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Xiaomi और रिलायंस जियो के बीच पिस गईं भारतीय मोबाइल कंपनियां, बाजार के एक-चौथाई हिस्‍से में भी कम में सिमटीं

काउंटरप्‍वॉइंट रिसर्च के मुताबिक, 2018 में माइक्रोमैक्‍स भारत का पांचवां सबसे बड़ा स्‍मार्टफोन ब्रांड रहा, जबकि लावा को यही जगह फीचर फोन सेगमेंट में मिली।

भारतीय ब्रांड्स स्‍मार्टफोन्‍स में Xiaomi और फीचर फोन्‍स में रिलायंस जियो के बीच पिस गए। (AP File Photo)

चीनी मोबाइल निर्माताओं के भारतीय बाजार पर कब्‍जे के चलते यहां की कंपनियों के राजस्‍व में कमी आई है। वित्‍त वर्ष 2017-17 में भारत की तीन शीर्ष मोबाइल निर्माता कंपनियों के राजस्‍व में तगड़ी गिरावट देखने को मिली। ताजा रेगुलेटरी फाइलिंग्‍स के अनुसार, चीनी कंपनियों ने जितना कारोबार किया, भारतीय कंपनियां उसका एक-चौथाई राजस्‍व भी हासिल न कर सकीं। द इकॉनमिक टाइम्‍स ने अपने अध्‍ययन में कहा है कि स्‍मार्टफोन्‍स और फीचर फोन्‍स बनाने वाली भारतीय कंपनियों- Micromax, Lava और Intex का टर्नओवर 2017-18 में 22 फीसदी गिरकर 10,498 करोड़ रुपये पर पहुच गया। इसके मुकाबले, तीन चीनी शीर्ष ब्रांड्स- Xiaomi, Oppo और Vivo ने 46,120 करोड़ रुपये का संयुक्‍त राजस्‍व दिखाया।

स्‍मार्टफोन बाजार में तगड़ी प्रतिस्‍पर्धा से दाम घटाने पड़े जिससे भारतीय कंपनियों के प्रदर्शन पर असर पड़ा। शीर्ष तीन भारतीय कंपनियों को मुनाफे में वित्‍त वर्ष 2016-17 के मुकाबले 2017-18 में 70 फीसदी का नुकसान सहना पड़ा। पिछले साल भारतीय कंपनियों को 187 करोड़ रुपये का ही मुनाफा हुआ। इसकी तुलना में, चीनी कंपनियों में से सिर्फ Xiaomi को 293 करोड़ रुपये का फायदा हुआ। Oppo को 358 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ, जबकि Vivo ने भी करीब 120 करोड़ रुपये का घाटा सहा।

भारतीय मोबाइल निर्माता कंपनियों की परेशानी इस साल भी जारी रहने की संभावना है। मुकेश अंबानी की रिलायंस अपने 4G फीचर फोन जियोफोन के जरिए बाजार में पैठ बना रही है तो चीनी कंपनियां अपने स्‍मार्टफोन्‍स के जरिए बाजार पर पूरी तरह कब्‍जा करने की फिराक में हैं। अखबार ने दक्षिण भारत की बड़ी रिटेल चेन संगीता मोबाइल्‍स के एमडी सुभाष चंद्रा के हवाले से लिखा है कि भारतीय ब्रांड्स स्‍मार्टफोन्‍स में Xiaomi और फीचर फोन्‍स में रिलायंस जियो के बीच पिसकर रह गए।

वित्‍त वर्ष 2017-18 में माइक्रोमैक्‍स का राजस्‍व 22 फीसदी गिरकर 4,345 करोड़ रुपये पर आ गया, जबकि कंपनी के मुनाफे में 72 प्रतिशत की गिरावट देखी गई। इसी दौरान लावा का राजस्व 10 फीसदी घटकर 3,290 करोड़ रुपये पहुंच गया जबकि लाभ में 46 प्रतिशत की कमी आई। इंटेक्‍स के राजस्‍व में 32% की कमी रही और कंपनी को सिर्फ 13 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ।

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