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संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट: भारत में बुनियादी ढांचे की कमी, गिरेगी विकास दर

वैश्विक आर्थिक वृद्धि दर के बारे में इसमें कहा गया है कि अमेरिका और चीन के बीच व्यापार विवाद, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नीतिगत अनिश्चितता तथा कंपनियों के कमजोर आत्मविश्वास विश्व की आर्थिक वृद्धि के लिये चुनौती है।

Author नई दिल्ली | Published on: May 21, 2019 9:54 PM
तस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (फोटोः Freepik)

भारत में मजबूत घरेलू खपत और निवेश से आर्थिक वृद्धि दर 2019 में 7.0 प्रतिशत तथा 2020 में 7.1 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया है। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में यह अनुमान जताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2018 में आर्थिक वृद्धि दर 7.2 प्रतिशत रही। हालांकि, 2019 मध्य की संयुक्त राष्ट्र विश्व आर्थिक स्थिति तथा संभावना (डब्ल्यूईएसपी) रिपोर्ट में जताया गया अनुमान इस साल जनवरी में जारी अनुमान से कम है। उस समय 2019 और 2020 में आर्थिक वृद्धि दर क्रमश: 7.6 तथा 7.4 प्रतिशत रहने की संभावना जतायी गयी थी।

बता दें कि रिजर्व बैंक ने भी मानसून पर अल नीनो के प्रभाव तथा वैश्विक चुनौतियों के कारण चालू वित्त वर्ष में आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान को कम कर 7.2 प्रतिशत कर दिया जबकि पहले इसके 7.4 प्रतिशत रहने की संभावना जतायी गयी थी।

रिपोर्ट में भारत समेत दक्षिण एशिया की आर्थिक वृद्धि में बुनियादी ढांचा बाधाओं को चुनौती बताया गया है। वहीं, चीन की आर्थिक वृद्धि दर 2018 के मुकाबले घटने का अनुमान जताया गया है। जहां 2018 में यह 6.6 प्रतिशत थी वहीं 2019 में इसके 6.3 प्रतिशत तथा 2020 में 6.2 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया है।

वैश्विक आर्थिक वृद्धि दर के बारे में इसमें कहा गया है कि अमेरिका और चीन के बीच व्यापार विवाद, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नीतिगत अनिश्चितता तथा कंपनियों के कमजोर आत्मविश्वास विश्व की आर्थिक वृद्धि के लिये चुनौती है। इसको देखते हुए वैश्विक आर्थिक वृद्धि के अनुमानों को जनवरी की तुलना में घटा दिया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2018 में वैश्विक सकल उत्पाद वृद्धि दर 3.0 प्रतिशत रही। वहीं 2019 में इसके 2.7 प्रतिशत और 2020 में 2.9 प्रतिशत रहने का अनुमान है। विश्व अर्थव्यवस्था की वृद्धि में नरमी के पीछे कई कारकों को चिन्हित किया गया है जिसमें अमेरिका तथा चीन के बीच व्यापार तनाव फिर से बढ़ना, वित्तीय स्थिति में अचानक गिरावट तथा जलवायु परिवर्तन का बढ़ता प्रभाव शामिल हैं।

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