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श्रम कानूनों में ढील पर अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन की पीएम नरेंद्र मोदी से अपील, नियमों को बनाए रखें

आईएलओ ने कहा कि केंद्र सरकार और राज्य सरकारों को श्रम कानूनों को बनाए रखना चाहिए। 10 मजदूर संगठनों की ओर से अंतरराष्ट्रीय संस्था के समक्ष शिकायत किए जाने के बाद यह पत्र लिखा गया है।

labour law in indiaभारत के कई राज्यों में श्रम कानूनों में ढील पर ILO ने उठाया सवाल

विदेशी कंपनियों को चीन छोड़कर भारत आने के लिए लुभाने के मकसद से श्रम कानूनों में बदलाव को लेकर अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन ने पीएम मोदी को पत्र लिखकर चिंता जताई है। मजदूरों के अधिकारों की बात करने वाली वैश्विक संस्था ने पीएम मोदी को लिखे पत्र में कहा कि भारत को अंतरराष्ट्रीय समुदाय के समक्ष श्रमिकों को लेकर व्यक्त की गई प्रतिबद्धता का पालन करना चाहिए। इकनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक आईएलओ ने कहा कि केंद्र सरकार और राज्य सरकारों को श्रम कानूनों को बनाए रखना चाहिए। 10 मजदूर संगठनों की ओर से अंतरराष्ट्रीय संस्था के समक्ष शिकायत किए जाने के बाद यह पत्र लिखा गया है।

दरअसल कई बीजेपी शासित राज्यों ने पिछले दिनों श्रम कानूनों में बदलाव किया था। इसके अलावा कई राज्यों ने वर्कर्स के काम की शिफ्ट को 8 से बढ़ाकर 12 घंटे किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। बीजेपी शासित राज्यों की ओर से ऐसा किए जाने का आरएसएस समर्थित संगठन भारतीय मजदूर संघ ने भी विरोध किया था। आईएलओ के सीनियर अधिकारी कारेन कर्टिस की ओर से मजदूर संगठनों को लिखे पत्र में कहा गया, ‘इंटरनेशनल लेबर ऑर्गनाइजेशन के डायरेक्टर जनरल गाय राइडर ने इस मामले में दखल दिया है और पीएम नरेंद्र मोदी से अपील की है कि केंद्र और राज्य सरकारें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिबद्धता को बनाए रखें।’

यही नहीं अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन की ओर से 22 मई को लिखे गए पत्र में कहा गया कि यदि भारतीय प्राधिकरण की ओर से कोई जवाब या फिर टिप्पणी आती है तो उसके बारे में आपको जानकारी दी जाएगी। दिलचस्प बात यह है कि भले ही भारतीय मजदूर संघ ने श्रम सुधारों का तीखा विरोध किया था, लेकिन इंटरनेशनल लेबर ऑर्गनाइजेशन के समक्ष उसने विरोध नहीं किया।

कांग्रेस समर्थित संगठन इंटक, लेफ्ट समर्थित संगठन CITU और AITUC एवं HMS, AIUTUC, TUCC, SEWA, AICCTU, LPF और UTUC जैसे संगठनों ने भी अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन को पत्र लिखकर अपील की थी कि श्रम कानूनों में बदलाव को रोका जाए। यही नहीं श्रम संगठनों ने पिछले दिनों एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन भी इसके खिलाफ किया था।

बीजेपी शासित राज्य उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और गुजरात ने पिछले दिनों ज्यादातर कानूनों को निलंबित करने का आदेश पारित किया था। हालांकि भारतीय मजदूर संघ समेत कई संगठनों ने तीखे विरोध के बाद यूपी और राजस्थान की सरकारों ने सिंगल शिफ्ट को 8 घंटे की बजाय 12 घंटे करने के प्रस्ताव को वापस ले लिया था।

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