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नौ फ़ीसदी ग्रोथ पर भी संकट में ही रहेगा भारत, जापान का उदाहरण दे Forbes ने किया आंकलन

नई दिल्लीः आज जापान पर जीडीपी के मुकाबले 256 फीसदी का कर्ज है। Koizumi के समय से ये 146 फीसदी ज्यादा है।

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तस्वीर का इस्तेमाल प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (एक्सप्रेस प्रतीकातम्क फोटो)

रेटिंग एजेंसी मूडीज इन्वेस्टर सर्विस ने 2022 के लिए भारत की ग्रोथ रेट का 9.1 फीसदी आंका है। लेकिन एक रिपोर्ट के अनुसार नौ फीसदी ग्रोथ पर भी भारत संकट में ही रहेगा। रिपोर्ट में जापान का उदाहरण देकर आंकलन किया गया है कि जैसे 20 साल पहले वहां आर्थिक मोर्चे पर आई दुश्वारियों को संभालने के तमाम प्रयास नाकाम रहे वैसा ही कुछ भारत में भी होने के आसार हैं। आज भी जापान गहरे कर्ज में डूबा है।

Forbes की रिपोर्ट के मुताबिक अर्थव्यवस्था को कर्ज के भंवर से निकालने के लिए भारत के पीएम नरेंद्र मोदी कुछ उसी तर्ज पर काम कर रहे हैं जैसे 20 साल पहले जापान के पीएम Junichiro Koizumi ने किया था। वो जब जापान के पीएम बने तब जीडीपी के मुकाबले जापान का कर्ज 104 फीसदी था। तत्कालीन जापानी पीएम ने पब्लिक वर्क्स पर होने वाले खर्च में कटौती का मसौदा तैयार किया था। लेकिन उसके बाद भी उन्हें जापान की अर्थव्यवस्था को बर्बाद करने वाला शख्स माना जाता है। उन्होंने जापान पोस्ट का निजीकरण किया। इसे विश्व का सबसे बड़ा सेविंग बैंक माना जाता है।

रोजगार पैदा करने की कोशिश ने जापान को कर्ज में डुबो दिया। 90 के दशक के बाद में ये चीज ज्यादा देखी गई। हालांकि Koizumi की टीम ने bad loans से बैंकों को उबारने के मोर्चे पर कामयाबी हासिल की। 2006 के बाद से सारे जापानी पीएम उनके नक्शे कदम पर चले जिसके चलते आज जापान पर जीडीपी के मुकाबले 256 फीसदी का कर्ज है। Koizumi के समय से ये 146 फीसदी ज्यादा है।

भारत के संदर्भ में बात करें तो मोदी और उनकी टीम इस बात को लेकर अपनी पीठ थपथपा रही है कि ग्रोथ रेट 9.1 फीसदी रहने का अनुमान है। रेटिंग एजेंसी मूडीज इन्वेस्टर सर्विस ने 2022 के लिए भारत का ग्रोथ रेट अनुमान पहले 9.5% फीसदी दिया था। लेकिन अब इसे 9.1 फीसदी कर दिया है। मूडीज का कहना है कि ईधन महंगा होने और उर्वरक आयात बिल बढ़ने से सरकार का पूंजीगत व्यय सीमित रहने के आसार हैं।

2023 के लिए जीडीपी ग्रोथ अनुमान 5.4 फीसदी पर बरकरार रखा गया है। रूस- यूक्रेन वॉर से ये झटका लगने के आसार हैं। मूडीज ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि कोरोना महामारी और दूसरे लहर के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था तेजी के साथ रिकवर कर रही है। पिछले महीने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बड़े प्रोजेक्टों पर खर्च करने की बात कही है। लेकिन इसके साथ ही 1 अप्रैल से शुरू हो रहे वित्तीय वर्ष में बजट घाटा 6.4 फीसदी रहने का अनुमान है। देखने में तो ये अच्छा लगता है क्योंकि पिछले वित्त वर्ष में ये घाटा 9.3 था। सरकार टैक्स के आंकड़े से कर्ज को कम करने के लिए काम करेगी।

हालांकि भारत के लिए अच्छी खबर bad loans के मामले में है। सरकार इनसे उबरने की कोशिश कर रही है। लेकिन इससे इन्कार नहीं किया जा सकता कि 2022 को लेकर सरकार की उम्मीद कहीं धाराशाई न हो जाए। रूस से सस्ता तेल खरीदना एक लम्हे के लिए अच्छा लग सकता है पर लंबे समय में ये नुकसानदेह साबित होने वाला है। मोदी सरकार के लिए जापान की पिछली दस सरकारें नजीर बन सकती हैं। सरकार ने बोल्ड स्टैप नहीं लिए तो 9 फीसदी की ग्रोथ भारी भरकम कर्ज के तले दबने का कारण बन सकती है।

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