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रेटिंग एजेंसी मूडीज से मोदी सरकार को झटका, घटाया जीडीपी वृद्धि का अनुमान

मूडीज ने लिखा है,''भारतीय अर्थव्यवस्था लगातार सुधर रही है। सुधार का कारण निवेश और खर्च दोनों ही हैं। हालांकि तेल की ऊंची कीमतों और कठिन आर्थिक हालातों के कारण विकास दर में सुधार धीमा है। हमें उम्मीद है कि 2018 में विकास दर 7.3% तक गिर सकती है।

ग्लोबल रेटिंग एजेंसी मूडीज (रॉयटर्स फाइल फोटो)

अंतरराष्ट्रीय रेटिंग संस्था मूडीज ने निवेशकों के लिए बुधवार (30 मई) को अपनी सलाह जारी की है। मूडीज का अनुमान है कि साल 2018 में भारत की विकास दर में गिरावट आने की उम्मीद है। ये दर 7.3% तक जाने का अनुमान है। वहीं मूडीज ने अपने पिछले अनुमान में तेल की बढ़ी कीमतों और कठिन अार्थिक हालातों के बावजूद विकास दर 7.5% तक रहने का अनुमान लगाया था। मूडीज ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है,”भारतीय अर्थव्यवस्था लगातार सुधर रही है। सुधार का कारण निवेश और खर्च दोनों ही हैं। हालांकि तेल की ऊंची कीमतों और कठिन आर्थिक हालातों के कारण विकास दर में सुधार धीमी गति से हो रहा है। इसके बावजूद हमें उम्मीद है कि 2018 में विकास दर 7.3% तक गिर सकती है। ये हमारे पिछले अनुमान से .2% कम है। हालांकि साल 2019 में विकास दर में सुधार आने की उम्मीद मूडीज ने जताई है, लेकिन उस वक्त भी यह बढ़कर 7.5% से आगे नहीं जा सकती है।

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मूडीज ने आगे कहा,”बात अगर घरेलू बाजार की करें तो विकास दर को ग्रामीण इलाकों में खपत बढ़ने से सहारा मिलेगा। घरेलू खपत को बढ़ाने में सामान्य मानसून और ऊंची दर वाले न्यूनतम समर्थन मूल्य की बड़ी भूमिका है। वहीं दीवालिया कानून लागू होने के बाद कॉर्पोरेट कंपनियों और बैंक दोनों की बैलेंस शीट में सुधार आएगा। इससे निजी निवेश की प्रक्रिया को फिर से शुरू करने में भी मदद मिलेगी।” रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र है कि ​नए गुड्स् और सर्विस टैक्स यानी जीएसटी लागू होने के दौर के कारण अगली वित्तीय तिमाही तक लेनदेन प्रभावित रहने की उम्मीद है। जिसकी वजह से बाजार में फिसलन बढ़ने की उम्मीद है।

हालांकि मूडीज को उम्मीद है कि एक साल से भी कम वक्त में बाजार अपने पुराने ढर्रे पर लौट आएगा। बता दें कि बाजार में जीएसटी लागू होने के कारण व्यापारियों ने कारोबार में क्रमिक गिरावट आने की समस्या का सामना किया था। लेकिन मानसून बेहतर रहने के कारण घरेलू खपत में बढ़ोत्तरी से बाजार को सुधार की उम्मीद जगी है।

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