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जीएसटी विधेयक के पारित होने को उद्योग जगत ने बताया ‘एेतिहासिक कदम’

उद्योग मंडल सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने जीएसटी को देश में कर क्षेत्र में एक बड़ा सुधार बताया

Author नई दिल्ली | Updated: August 4, 2016 7:06 PM
उद्योग मंडल एसोचैम।

राज्यसभा में जीएसटी विधेयक के पारित होने पर प्रसन्नता जताते हुए उद्योग जगत ने इसे एतिहासिक कदम बताया और कहा कि यह बहु-प्रतीक्षित अप्रत्यक्ष कर सुधार अर्थव्यवस्था की वृद्धि में उल्लेखनीय योगदान देगा तथा वस्तु एवं सेवाओं की लागत में कमी लाएगा। उद्योग मंडल सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने जीएसटी को देश में कर क्षेत्र में एक बड़ा सुधार बताया और कहा, ‘जीएसटी से वस्तुओं एवं सेवाओं पर विभिन्न बहु-स्तरीय अप्रत्यक्ष कर के दुष्प्रभाव कम होने की उम्मीद है। यह देश के अधिकतर केंद्रीय और राज्य स्तरीय शुल्कों एवं करों को समाहित करेगा। इससे पूरा देश एक साझा बाजार बनेगा।’ उन्होंने कहा, ‘जीएसटी आने वाले वर्षों में बहुप्रतीक्षित पारदर्शिता और उच्च निवेश लाएगा और हम उच्च कर राजस्व एवं निवेश से देश के जीडीपी में कुछ प्रतिशत अंक की वृद्धि की उम्मीद करते हैं।’

राज्यसभा ने बुधवार (3 अगस्त) को देर शाम बहुप्रतीक्षित जीएसटी विधेयक को मंजूरी दे दी गई। सरकार संविधान संशोधन विधेयक पारित कराने को लेकर विपक्षी दलों के साथ आमसहमति बनाने में कामयाब रही। एसोचैम के अध्यक्ष सुनील कनोड़िया ने जीएसटी पारित होने को भारत के आर्थिक सुधारों में 1991 के सुधारों के बाद मील का पत्थर बताया। हालांकि उन्होंने कहा कि अब एक बड़ी चुनौती इसे लोगों के अनुकूल बनाना है। फिक्की के अध्यक्ष हर्षवर्द्धन नेवतिया ने कहा, ‘इस महत्वपूर्ण विधेयक को पारित कराने में विपक्षी दलों का सहयोग लोकतंत्र की आधारशिला है और यह उद्योग को देश में सुधारों की प्रगति को लेकर काफी उम्मीदें बढ़ता है।’

सीबीआरई के चेयरमैन अंशुमन मैगजीन (भारत और दक्षिण पूर्व एशिया) ने कहा कि यह हमारी अर्थव्यवस्था के लिये एक बड़ा कर सुधार है जो भारत को एकल बाजार में तब्दील करेगा।नासकॉम के अध्यक्ष आर चंद्रशेखर ने कहा कि जीएसटी व्यवस्था से कर व्यवस्था मजबूत होगी और इसे अधिक पारदर्शी बनाएगी। लेकिन बहु कराधान केंद्र सृजित करेगी जो आईटी उद्योग के लिए एक चुनौती है। अखिल भारतीय व्यापारी परिसंघ (कैट) के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीसी भरतिया और महासचिव प्रवीण खंडलेवाल ने कहा कि जीएसटी से व्यापारियों को तमाम तरह के करों के चंगुल से छुटकारा मिलेगा।

हिंदुजा ग्रुप ऑफ कंपनीज इंडिया के चेयरमैन अशोक पी हिंदुजा ने कहा कि जीएसटी 1991 से सबस महत्वपूर्ण सुधार है। इससे भारत विदेशी निवेश के लिए आकर्षक गंतव्य बन सकेगा। राष्ट्रीय बाजार बनने से विनिर्माण अधिक प्रतिस्पर्धी हो सकेगा। हालांकि, हिंदुजा ने मौजूदा रियायतें जारी रखने के बारे में स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। विशेषरूप से केंद्र और राज्य के स्तर पर निवेश से संबंधित रियायतों पर। सीआईआई के अध्यक्ष नौशाद फोर्ब्स ने कहा कि जीएसटी दशकों में सबसे महत्वपूर्ण कर सुधार है। इसके क्रियान्वयन के बाद इससे वस्तुओं और सेवाओं का मेल वाला राष्ट्रीय बाजार बनेगा, जिससे देश की वृद्धि को प्रोत्साहन मिलेगा। सीआईआई ने कहा कि यदि इसे 1 अप्रैल, 2017 से क्रियान्वित किया जाता है, तो इससे लेनदेन की लागत घटेगी और जीडीपी की वृद्धि दर डेढ़ से दो प्रतिशत बढ़ेगी।

अमेरिका भारत व्यापार परिषद (यूएसआईबीसी) ने इस अप्रत्यक्ष कर सुधार को पासा पलटने वाला करार दिया। परिषद ने कहा कि इससे घरेलू आपूर्ति श्रृंखला से तालमेल बैठाकर आर्थिक वृद्धि को प्रोत्साहन दिया जा सकेगा और अनुपालन का बोझ कम होगा। परिषद के अध्यक्ष मुकेश अघी ने कहा कि इन कारकों से भारत की निवेश गंतव्य के रूप में वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि जीएसटी से उपभोक्ताओं के लिए वस्तुएं सस्ती होंगी, अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय निर्यात की प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और जीडीपी की वृद्धि दर दो प्रतिशत बढ़ेगी।

पीएचडी चैंबर आफ कामर्स के अध्यक्ष महेश गुप्ता ने कहा कि जीएसटी से अगले कुछ वर्षों 2019-20 तक भारत की वृद्धि दर 10 प्रतिशत पर पहुंच जाएगी। यस बैंक के प्रबंध निदेशक व सीईओ राणा कपूर ने कहा कि जीएसटी के क्रियान्वयन से भारत के कर ढांचे में एक समानता आएगी और विनिर्माण दक्षता बढ़ेगी और कारोबार करने की स्थिति सुगम होगी। इंजीनियरिंग निर्यातकों के संगठन ईईपीसी इंडिया के चेयरमैन टी एस भसीन ने कहा कि इससे देश के विनिर्माण को प्रोत्साहन मिलेगा, लेकिन यदि आदर्श जीएसटी कानून के कुछ प्रावधानों से निर्यातकों को कुछ दिक्कतें आ सकती हैं।

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