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भारत देगा संयुक्त राष्ट्र आपात प्रतिक्रिया कोष में 500,000 डालर का योगदान

भारत ने आज कहा कि संयुक्त राष्ट्र आपात प्रतिक्रिया कोष में 2016-17 के लिये वह 500,000 डालर का योगदान देगा।

Author संयुक्त राष्ट्र | December 14, 2016 1:21 PM
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने हाल ही में 2018 से 2028 की अवधि को अंतरराष्ट्रीय जल दशक घोषित किया है। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

भारत ने आज कहा कि संयुक्त राष्ट्र आपात प्रतिक्रिया कोष में 2016-17 के लिये वह 500,000 डालर का योगदान देगा। उसने इस बात पर जोर दिया कि दुनिया भर में मानवीय संकट से जो चुनौतियां सामने आ रही हैं, उससे निपटने में अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया पर्याप्त नहीं रही है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन में दूत अंजनी कुमार ने उच्च स्तरीय संकल्प सम्मेलन में कहा कि भारत सरकार यूएन सेंट्रल एमर्जेन्सी रिस्पांस फंड (सीईआरएफ) में 2016-17 के लिये 500,000 डालर का योगदान देगा। भारत ने अब कोष में कुल मिलाकर 60 लाख डालर का योगदान किया है। उन्होंने कहा, ‘‘संसाधन बाधाओं के बावजूद भारत हमेशा अपनी क्षमता के अनुरूप जरूरत के अनुसार और मित्रों तथा सहयोगियों के अनुरोध पर मानवीय सहायता की पेशकश करता रहा है।’ कुमार ने कहा कि दुनिया भर में मानवीय संकट बढ़ता जा रहा है और इन संकट से उत्पन्न चुनौतियों से निपटने के लिये सहायता की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि तत्काल मानवीय सहायता की जरूरत वाले लोगों की संख्या पिछले 10 साल में चार गुना हो गयी है और दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया चुनौतियों के मुकाबले काफी कम है। कुमार ने कहा कि इन जरूरतों को पूरा करने के लिये इस पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है। सहायता उपलब्ध कराने में देरी का दीर्घकालीन प्रभाव पड़ सकता है। साथ ही इन चुनौतियों से निपटने के लिये समन्वयन और भागीदारी की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि भारत ने अफगानिस्तान, मालदीव, नेपाल, सोमालिया, श्रीलंका और यमन में सुनामी, भूकंप और चक्रवात जैसे प्राकृतिक आपदाओं की स्थिति राहत कार्यों में सहायता उपलब्ध कराया है। सीईआरएफ 45 करोड़ डालर के सालाना लक्ष्य में मुख्य रूप से सरकारों से योगदान प्राप्त करता है। हालांकि कुछ फाउंडेशन, कंपनियां, परामार्थ संस्थान तथा व्यक्ति द्वारा भी योगदान किया जाता है।

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