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चुनाव वाले राज्यों में महंगाई दर ज्यादा, पढ़ाई, स्वास्थ्य पर खर्च कम- जानिए क्या कहते हैं आरबीआई के आंकड़े

पंजाब में, मुद्रास्फीति दर पिछले पांच वर्षों में से तीन सालों में राष्ट्रीय औसत से ऊपर रही है। वहीं मणिपुर में पांचों साल महंगाई दर राष्ट्रीय औसत से ज्यादा रही है।

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चुनावी राज्यों में महंगाई दर ज्यादा (एक्सप्रेस फाईल फोटो)

अगले महीने जिन राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं, उनमें से ज्यादातर राज्यों में मंहगाई दर ज्यादा रही है। इन राज्यों में मंहगाई दर के साथ-साथ पढ़ाई और स्वास्थ्य पर भी कम खर्चे हुए हैं।

आरबीआई की रिपोर्ट में ये बातें सामने आई हैं। भारतीय रिजर्व बैंक की रिपोर्ट के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि दो बड़े राज्य, उत्तर प्रदेश और पंजाब, शिक्षा पर खर्च के मामले में राष्ट्रीय औसत से नीचे है। दरअसल, पंजाब का स्वास्थ्य और विकास पर खर्च भी औसत से कम था। चार राज्यों – पंजाब, गोवा, उत्तराखंड और मणिपुर में पिछले पांच वर्षों में कम से कम तीन साल, राष्ट्रीय औसत से अधिक मुद्रास्फीति दर रही है।

कुल खर्च के अनुपात के रूप में शिक्षा पर राज्य व्यय के मामले में, उत्तर प्रदेश में सबसे तेज गिरावट दर्ज की गई है। जो 2016-17 में 16.7 प्रतिशत से 2021-22 में 12.5 प्रतिशत पर आ गई है। जबकि 2021-22 के बजट अनुमान में राष्ट्रीय औसत 13.9 प्रतिशत था।

इसी अवधि के दौरान पंजाब में सुधार देखने को मिला लेकिन तब भी वो राष्ट्रीय औसत से नीचे रहा। साल 2016-17 में 8.6 प्रतिशत से 2021-22 में 10 प्रतिशत तक, पंजाब राष्ट्रीय औसत से नीचे रहा। केवल उत्तराखंड ने 17.3 प्रतिशत पर राष्ट्रीय औसत से अधिक खर्च किया है। मणिपुर ने 10.7 फीसदी और गोवा ने 13.1 फीसदी खर्च किया है।

वहीं अगर हम स्वास्थ्य की बात करें तो कुल व्यय के अनुपात के रूप में स्वास्थ्य पर राज्य व्यय के लिए, पंजाब ने 3.4 प्रतिशत और मणिपुर ने 4.2 प्रतिशत खर्च किया है। जो राष्ट्रीय औसत 5.5 प्रतिशत से नीचे है। वहीं ये खर्च गोवा में 6.8 प्रतिशत, उत्तराखंड में 6.1 प्रतिशत और उत्तर प्रदेश का 5.9 प्रतिशत रहा। साल 2016-17 और 2021-22 के बीच, मणिपुर को छोड़कर, सभी राज्यों में स्वास्थ्य पर खर्च में सुधार हुआ है, इसी अवधि के दौरान राष्ट्रीय औसत 4.6 प्रतिशत से बढ़कर 5.5 प्रतिशत रहा। वहीं विकास कार्यों पर कुल खर्च के मामले में, पंजाब और उत्तराखंड राष्ट्रीय औसत से नीचे थे।

इसके अलावा कुछ राज्यों में राष्ट्रीय औसत से अधिक महंगाई दर रही है। उदाहरण के लिए, उत्तराखंड में चार वर्षों (2017-18 से 2020-21) में उच्च मुद्रास्फीति दर थी। 2020-21 में, उत्तराखंड के लिए वार्षिक सीपीआई मुद्रास्फीति दर 8.1 प्रतिशत थी, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह 6.2 प्रतिशत था। 2019-20 में, यह राष्ट्रीय औसत 4.8 प्रतिशत के मुकाबले 5.9 प्रतिशत था।

पंजाब में, मुद्रास्फीति दर पिछले पांच वर्षों में से तीन सालों में राष्ट्रीय औसत से ऊपर रही है। यह 2019-20 में राष्ट्रीय औसत 4.8 प्रतिशत के मुकाबले 5 प्रतिशत, 2018-19 में 3.4 प्रतिशत राष्ट्रीय औसत के मुकाबले 3.8 प्रतिशत और 2017-18 में 3.6 प्रतिशत राष्ट्रीय औसत के मुकाबले 3.7 प्रतिशत रहा है।

वहीं अगर हम मणिपुर की बात करें तो यहां सभी पांच वर्षों में महंगाई दर उच्च रही है। राज्य में साल 2016-17 में 10.1 प्रतिशत, 2017-18 में 12.4 प्रतिशत, 2018-19 में 8.7 प्रतिशत, 2019-20 में 6.9 प्रतिशत, 2020-21 में 6.7 प्रतिशत महंगाई दर रही है।

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