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वादों के रनवे पर दौड़ता रहा भारतीय विमानन उद्योग, हवा में रही नई विमानन नीति

घरेलू विमानन उद्योग ने 2015 के दौरान काफी उतार-चढ़ाव देखे। तीन विमानन कंपनियों ने परिचालन शुरू किया, एक बंद होने की कगार से वापस लौटी, सस्ती विमानन कंपनी सूचीबद्ध हुई..

Author नई दिल्ली | Published on: December 23, 2015 10:50 PM
सरकारी विमानन सेवा एअर इंडिया

घरेलू विमानन उद्योग ने 2015 के दौरान काफी उतार-चढ़ाव देखे। तीन विमानन कंपनियों ने परिचालन शुरू किया, एक बंद होने की कगार से वापस लौटी, सस्ती विमानन कंपनी सूचीबद्ध हुई और भारत ने सुरक्षा रैंकिंग में फिर से शीर्ष स्थान प्राप्त कर लिया, जबकि विमानन नीति का मसौदा अधर में लटका रहा। कुल मिलाकर विमानन कंपनियों को अगले साल से अधिक खर्च करना होगा, क्योंकि सरकार ने सभी टिकटों पर दो फीसद शुल्क लगाने का प्रस्ताव किया है ताकि क्षेत्रीय संपर्क योजनाओं के लिए पैसा जुटाया जा सके। हालांकि नीति के मसौदे में क्षेत्र के लिए विभिन्न किस्म की रियायतों का वादा किया गया है।

इधर, नागर विमानन मंत्रालय के सचिव बदले गए, जबकि दोनों मंत्री- अशोक गजपति राजू और महेश शर्मा ने अपने आपको विभिन्न नीतिगत मुद्दों पर अपने को अलग-अलग छोर पर पाया जिनमें हवाई किराए का नियमन का मुद्दा भी शामिल है। इसके अलावा एम सत्यवती नियामक संस्था डीजीसीए की पहली महिला प्रमुख बनीं। इस साल के अंत में हुई एक दर्दनाक दुर्घटना में एक सेवारत इंजीनियर मुंबई हवाई अड्डे पर एअर इंडिया के विमान इंजन ने अपनी ओर खींच लिया, जिससे हवाई अड्डे पर सुरक्षा एवं संरक्षा का मामला एक बार फिर गंभीरता के साथ उठा है।

चेन्नई हवाई अड्डा दिसंबर की शुरुआत में भारी बाढ़ की वजह से पांच दिन के लिए अप्रत्याशित तौर पर बंद रहा। नियामकीय मोर्चे पर प्रतिस्पर्धा आयोग ने जेट एअरवेज, इंडिगो और स्पाइसजेट पर हवाई माल ढुलाई मामले में कथित तौर पर साठगांठ करते हुए ईंधन अधिभार लगाने पर 258 करोड़ रुपए का कुल जुर्माना लगाया। इस आदेश को उन्होंने चुनौती दी।

इस साल के लिए निराशाजनक बात यह रही कि सरकार फिर से तैयार विमानन नीति का अंतिम स्वरूप देने में नाकाम रही। इसी नीति में भारतीय विमानन कंपनियों द्वारा अंतरराष्ट्रीय परिचालन के लिए मौजूदा मानदंडों की स्थिति के बारे में फैसला किया जाएगा। ऐसा कनिष्ठ मंत्री शर्मा द्वारा नीति के कार्यान्वयन की संभावित समयसीमा रखने के बावजूद हुआ।

वर्ष के दौरान सार्वजनिक क्षेत्र की विमानन कंपनी एयर इंडिया में शीर्ष स्तर पर बदलाव हुआ। इस पद पर एक गैर-आईएएस अधिकारी अश्विनी लोहानी की नियुक्ति हुई। भारतीय रेल सेवा के अधिकारी, लोहानी ने नुकसान दर्ज करने वाली विमानन कंपनी में आश्चर्यजनक तौर पर कायाकल्प किया। एअर इंडिया ने हाल में दिल्ली से सैन फ्रांसिस्को के लिए सीधी उड़ान शुरू की है।

वर्ष के दौरान उपभोक्ताओं के लिहाज से ऊंचे हवाई किराए और कथित तौर पर आक्रामक मूल्य निर्धारण का मुद्दा भी उठा। कुछ सांसदों ने इसके नियमन की मांग की। हालांकि, बाद में राज्य मंत्री शर्मा ने हाल में संसद को सूचित किया कि सरकार के पास विमानन किराए के नियमन का कोई प्रस्ताव नहीं है।
सरकार ने विमानन नीति के मसौदे में क्षेत्रीय संपर्क योजना के वित्तपोषण के लिए दो प्रतिशत शुल्क लगाने का प्रस्ताव किया है। आने वाले साल में यात्रियों की जेब पर इसका असर होगा। मसौदे में विभिन्न कर रियायतों और भारतीय विमानन कंपनियों में 50 प्रतिशत से अधिक एफडीआइ का सुझाव है।

विमानन क्षेत्र के नियामक नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) को वर्ष के दौरान ही पहली महिला प्रमुख मिली, जबकि पांच जनवरी को तमिलनाडु केडर की आइएएस अधिकारी एम सत्यवती ने पद ग्रहण किया। उनके नेतृत्व में भारतीय विमानन कंपनी ने अमेरिकी विमानन नियामक फेडरल ऐवियेशन एडमिनिस्ट्रेशन से शीर्ष सुरक्षा रेटिंग प्राप्त की है। अमेरिकी फेडरेल एवियेशन एडमिनिस्ट्रेशन ने जनवरी 2014 में रेटिंग घटाकर श्रेणी-दो में डाल दी थी।

नागर विमानन मंत्रालय के स्तर पर आर एन चौबे जून में नागर विमानन सचिव बने। उन्होंने वी सोमसुंदरम का स्थान लिया। नागर विमानन क्षेत्र में नीतियों में उतार चढ़ाव का दौर भी वर्ष के दौरान बना रहा। मंत्रालय ने आश्चर्य में डालने वाले कदम के तहत कोलकाता, चेन्नई, जयपुर और अमदाबाद चार हवाई अड्डों का निजीकरण के प्रस्ताव को बोलियां आमंत्रित करने के बावजूद निरस्त कर दिया। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआइ) और पवन हंस लिमिटेड में हिस्सेदारी बेचने का फैसला भी फिलहाल टाल दिया गया।

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