भारत के विदेशी व्यापार में जून 2026 के दौरान बढ़ोतरी दर्ज की गई। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, जून में भारत का एक्सपोर्ट (निर्यात) 15.5% बढ़कर 40.41 अरब डॉलर पर पहुंच गया। वहीं, इंपोर्ट (आयात) 31% की तेज बढ़ोतरी के साथ 70.84 अरब डॉलर हो गया। आयात में निर्यात के मुकाबले ज्यादा वृद्धि होने से देश का ट्रेड डेफिसिट (व्यापार घाटा) बढ़कर 30.43 अरब डॉलर हो गया।

चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में भी भारत के विदेशी व्यापार में वृद्धि देखने को मिली। इस दौरान देश का कुल एक्सपोर्ट 15.92% बढ़कर 129.32 अरब डॉलर रहा, जबकि इंपोर्ट 19.89% बढ़कर 216.18 अरब डॉलर पर पहुंच गया।

इस वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में सोने का इंपोर्ट पिछले साल की अप्रैल-जून अवधि के 7.49 अरब डॉलर से बढ़कर 11.01 अरब डॉलर हो गया।

पश्चिम एशियाई देशों को बढ़ा भारत का एक्सपोर्ट

समाचार एजेंसी PTI के अनुसार, कॉमर्स सेक्रेटरी राजेश अग्रवाल ने ट्रेड डेटा पर आयोजित प्रेस ब्रीफिंग में बताया कि जून 2026 में पश्चिम एशियाई देशों को भारत का एक्सपोर्ट 7.29% बढ़कर 5 अरब डॉलर पर पहुंच गया। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में भारतीय उत्पादों की मांग बनी हुई है, जिससे निर्यात को मजबूती मिली। वहीं, जून में आयात में आई तेज बढ़ोतरी की मुख्य वजह कच्चे तेल (क्रूड ऑयल), इलेक्ट्रॉनिक्स सामान, मशीनरी और कीमती धातुओं का अधिक आयात रहा।

क्या होता है व्यापार घाटा?

व्यापार घाटा (Trade Deficit) उस स्थिति को कहा जाता है, जब किसी देश का आयात उसके निर्यात से अधिक होता है। आसान शब्दों में समझें तो यदि कोई देश विदेशों से सामान और सेवाएं खरीदने पर जितना खर्च करता है, वह विदेशों में सामान और सेवाएं बेचकर होने वाली कमाई से ज्यादा हो, तो दोनों के बीच का अंतर व्यापार घाटा कहलाता है।

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जून में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 4.38% पर पहुंच गई। खाद्य और ईंधन की बढ़ती कीमतों, पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और असमान मानसून की चिंताओं के चलते महंगाई का दबाव बढ़ा। मई में खुदरा महंगाई 3.93 प्रतिशत थी। यहां पढ़ें पूरी खबर…