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Indian Railways: ट्रेन के इंजनों में लग रही प्लेन वाली यह डिवाइस, जानें वजह

Indian Railways: अब तक 26 लोकोमोटिव में रेलवे द्वारा एलसीएवीआर / सीवीवीआरएस के साथ लगाए गए हैं। इनमें से 23 डीजल के हैं और बाकी 3 इलेक्ट्रिक इंजन हैं।

इस साल जून में आधुनिक कोच फैक्ट्री रायबरेली से एक स्मार्ट कोच निकाला गया है।

Black-Box facility in Indian Railways: अपने यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए, पीयूष गोयल के नेतृत्व वाला भारतीय रेलवे कई कदम उठा रहा है। लोकसभा में रेल राज्य मंत्री राजन गोहान ने एक सवाल के लिखित जवाब में कहा कि रेलवे  ट्रेन के डीजल और इलेक्ट्रिक इंजनों में लोको कैब ऑडियो वीडियो रिकॉर्डिंग सिस्टम (LCAVR)/क्रू वॉयस/वीडियो रिकॉर्डिंग सिस्टम (CVVRS) लगा रहा है। यह डिवाइस हाल ही में हुए ट्रेन हादसों के बाद इंस्टॉल की जा रही हैं। यह डिवाइस प्लेन में इस्तेमाल होने वाले ब्लैक बॉक्स की तरह हैं।

रेल मंत्रालय के मुताबिक, यह सिस्टम जांचकर्ताओं को अमूल्य डेटा प्रदान करती है। इसके अलावा, यह सिस्टम ट्रेन दुर्घटनाओं की घटनाओं को समझने और परिचालन संबंधी मुद्दों के साथ-साथ मानव कारकों की पहचान करने में मदद करता है। गोहान ने यह भी बताया कि अब तक 26 लोकोमोटिव में रेलवे द्वारा एलसीएवीआर / सीवीवीआरएस के साथ लगाए गए हैं। इनमें से 23 डीजल के हैं और बाकी 3 इलेक्ट्रिक इंजन हैं। उन्होंने यह भी बताया कि 3500 एलसीवीआर / सीवीवीआरएस उपकरणों के लिए 2018-2019 के बजट में सरकार द्वारा 100.40 करोड़ रुपये की मंजूरी दे दी गई।

इस बीच, रेल राज्य मंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि इस साल जून में आधुनिक कोच फैक्ट्री रायबरेली से एक स्मार्ट कोच निकाला गया। इसके अलावा, ऐसे 5 रेक स्मार्ट कोच बनाने की योजना है, जिन्हें आधुनिक कोच फैक्ट्री, रायबरेली में बनाया जाना है। स्मार्ट कोच एलएचबी प्लेटफॉर्म पर बनाया गया है और अत्याधुनिक सेंसर के साथ-साथ एक सेंट्रलाइज्ड कंप्यूटर से लैस है जो सभी सेंसर पर नजर रखता है। मोदी सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत बनाए गए स्मार्ट कोच का उद्देश्य आधुनिक सेंसर-आधारित प्रणाली की मदद से रेलवे यात्रियों को विश्व स्तरीय सुविधाएं प्रदान करना है।

कोच ने जैसे ही पटरियों पर दौड़ना शुरू किया उसी के साथ ही रेलवे को डेटा मिलना शुरू हो गया। ट्रेन जब चलती है तो पता चलता रहता है कि कोच के कौन से हिस्से में ज्यादा वाइब्रेशन हो रहा है। कौन सा व्हील ज्यादा गर्म हो रहा है। स्मार्ट कोच के 8 पहियों में सेंसर लगे हैं। ये सेंसर पहले डेटा को कंप्यूटर पर भेजते हैं इसके बाद डेटा क्लाउड पर चला जाता है। इस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल दुनिया के दूसरे देशों में पहले से किया जा रहा है।

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