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‘जीएसटी नियम आने के बाद अमल के लिए उद्योगों को चाहिए 3 माह का वक्त’

केन्द्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने 2016-17 के लिये जीडीपी अनुमान जारी करते हुये इसके वर्ष के दौरान 7.1 प्रतिशत रहने का अग्रिम अनुमान जारी किया है। 

Author नई दिल्ली | January 7, 2017 9:57 PM
जीएसटी विधेयक (वस्तु एवं सेवा कर)

उद्योग जगत का मानना है कि वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) में अंतिम सहमति बनने और नियम-कायदे जारी होने के बाद इस पर अमल के लिये उसे कम से कम तीन माह का समय चाहिये। देश के अग्रणी वाणिज्य एवं उद्योग मंडल ‘फिक्की’ के नये अध्यक्ष पंकज आर. पटेल ने यह बात कही है। उन्होंने कहा, ‘हमें जीएसटी के ‘रूल’ (नियम) चाहिये, एक बार नियम आ जायें तो उसके बाद हमें अपने सॉफ्टवेयर को उसके अनुरूप करने के लिये तीन माह का समय चाहिये।’ पटेल ने कहा, ‘मोटे तौर पर उद्योगों की सब तैयारी है, लेकिन किस वस्तु पर किस दर से कर लगेगा यह जीएसटी के नियम सामने आने के बाद ही पता चलेगा। हमारे आपूर्तिकर्ता और आगे खरीदारों को भी नियमों के अनुरूप तैयारी करनी होगी। बिल बुक भी नई छपानी होगी, नियम आने पर ही यह तैयारी पूरी होगी।’ उल्लेखनीय है कि जीएसटी व्यवस्था को लागू करने के लिये जीएसटी परिषद ने चार स्तरीय कर ढांचे (पांच, 12, 18 और 28 प्रतिशत) को अंतिम रूप दिया है। इसमें आवश्यक वस्तुओं के लिये निचली दर होगी जबकि गैर-जरूरी और भोग विलास की वस्तुओं पर सबसे ऊंची दर से कर लगाया जायेगा।

सरकार का इरादा अगले वित्त वर्ष से जीएसटी लागू करने का है। वित्त मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता वाली जीएसटी परिषद अप्रत्यक्ष कर क्षेत्र की इस व्यवस्था को लागू करने के लिये तेजी से काम कर रही है। हालांकि, अभी कुछ मुद्दों पर केन्द्र और राज्यों के बीच सहमति नहीं बन पाई है जिसकी वजह से एक अप्रैल 2017 से जीएसटी लागू होना मुश्किल नजर आ रहा है। फिक्की अध्यक्ष पटेल से जब पूछा गया कि जीएसटी से क्या फायदे हैं? जवाब में उन्होंने कहा ‘काफी बड़ा क्षेत्र असंगठित है, उसे कर दायरे में लाने से मदद मिलेगी, कर चोरी रुकेगी। सब जगह एक जैसी वस्तुओं पर समान दर से कर लगेगा, सरकार का राजस्व बढ़ेगा और अंतत इन बढ़े हुए संसाधनों से सार्वजनिक हित के कार्य हो सकेंगे।’ नोटबंदी के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि इससे अलमारी-तिजोरी में रखा पैसा बाहर आ गया, जो पैसा अंदर बंद था वह बैंकों में पहुंच गया, यह धन देश में आर्थिक गतिविधियां बढ़ाने के काम आयेगा, जिसका लाभ अंतत: देश की जनता को होगा।

जायडस कैडिला हेल्थकेयर के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक पंकज आर. पटेल ने पिछले महीने फिक्की की 89वीं वार्षिक आम बैठक की समाप्ति पर वर्ष 2016-17 के लिये देश के इस प्रमुख उद्योग मंडल का अध्यक्ष पद संभाला। वह भारतीय प्रबंधन संस्थान, अहमदाबाद की वित्त समिति के चेयरमैन भी हैं। उनके साथ एडलवेइस समूह के राशेस शाह को फिक्की का वरिष्ठ उपाध्यक्ष और फोर्टिस हेल्थकेयर लिमिटेड के कार्यकारी चेयरमैन मालविंदर मोहन सिंह को उपाध्यक्ष चुना गया। पटेल ने कहा कि नोटबंदी का सबसे बड़ा फायदा यह हुआ कि बैंकों में बहुत कम समय में काफी नकदी पहुंच गई और उसकी वजह से ब्याज दर कम हुई है। उन्होंने कहा ‘भारत के इतिहास में पहली बार एक झटके में ब्याज दर में एक प्रतिशत तक कमी हुई है। इससे कर्जदारों की मासिक किस्तों का बोझ भी कम होगा। ब्याज दर कम होने से मांग बढ़ेगी, आर्थिक गतिविधियां बढेंगी जिसका सभी को लाभ मिलेगा।’ हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि नोटबंदी से जीडीपी वृद्धि पर इस साल कुछ असर पड़ सकता है और यह सात प्रतिशत के आसपास रह सकती है। केन्द्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने 2016-17 के लिये जीडीपी अनुमान जारी करते हुये इसके वर्ष के दौरान 7.1 प्रतिशत रहने का अग्रिम अनुमान जारी किया है।

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