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एक ऐसी भी जनजाति जिसमें रिश्तेदारों के मरने पर महिलाओं को काटनी पड़ती है अपनी अंगुली

इस जनजाति के पुरुष अपने लिंग में पीली लंबी पाइप पहनते हैं जिसे कोटेका कहा जाता है।

दानी जनजाति की पुराने समय में तैयार की गई ममी अभी भी सुरक्षित हैं।

दुनिया के ज्यादातर हिस्से में ऐसी जनजातियां पाई जाती हैं जो अपने रहन-सहन और मान्यताओं-परंपराओं से सभ्य समाज को चौंकाती हैं। अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, भारत और इंडोनेशिया इत्यादि जैसे देशों में कई ऐसी जनजातियां रहती हैं जो अपनी हजारों साल पुरानी जीवन पद्धति को जारी रखे हुए हैं। ऐसी ही एक जनजातियों में एक है इंडोनेशिया के पश्चिमी न्यू गिनी में रहने वाली दानी जनजाति। दानी जनजाति में आज भी एक ऐसा रिवाज प्रचलित है जिसे सिर्फ बर्बर ही कहा जा सकता है। इस जानजाति की महिलाओं को किसी रिश्तेदार की मौत पर अपनी अंगुलियों के सिरे को काटना पड़ता है। दानी जनजाति की महिलाओं से उम्मीद की जाती है कि वो मृत रिश्तेदार को श्रद्धांजलि देने और उसका शोक मनाने के लिए अपनी अंगुली का सिरा काटेंगी। इस जनजाति के पुरुष अपने लिंग में पीली लंबी पाइप पहनते हैं जिसे कोटेका कहा जाता है।

दानी लोगों का मानना है कि अंगली काटना प्रियजनों के जाने से होने वाले कष्ट का प्रतीक होता है। कई दानी महिलाओं को जीवन में कई अंगुलियों के सिरे काटने पड़ते हैं। इस जनजाति के बारे में बाहरी दुनिया को सबसे पहले अमेरिकी फिलैंथ्रोपिस्ट रिचर्ड आर्कबोल्ड ने 1938 में बताया था। अगले कुछ दशकों में ही ये जनजाति अपने विचित्र पहनावे और संस्कृति के कारण पूरी दुनिया में चर्चित हो गई। इंडोनेशिया सरकरा ने इस परंपरा पर रोक लगा दी है। दानी कबीले में चार दिन गुजारने वाले एक फोटोग्राफर तेह हैन के अनुसार कबीले की बुजुर्ग महिलाओं के हाथों में इस परंपरा के सबूत साफ देखे जा सकते हैं। दानी लोग बहुत कम कपड़े पहनते हैं। महिलाएं कमर के ऊपर का हिस्सा नहीं ढंकती। और पुरुष भी लगभग नग्न ही रहते हैं।  विभिन्न आंकड़ों के अनुसार अब दुनिया में कुछ सौ दानी ही बचे हैं। बाहरी दुनिया इन जनजातियों की जीवनशैली को लेकर चाहे जितनी हैरान हो व्यवहार में दानी लोग बहुत ही भोले और सरल होते हैं।

दानी जनजाति का सरल रहन-सहन पर्यटकों के लिए हमेशा कौतुहल का विषय रहता है। दानी साल में एक बार दूसरे कबीलों (याली और लानी) के संग मिलकर एक छद्म युद्ध लड़ते हैं। इस युद्ध उत्सव में इन कबीलों के सर्वश्रेष