ताज़ा खबर
 

नेपाल की कुल र्इंधन जरूरत की एक तिहाई को पूरा कर रहा भारत

नेपाल का चीन के साथ र्इंधन आपूर्ति समझौता होने से विचलित हुये बिना भारत ने बुधवार को कहा है कि वह हिमालयी देश को उसकी पेट्रोलियम उत्पादों की कुल दैनिक मांग..

Author नई दिल्ली | November 4, 2015 10:41 PM
(एपी फाइल फोटो)

नेपाल का चीन के साथ र्इंधन आपूर्ति समझौता होने से विचलित हुये बिना भारत ने बुधवार को कहा है कि वह हिमालयी देश को उसकी पेट्रोलियम उत्पादों की कुल दैनिक मांग की एक तिहाई हिस्से की आपूर्ति कर रहा है। यह आपूर्ति नेपाल-बिहार सीमा पर स्थित मुख्य पारगमन बिंदु से हटकर वैकिल्पक मार्ग की जा रही है। मुख्य पारगमन मार्ग नेपाल में प्रदर्शनकारियों की नाकेबंदी की वजह से अवरुद्ध है।

इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आइओसी)के चेयरमैन बी अशोक ने यहां कहा कि आईओसी नेपाल की 6,612 किलोलीटर पेट्रोल, डीजल, केरोसीन, एटीएफ और एलपीजी की दैनिक जरूरत में से 32 से 35 फीसद की आपूर्ति कर रही है। यह आपूर्ति उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल से वैकिल्पक प्रवेश बिंदु से की जा रही है। उन्होंने कहा, ‘‘हम लगातार नेपाल को र्इंधन की आपूर्ति कर रहे हैं। निश्चित रूप से कुछ कठिनाइयां हैं और यह हमारे कारण नहीं बल्कि उनके यहां राजनीतिक विरोध के कारण है। इससे रक्सौल-बीरगंज सीमा जाम हो गया। र्इंधन उत्तर प्रदेश में गोरखपुर के समीप बैतालपुर, गोंडा और बंथारा के रास्ते नेपाल भेजे जा रहे हैं।

आइओसी 11 लाख टन र्इंधन में से करीब 80 फीसद रक्सौल सीमा के रास्ते नेपाल भेजा है। लेकिन नेपाल और भारत के बीच यह मुख्य सीमा मार्ग बंद है। इसका कारण नेपाल में नये संविधा के खिलाफ मधेशी समुदाय का विरोध प्रदर्शन है। जो ट्रक टैंकर र्इंधन लेकर नेपाल जाते हैं, वे हिमालयी देश की सरकारी तेल कंपनी के हैं और सीमा पर विरोध प्रदर्शन के कारण वे आइओसी के डिपो नहीं पहुंच पा रहे हैं।

बी अशोक ने कहा- आखिरकार ट्रकों को हमारे पास पहुंचना होगा। विरोध की वजह से हमारे डिपो तक नहीं आ पा रहे हैं। हम किसी भी मात्रा में र्इंधन की आपूर्ति करने को तैयार हैं लेकिन हमारे पास अपने ट्रक नहीं होते। उनके ट्रकों को यहां आना होगा। जब भी वे आते हैं, हम र्इंधन उपलब्ध कराएंगे। उल्लेखनीय है कि र्इंधन की कमी से जूझ रहे नेपाल ने पिछले सप्ताह नेपाल ने चीन के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किए। नेपाल ऑयल कॉरपोरेशन और नेशनल यूनाइटेड ऑयल कॉरपोरेशन (पेट्रो चाइना) ने इसके लिए सहमति पत्र दस्तखत किए।

लगातार ब्रेकिंग न्‍यूज, अपडेट्स, एनालिसिस, ब्‍लॉग पढ़ने के लिए आप हमारा फेसबुक पेज लाइक करेंगूगल प्लस पर हमसे जुड़ें  और ट्विटर पर भी हमें फॉलो करें

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App