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भारत तय करे, पकौड़ा चाहिए या टोयोटा? कारों पर 50 पर्सेंट टैक्स पर ब्लूमबर्ग के लेख में उठाया सवाल

लेख में कहा गया है कि 6 साल का हैडलाइन मैनेजमेंट मोदी सरकार के लिए काफी होना चाहिए। अचानक नोटबंदी से लेकर जीडीपी डाटा को अपने पक्ष में बता कर मोदी सरकार ने देश में सब कुछ सही चल रहा है का नैरेटिव सेट करने में कोई कमी नहीं छोड़ी।

Author Edited By यतेंद्र पूनिया नई दिल्ली | Updated: September 23, 2020 1:22 PM
taxes on carभारत में कारों पर 50 पर्सेंट के करीब है टैक्स

भारत को पकौड़ा चाहिए या फिर टोयोटा? आर्थिक वेबसाइट ब्लूमबर्ग पर एक लेख में भारत में कारों पर लगने वाले करीब 50 फीसदी तक के टैक्स को लेकर सवाल उठाते हुए यह बात कही गई है। लेखक एंडी मुखर्जी ने कारों पर टैक्स के मसले पर सरकार की उपेक्षा पर सवाल उठाते हुए लिखा है कि नरेंद्र मोदी मेक इन इंडिया की बात करते हैं, जबकि टोयोटा कहता है कि कारों को ड्रग्स या फिर शराब की तरह ट्रीट न करें। मुखर्जी ने कहा कि जब टोयोटा की ओर से ज्यादा टैक्स के चलते भारत में विस्तार न करने की बात कही तो सरकार ने इस मसले पर ध्यान नहीं दिया। इसकी बजाय प्रसारण मंत्रालय की भी जिम्मेदारी संभालने वाले भारी उद्योग मंत्री यह बताने में जुट गए कि यह खबर गलत है।

लेख में कहा गया है कि 6 साल का हैडलाइन मैनेजमेंट मोदी सरकार के लिए काफी होना चाहिए। अचानक नोटबंदी से लेकर जीडीपी डाटा को अपने पक्ष में बता कर मोदी सरकार ने देश में सब कुछ सही चल रहा है का नैरेटिव सेट करने में कोई कमी नहीं छोड़ी। यह जितना ज्यादा चलेगा, भारत की अर्थव्यस्था उतने ही संकट से घिरती जाएगी। लेखक ने कहा कि यह समय है, जब सभी संबंधित और नाखुश पक्षों से ईमानदार संवाद किया जाना चाहिए।

मजदूरों, कारोबारियों और राज्य सरकारों के साथ संवाद होना चाहिए। देश भर में लॉकडाउन में ढील दी जा रही है, लेकिन कोरोना के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। लॉकडाउन के दौरान नौकरियां गंवा चुके मजदूर दोबारा काम चाहते हैं। कारोबारियों ने कोरोना काल से पहले ही निवेश कम कर दिया था। यह असंभव है कि डिमांड बढ़ाने के लिए कंजम्पशन टैक्स घटा दिया जाए।

इसके अलावा देश की 29 राज्य सरकारों को इस टैक्स की बहुत ज्यादा जरूरत है। इस रिपोर्ट में ऑटो एनालिस्ट गोविंद चेलप्पा के सुझावों का भी जिक्र किया गया है। चेलप्पा ने कहा है मान लीजिए अगर अब टैक्स ज्यादा भी रहते हैं भारत को कम से कम 15 वर्ष के लिए इस में स्थिरता लानी चाहिए। नए प्रोडक्ट बनाने में 24 से 36 महीने लग जाते हैं और 12 महीने नए फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को तैयार करने में लगते हैं। अगर हर दूसरे साल टैक्स और रेगुलेशन में बदलाव होगा तो कंपनियां कैसे भारत में निवेश करने की सोचेंगी। इसी तरह बेडली डिजाइन्ड गुड्स ओर सर्विसेज को एक बार ऑवरहोल दिया जाना चाहिए और साथ में लंबे समय तक निश्चितता भी दी जानी चाहिए।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है भारत को हाई टैक्स और कम कंज्यूमर डिमांड का दुष्चक्र तोड़ना चाहिए‌। जिसके कारण निवेश और नौकरियां नहीं बढ़ रही हैं। इस कारण निचले तबके की इनकम नहीं बढ़ रही है और उनकी पर्चेजिंग पावर नाकाफी है। फिलहाल भारत में कारों पर ज्यादा टैक्स लग रहा है। यह टैक्स उस छोटी कंज्यूमिंग क्लास से लिया जाना चाहिए, जिसकी 23,000 डॉलर की टोयोटा सिडान खरीदने की क्षमता हो।

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