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भारत में जमा है 24 हजार टन सोना, 2015 में ही खरीदे गए 663 टन सोने के गहने

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल का दावा है कि 2020 तक भारत लगभग 850 से 950 टन सोना खरीदेगा।

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतिकात्मक तौर पर। (फाइल फोटो)

8 नवंबर 2016 को नोटबंदी की घोषणा होते ही सोने की ब्रिकी में जबर्जदस्त उछाल आया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक कई जगहों पर तो सोना 50 हजार रुपये प्रति तोला की दर से भी बिका। वहीं नोटबंदी से हुई कैश की कमी ने सोना की ब्रिकी पर बाद में प्रभाव डाला लेकिन अब वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल ने चौकाने वाला घुलासा किया है। काउंसिल का दावा है कि 2020 तक भारत लगभग 850 से 950 टन सोना खरीदेगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत में लगभग 800 बिलियन डॉलर की कीमत का प्राइवेट गोल्ड स्टॉक है। वहीं देश में 23 से 24 हजार टन सोना होने का अनुमान है जिसका ज्यादातर हिस्सा घरेलू लोगों के पास है। वहीं साल 2000 से 2015 के बीच लगभग 10, 345 टन सोना भारत ने आयात किया था और सिर्फ 2015 में ही 663 टन जूलरी की खरीदारी भारत में हुई थी। यह आंकड़ा सोने की खरीद में भारत को यूएस, यूरोप जैसे देशों से भी आगे बनाता है।

वहीं काउंसिल ने अपनी रिपोर्ट में भारत में सोने की खरीद बढ़ने की बात कही है। भारत में गोल्ड के बदले लोन का भी अच्छा बाजार बना हुआ है। रिपोर्ट्स के मुताबिक देश की गोल्ड लोन मार्केट में 1250 टन सोना लगा हुआ, लेकिन इसका ज्यादातर हिस्सा इनफॉर्मल सेक्टर में है। इसके अलावा भारत में लगभग 60 से 65 फीसद जूलरी हैंडमेड मैनुफैक्चरिंग सेक्टर में है। वहीं गोल्ड रिसाइकलिंग की बात करें तो देश में 1990 से ही 15 फीसद जूलरी रिसाइकिलिंग में इस्तेमाल होती है जिसके बाद कुछ गोल्ड मैनुफैक्चरर्स नकली सोने की तरह भी इस्तेमाल कर लेते हैं।

एक और गौर करने वाली बात यह भी है कि भारत में साल 2015 में सिर्फ दो टन सोना ही मिनिरल रिसोर्सिस के जरिए पाया गया था। देश के कुल मिनिरल रिजर्वस 71.9 टन और रिसोर्सिस 574.3 टन के हैं। साथ ही गोल्ड मार्केट के ऑर्गेनाइजड रीटेल सेक्टर की बात करें तो 2020 तक इसका शेयर बढ़ने का भी अनुमान है। 2020 तक ऑर्गेनाइजड सेक्टर के जरिए सोने की मांग 35 से 40 फीसद तक बढ़ सकती है।

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