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मजबूती की राह पर भारतीय अर्थव्यवस्था- आइएमएफ

भारत में हालिया दो प्रमुख सुधारों - नोटबंदी और माल व सेवा कर (जीएसटी) को ऐतिहासिक सुधार बताते हुए लेगार्ड ने कहा कि इसमें हैरानी नहीं होनी चाहिए कि लघु अवधि के लिए इससे अर्थव्यवस्था में कुछ सुस्ती आएगी।

Author October 16, 2017 2:16 AM
आईएमएफ प्रमुख क्रिस्टीन लेगार्ड। (AP File Photo)

अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आइएमएफ) की प्रमुख क्रिस्टीन लेगार्ड ने कहा है कि मध्यम अवधि में भारतीय अर्थव्यवस्था काफी मजबूती की राह पर है। कुछ दिन पहले अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आइएमएफ) ने चालू वर्ष और अगले साल के लिए भारत की वृद्धि दर के अनुमान को घटाया है।  भारत में हालिया दो प्रमुख सुधारों – नोटबंदी और माल व सेवा कर (जीएसटी) को ऐतिहासिक सुधार बताते हुए लेगार्ड ने कहा कि इसमें हैरानी नहीं होनी चाहिए कि लघु अवधि के लिए इससे अर्थव्यवस्था में कुछ सुस्ती आएगी।

आइएमएफ ने पिछले सप्ताह 2017 के लिए भारत की पर वृद्धि दर के अनुमान को घटाकर 6.7 फीसद कर दिया। यह उसके अप्रैल और जुलाई के पिछले अनुमान से आधा फीसद कम है। इसके लिए आइएमएफ ने नोटबंदी और जीएसटी को प्रमुख वजह बताया है। आइएमएफ की प्रबंध निदेशक लेगार्ड ने कहा, ‘जहां तक भारत का सवाल है, हमने वृद्धि दर के अनुमान को कुछ कम किया है। पर हमारा मानना है कि मध्यम से दीर्घावधि में भारत वृद्धि की राह पर है। इसकी वजह पिछले कुछ साल के दौरान भारत में किए गए संरचनात्मक सुधार हैं।’ लेगार्ड ने कहा, ‘मध्यम अवधि में हम भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए काफी मजबूत स्थिति देखते हैं।’

 

नोटबंदी-जीएसटी से फायदा होगा: जेटली

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि उन्होंने अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए कभी भी प्रोत्साहन पैकेज की बात नहीं की। जेटली ने कहा कि भारत ने सही समय पर संरचनात्मक सुधार किए हैं जिससे आने वाले समय में देश को फायदा होगा।  उन्होंने कहा कि नोटबंदी और जीएसटी सहित कुछ अहम सुधार देश की अर्थव्यवस्था के दीर्घकालिक फायदों के मद्देनजर किर गए हैं, जिनसे भारत की विकास दर ऊंचाई की ओर जा रही है। अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष और विश्वबैंक की सालाना बैठक में भाग लेने एक सप्ताह की यात्रा पर यहां आए वित्त मंत्री ने यह पूछे जाने पर कि क्या सरकार बड़े पैमाने पर वित्तीय प्रोत्साहन पैकेज पर विचार कर रही है, कहा कि इस बारे में बातें मीडिया ने की है और यह आपको उनसे ही पूछना चाहिए। लगातार बाकी पेज 8 पर छह आर्थिक तिमाहियों में आर्थिक वृद्धि में गिरावट को देखते हुए राजकोषीय प्रोत्साहन की अटकलें लगाई जा रही हैं, जो 40,000 करोड़ रुपए से अधिक हो सकता है। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में आर्थिक वृद्धि दर 5.7 फीसद रही जो तीन साल में न्यूनतम है। जेटली ने कहा कि उनकी सरकार को विरासत में बड़ा राजकोषीय घाटा मिला। केवल साढ़े तीन साल पहले यह 4.6 फीसद था और भारत धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है जो आगे भी जारी रहेगा।

जेटली ने कहा कि एच-1बी वीजा गैर-आव्रजक वीजा है जो अमेरिकी कंपनियों को विदेशी कर्मचारियों को नियुक्ति की अनुमति देता है। भारतीय आइटी पेशेवरों में इसकी अच्छी मांग है। उन्होंने कहा, ‘भारत से एच-1बी वीजा पर जो आ रहे हैं, वे उच्च दर्जे के पेशेवर हैं। जेटली ने कहा कि उन्होंने अमेरिकी वित्त मंत्री स्टीवन न्यूचिन और वाणिज्य मंत्र विलबर रोस के साथ बैठकों में इस मुद्दे को उठाया।जेटली ने एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान भारतीय पत्रकारों के एक समूह से कहा, ‘ऐसे समय में जब विश्व की विकास दर ढाई फीसद के आसपास है, भारत सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्था है। यह सुधारों के लिए सही समय है। आपको चीजों को पटरी पर लाने के लिए मंदी का इंतजार नहीं करना पड़ा।’ जेटली ने कहा, ‘मेरे ख्याल से संरचनात्मक सुधार के लिए यह सही समय है।’

अपनी एक सप्ताह की अमेरिका यात्रा समाप्त करते हुए जेटली ने कहा, ‘अमेरिका और उसके निवेशकों के बीच भारत को लेकर बहुत दिलचस्पी है।’ अपनी यात्रा के दौरान जेटली ने अमेरिका के वित्त मंत्री और वाणिज्य मंत्री के साथ बैठकें की, कोलंबिया और हार्वर्ड विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों को संबोधित किया और न्यूयॉर्क, बॉस्टन और वाशिंगटन डीसी में निवेशकों तथा अमेरिकी कॉरपोरेट क्षेत्र के दिग्गजों के साथ बातचीत की। उन्होंने कहा, ‘सरकार के भीतर मौजूद लोगों और अमेरिकी कंपनियों ने भारत में अब निवेश करने में बहुत दिलचस्पी दिखायी है।’ अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक की वार्षिक बैठकों में भारत के उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे जेटली ने कहा कि अमेरिकी कंपनियां भारत में बड़े पैमाने पर निवेश कर रही हैं। उन्होंने कहा, ‘कुछ भारतीय हैं जो अमेरिका में निवेश कर रहे हैं, अमेरिकी कंपनियां भारत में निवेश कर रही हैं। नवंबर में बड़ी संख्या में अमेरिकी कॉरपोरेट कंपनियां भारत में निवेश के लिए आ रही हैं।’ जेटली ने कहा कि प्रत्यक्ष विदेशी निवेश पर भारत और अमेरिका के बीच संबंध बहुत ‘परिपक्व हैं। उन्होंने कहा कि भारत सबसे ज्यादा प्रत्यक्ष विदेश निवेश पाने वाले देशों में शामिल है क्योंकि निवेश के संबंध में इसकी नीतियां बहुत सरल हैं।

 

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