सोमवार सुबह बाजार में सबसे बड़ी खबर कच्चे तेल की कीमतों को लेकर आई। क्रूड ऑयल की कीमतों में लगभग 20% की जोरदार बढ़ोतरी हुई और यह 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया। इस बड़ी तेजी के कारण तेल खोजने वाली कंपनियों, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों और इस क्षेत्र से जुड़ी अन्य कंपनियों के शेयर निवेशकों के फोकस में आ गए हैं।
पूरे दिन कारोबार के दौरान ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) के शेयरों में तेज गिरावट दर्ज गई। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण तेल आपूर्ति को बड़ा झटका लगा है जिससे कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर 115 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गईं। खबरें है कि फिलहाल पेट्रोल और डीजल के दाम नहीं बढ़ाए जाएंगे। जिसका साफतौर पर मतलब है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने के बावजूद कंपनियों को कम मुनाफे में काम करना पड़ सकता है।
दुनियाभर के बाजार में नकारात्मक माहौल
यूनाइटेड स्टेट्स, इजरायल और ईरान के बीच जारी टकराव का असर कच्चे तेल की आपूर्ति पर पड़ रहा है। इसके अलावा ईरान ने खाड़ी क्षेत्र के तेल रिफाइनरियों को भी निशाना बनाया है जिससे वैश्विक बाजार में आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है।
हाल ही में एक और घटनाक्रम में ईरान ने तेल अवीव, नेगेव रेगिस्तान और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी एयरबेस को निशाना बनाते हुए मिसाइलें दागीं। इन घटनाओं के कारण वैश्विक बाजार में नकारात्मक माहौल बना हुआ है और निवेशकों की चिंता बढ़ गई है जिसका असर तेल की कीमतों पर साफ दिखाई दे रहा है।
तेल कंपनियों पर फोकस
ऑयल मार्केटिंग कंपनियों पर इस समय खास नजर बनी हुई है। इस सेक्टर में Hindustan Petroleum Corporation Limited, Indian Oil Corporation और Bharat Petroleum Corporation Limited प्रमुख शेयर है जिन पर निवेशकों का फोकस है।
इस सेक्टर पर दबाव इसलिए बढ़ सकता है क्योंकि ये कंपनियां कच्चा तेल खरीदती हैं। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़ती हैं तो इनकी लागत बढ़ जाती है और इससे कंपनियों के मार्जिन पर असर पड़ता है जिससे मुनाफे पर दबाव आता है।
एक रिसर्च नोट में Nomura ने 4 मार्च को कहा था कि अगर ब्रेंट क्रूड की कीमत 85 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जाती है तो ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसकी वजह यह है कि खुदरा स्तर पर पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर बनी रहती हैं जबकि कच्चे तेल की लागत तेजी से बढ़ जाती है।
भारत में तेल कंपनियों के शेयर गिरे
-दोपहर 1.30 बजे के समय भारत पेट्रोलियम लिमिटेड का शेयर करीब 5.56 प्रतिशत गिरकर 333 रुपये पर आ गया।
-वहीं इंडियन ऑइल कॉर्पोरेशन (IOC) का शेयर लगभग 5.36 प्रतिशत टूटकर 159.57 रुपये पर पहुंच गया।
-इसके अलावा हिंदुस्तान पेट्रोलियम के शेयर में भी करीब 6.01 की गिरावट के साथ 380 रुपये के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया।
तेल कंपनियों की रेटिंग में बदलाव
अंतरराष्ट्रीय ब्रोकरेज फर्म UBS ने भी इन कंपनियों को लेकर अपनी रेटिंग में बदलाव किया है। UBS ने BPCL और इंडियन ऑयल को ‘न्यूट्रल’ रेटिंग दी है और इनका टारगेट प्राइस क्रमशः 365 रुपये और 175 रुपये तय किया गया है। वहीं HPCL की रेटिंग घटाकर ‘Sale’ कर दी गई है और इसके लिए 340 रुपये का लक्ष्य रखा गया है।
ब्रोकरेज ने कमजोर मार्केटिंग मार्जिन का हवाला देते हुए वित्त वर्ष 2027 के लिए मुनाफे के अनुमान में भी कटौती की है। इसके तहत Indian Oil के अनुमानित मुनाफे में 19%, Bharat Petroleum में 15% और HPCL में 46% तक की कमी का अनुमान जताया गया है।
तेल की कीमतों पर ट्रंप का बयान
कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज बढ़ोतरी पर प्रतिक्रिया देते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर एक पोस्ट किया।
उन्होंने लिखा, “तेल की कीमतों में अल्पकालिक बढ़ोतरी ईरान के परमाणु खतरे के खत्म होने के बाद तेजी से गिर जाएगी। अमेरिका और दुनिया की सुरक्षा व शांति के लिए चुकाई जाने वाली बहुत छोटी कीमत है। सिर्फ मूर्ख ही इससे अलग सोच सकते हैं।”
क्रूड ऑयल की कीमतों में तेज उछाल और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के शेयरों में गिरावट के बीच निवेशकों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि अब आगे क्या किया जाए। विशेषज्ञों के मुताबिक ऐसी स्थिति में घबराकर फैसले लेने से बचना चाहिए और बाजार के रुझान को समझकर रणनीति बनानी चाहिए।
क्रूड ऑयल की कीमतों में तेज उछाल और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के शेयरों में गिरावट के बीच निवेशकों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि अब आगे क्या किया जाए। विशेषज्ञों के मुताबिक ऐसी स्थिति में घबराकर फैसले लेने से बचना चाहिए और बाजार के रुझान को समझकर रणनीति बनानी चाहिए।
1.घबराकर बेचने से बचें
अगर आपके पास पहले से Indian Oil Corporation, Bharat Petroleum Corporation Limited या Hindustan Petroleum Corporation Limited के शेयर हैं तो तुरंत घबराकर बेचने से बचना बेहतर माना जाता है। अक्सर जियो-पॉलिटिकल तनाव के कारण बाजार में शॉर्ट-टर्म गिरावट आती है।
2.क्रूड ऑयल की कीमतों पर नजर रखें
OMC कंपनियों का मुनाफा काफी हद तक कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर करता है। अगर क्रूड लंबे समय तक 100–110 डॉलर के ऊपर रहता है तो इन कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बना रह सकता है।
3.लंबी अवधि के निवेशक धैर्य रखें
लंबी अवधि के निवेशकों के लिए ऐसी गिरावट कभी-कभी अच्छे एंट्री लेवल भी दे सकती है। लेकिन इसमें चरणबद्ध तरीके से निवेश करना ज्यादा सुरक्षित माना जाता है।
4.सरकारी नीतियों का असर भी अहम
पेट्रोल-डीजल की कीमतें अगर लंबे समय तक नहीं बढ़ाई जाती हैं तो कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ सकता है। इसलिए सरकार के फैसलों और वैश्विक हालात पर नजर रखना जरूरी है।
