मां से मिले 25 रुपये से खड़ा किया होटल साम्राज्य, जानिए क्लर्क से करियर शुरू करने वाले ओबेरॉय की कहानी

ओबेरॉय होटल्स एंड रिसॉर्ट्स के संस्थापक राय बहादुर मोहन सिंह ओबेरॉय ने होटल के क्लर्क की नौकरी से करियर की शुरुआत की। महज 25 रुपये से उन्होंने 7000 करोड़ का साम्राज्य खड़ा कर दिया।

Rai Bahadur Mohan Singh Oberoi
25 रुपये से बना दी 7000 करोड़ की कंपनी। (Photo Source: https://www.oberoigroup.com)

किसी भी क्षेत्र में सफल हो गए लोगों को पूरी दुनिया जानती है। हालांकि लोग यह नहीं जानते कि उस सफलता के पीछे कितनी असफल कहानियां होती हैं, कितना संघर्ष होता है और किस स्तर के समर्पण की जरूरत होती है। आज हम आपको एक ऐसी ही कहानी बताने जा रहे हैं। देश में होटलों का दूसरा सबसे बड़ा साम्राज्य खड़ा करने वाले इस कारोबारी ने मां से मिले 25 रुपये से व्यवसाय की शुरुआत की थी। यह कहानी है ओबेरॉय होटल्स एंड रिसॉर्ट्स (Oberoi Hotels and Resorts) के संस्थापक राय बहादुर मोहन सिंह ओबेरॉय (Rai Bahadur Mohan Singh Oberoi) की।

गुदड़ी के लाल हैं Mohan Singh Oberoi

ऐसा नहीं है कि मोहन सिंह ओबेरॉय (Mohan Singh Oberoi) को यह सफलता यूं ही मिल गई। भारतीय कारोबार जगत के दिग्गजों में शुमार होने से पहले मोहन सिंह ने कई असफलताओं का सामना किया। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि भारत का पहला आधुनिक फाइव स्टार होटल (Five Star Hotel) शुरू करने वाले मोहन सिंह ने अपने करियर की शुरुआत मां से मिले महज 25 रुपये से की थी।

जूते की फैक्ट्री में मिला था पहला काम

मोहन सिंह का जन्म मौजूदा पाकिस्तान के झेलम जिले में स्थित भनाउ गांव में एक सिख परिवार में हुआ था। मोहन सिंह के ऊपर बचपन से ही एक के बाद एक दुखों का पहाड़ टूटता रहा। छह महीने के थे, तभी पिता का निधन हो गया। बीच में पढ़ाई छोड़ लाहौर में जूते की फैक्ट्री में काम करना शुरू किया तो साल भर में ही फैक्ट्री बंद हो गई। 1918 में अमृतसर में हुए सांप्रदायिक दंगे की आग ने जूते की उस फैक्ट्री को लील लिया।

इसी समय मोहन सिंह की शादी करा दी गई। शादी के बाद वह ससुराल में रहकर नौकरी खोजने लगे। काफी समय तक नौकरी नहीं मिलने पर दुखी होकर मोहन सिंह मां के पास गांव लौट गए। मां ने तब मोहन सिंह को 25 रुपये दिए और काम खोजने के लिए घर से जाने को कहा।

शिमला के एक होटल में की क्लर्क की नौकरी

वह समय था, जब पिछले सदी में अभी जैसे हालात बने हुए थे। कोरोना महामारी की तरह ही स्पेनिश प्लेग का प्रकोप पूरी दुनिया को तबाह कर रहा था। संयोग से काफी मशक्कत के बाद मोहन सिंह ओबेरॉय को 1922 में शिमला के एक होटल में क्लर्क की नौकरी मिल गई। विपरीत परिस्थितियों को झेलकर अपने इरादे चट्टान कर चुके मोहन सिंह ओबेरॉय ने इसके बाद मुड़कर नहीं देखा।

साल 1934 की बात है। कौन जानता था कि यह साल भारतीय होटल उद्योग के इतिहास में कालजई हो जाने वाला है। आने वाले समय में होटल इंडस्ट्री पर छा जाने वाले मोहन सिंह ओबेरॉय ने पहली प्रॉपर्टी ‘द क्लार्क्स होटल (The Clarkes Hotel) को खरीदा। इसके लिए उन्होंने अपनी पत्नी के जेवर-गहने समेत सारी संपत्ति गिरवी रख दी।

हैजा की महामारी ने दिया दूसरा बड़ा मौका

कहते हैं कि मेहनत कभी व्यर्थ नहीं जाती। मोहन सिंह ओबेरॉय ने भी इस कहावत को सच साबित किया। महज पांच साल में वह सारा कर्ज उतार चुके थे। कलकत्ता में फैली हैजा की महामारी ने मोहन सिंह ओबेरॉय को अगला अहम पड़ाव दिया। महामारी के चलते घाटे में चल रहे ग्रैंड होटल (Grand Hotel) को बेचा जा रहा था। मोहन सिंह ओबेरॉय ने 500 कमरे वाले इस होटल को लीज पर ले लिया।

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आज कई देशों में फैला है Mohan Singh Oberoi का होटल साम्राज्य

मोहन सिंह ओबेरॉय की लगन और उनके अनुभव से यह होटल भी चल निकला। जल्दी ही उनका कारोबार भारतीय होटल व्यवसाय का दूसरा सबसे बड़ा साम्राज्य बन गया। आज उनका होटल साम्राज्य कई देशों में फैला है। ओबेरॉय होटल्स एंड रिसॉर्ट्स और ट्राइडेंट ब्रांड (Trident Brands) के पास आज 31 लग्जरी होटल हैं। दुनिया भर में 12 हजार से अधिक लोग आज मोहन सिंह ओबेरॉय के समूह में काम कर रहे हैं। ओबेरॉय समूह का कारोबार आज 7000 करोड़ रुपये से अधिक का है। उन्हें भारतीय होटल उद्योग का जनक भी कहा जाता है।

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