भारत की खुदरा महंगाई अप्रैल में पिछले महीने के 3.4% से बढ़कर 3.8% हो गई। यह भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 4% के लक्ष्य के और करीब पहुंच गई है, क्योंकि खाने-पीने की चीज के दामों में बढ़ोतरी का असर अब घरों के खर्च पर भी पड़ने लगा है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के अनुसार, पिछले महीने खाने-पीने की चीज़ों की महंगाई दर 4.2% थी, जबकि मार्च में यह 3.87% थी।
राष्ट्रीय सांख्यिकी संगठन (NSO) के डेटा के मुताबिक, अप्रैल के लिए अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) पर आधारित सालाना महंगाई दर (बेस ईयर 2024 के साथ) 3.48% रही। ग्रामीण और शहरी इलाकों के लिए संबंधित महंगाई दरें क्रमशः 3.74% और 3.16% रहीं।
पिछले महीने, रिजर्व बैंक ने 2026-27 के लिए CPI महंगाई दर 4.6% रहने का अनुमान लगाया था, जिसमें पहली तिमाही (Q1) में यह 4% रहने की उम्मीद थी। बैंक ने यह भी कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और संभावित अल नीनो स्थितियों (जिनका दक्षिण-पश्चिम मॉनसून पर बुरा असर पड़ सकता है) के कारण ऊर्जा की कीमतें लगातार ऊँची बनी हुई हैं, जिससे महंगाई बढ़ने का जोखिम बना हुआ है।
मार्च में भी खुदरा महंगाई में तेजी देखने को मिली थी
मार्च 2026 में खुदरा महंगाई बढ़कर 3.4% हो गई, जो फरवरी में 3.21% थी। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के आंकड़ों के आधार पर, मार्च में खाद्य पदार्थों की कीमतों में वृद्धि की दर 3.87% रही थी जो पिछले महीने के 3.47% से ज्यादा है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में खुदरा महंगाई क्रमशः 3.63 प्रतिशत और 3.11% दर्ज की गई थी।
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