायक है। अपने पैसेंजर सेगमेंट से होने वाली अंडर रिकवरीज की भरपाई करने के लिए अपने माल ढुलाई में ओवरचार्जिंग कर रहा है। इसके बारे में हाल ही में एक रिसर्च रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि यह अभ्यास एक प्रतिद्वंद्वी उत्पादक हो सकता है।

ब्रुकिंग्स इंडिया द्वारा की गई एक स्टडी के मुताबिक, रेलवे ने अपने “सामाजिक दायित्व” को पूरा करने के लिए कोयला ढुलाई पर 31 फीसदी तक ओवरचार्जिंग की। इसका सीधा असर लोगों पर पड़ता है, इसकी वजह लोगों के टैरिफ बढ़ जाते हैं और जितनी बिजली वह इस्तेमाल करते हैं उससे ज्यादा उन्हें पे करना पड़ता है। रेलवे के कुल माल ढुलाई में 44 फीसदी हिस्सा कोयला का है। एक यूनिट बिजली के लिए करीब 63 ग्राम कोयला की जरूरत होती है। इसके लिए ट्रांस्पोर्टेशन कॉस्ट 13 पैसे से लेकर 1.85 रुपए प्रति यूनिट तक आती है। यह दूरी पर निर्भर करता है कि पावर प्लांट में कितन दूर से कोयला लाया जा रहा है। इस तरह नॉन रिन्यूएबल सोर्स से पैदा होने वाली बिजली की कीमत 3.53 रुपए प्रति यूनिट पड़ती है।

वित्त वर्ष 17 में, कोयला थर्मल पावर प्लांटों पर 10,800 करोड़ रुपये “ओवरचार्ज” देना पड़ा, जिसकी वजह से औसतन 10 पैसे प्रति यूनिट बिजली की लागत में बढ़ोतरी करनी पड़ी। 1,149 यूनिट की मौजूदा प्रति व्यक्ति खपत के चलते, भारत में हर व्यक्ति सब्सिडी वाले रेल टिकटों की भरपाई के लिए लगभग 115 रुपये प्रति वर्ष अतिरिक्त बिजली शुल्क का भुगतान करता है। रिपोर्ट के मुताबिक, यदि यात्री किराया 4.5% के मौजूदा सीएजीआर को बनाए रखते हैं और यात्री ट्रेनों से होने वाले घाटे की भरपाई करने के लिए रेलवे माल ढुलाई पर ओवरचार्जिंग करता रहेगा तो वित्त वर्ष 2030 में 18 पैसे प्रति यूनिट और अलग से देने पड़ेंगे।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App