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रिपोर्ट: सरकारी बैंकों ने 6 महीने में वसूले 60 हजार करोड़ रुपए, केंद्र ने बताया रिकॉर्ड

सरकार अपने वित्तीय परिणामों पर विचार करने के बाद तत्काल सुधारात्मक कार्य योजना के तहत चार से पांच बैंकों को धनराशि देगी। तीन बैंक पीसीए के थ्रेसहोल्ड 1 के दायरे में हैं और 4-5 बैंकों को इस साल अतिरिक्त पूंजी दी जाएगी।

Author December 20, 2018 7:01 PM
तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक तौर पर (फाइल फोटो)

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने अप्रैल-सितंबर की अवधि में 60,730 करोड़ रुपये (8.69 अरब डॉलर) बकाया बैड लोन वसूल किए। इस पर वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि यह “रिकॉर्ड” है। फाइनेंशियल सर्विस सेक्रेटरी राजीव कुमार ने कहा कि सरकार अपने वित्तीय परिणामों पर विचार करने के बाद तत्काल सुधारात्मक कार्य योजना के तहत चार से पांच बैंकों को धनराशि देगी। उन्होंने यह भी कहा कि बैंकों ने इस वित्त वर्ष में बाजार से 244.4 अरब रुपये जुटाए हैं। सचिव राजीव कुमार ने कहा, ‘तीन बैंक पीसीए के थ्रेसहोल्ड 1 के दायरे में हैं और 4-5 बैंकों को इस साल अतिरिक्त पूंजी दी जाएगी। 4-5 बैंकों के पीसीए के दायरे से बाहर निकलने की उम्मीद है।’ पीसीए की व्यवस्था के तहत बैंकों से कुछ रिस्की गतिविधियों से परहेज करने, कामकाजी दक्षता बढ़ाने और पूंजी की हिफाजत पर जोर देने के लिए कहा जाता है।

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 20 दिसंबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि सरकार चालू वित्त वर्ष के शेष महीनों में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में 83,000 करोड़ रुपये डालेगी। उन्होंने यह भी कहा कि एनपीए की पहचान लगभग पूरी हो चुकी है, गैर पहचान वाले अब 0.59% हैं जो मार्च 2015 में 0.7% तक थे। पिछली तिमाही में यह दिख चुका है कि इसके प्रदर्शन में सुधार हो रहा है। एनपीए में अब गिरावट शुरू हो जाएगी। रीकैपिटलाइजेशन सार्वजनिक क्षेत्र को बैंकों की लोन देने की क्षमता बढ़ाने में मदद करेगा। वित्त मंत्री ने कहा कि बैंकों में पूंजी डालने से सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की कर्ज देने की क्षमता बढ़ेगी और आरबीआई के तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई (पीसीए) रूपरेखा से बाहर निकलने में मदद मिलेगी।

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि वास्तविक व्यय केवल 15,070 करोड़ रुपये होगा, क्योंकि बाकी को बचत से वित्त पोषित किया जाएगा। अतिरिक्त खर्च फरवरी में 2018-19 वित्त वर्ष के लिए घोषित 24.42 ट्रिलियन रुपये के बजट के टॉप पर है। पिछले वित्त साल में यह व्यय 21.43 ट्रिलियन रुपये था। इससे पहले सरकार ने अनुपूरक अनुदान मांग की दूसरी किस्त के माध्यम से सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में 41,000 करोड़ रुपये की पूंजी डालने के लिये संसद की मंजूरी मांगी। इससे चालू वित्त वर्ष में बैंकों में 65,000 करोड़ रुपये के बजाए कुल 1.06 लाख करोड़ रुपये की पूंजी डाली जाएगी।

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