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भारत फेडरल रिज़र्व की ब्याज़ दर वृद्धि के असर से निपटने को तैयार: सीईए

अमेरिका में साल के मध्य से आर्थिक वृद्धि में तेजी के साथ फेडरल रिजर्व ने ब्याज दर बढ़ायी है। एक दशक में दूसरा मौका है जब ब्याज दर बढ़ायी गयी है।

Author नई दिल्ली | December 15, 2016 5:46 PM
मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) अरविंद सुब्रमणियम। (एक्सप्रेस फोटो)

मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) अरविंद सुब्रमणियम ने गुरुवार (15 दिसंबर) को कहा कि अमेरिका के फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दर बढ़ाये जाने से उभरती अर्थव्यवस्थाओं में पूंजी प्रवाह में उतार-चढ़ाव और अनिश्चितता आएगी लेकिन भारत इसके प्रभाव से निपटने के लिये अच्छी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी फेडरल द्वारा ब्याज दर में 0.25 प्रतिशत की वृद्धि उम्मीद के अनुरूप है और भारत मजबूत आर्थिक बुनियाद के साथ अन्य बाजारों के मुकाबले इस मामले में कम चिंतित है। सुब्रमणियम ने उद्योग मंडल एसोचैम के एक कार्यक्रम में कहा, ‘अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ रही हैं और डालर मजबूत हो रहा है। वास्तव में कुछ पुनर्आकलन होगा और कम-से-कम कुछ समय के लिये उभरते बाजारों से पूंजी अमेरिका में जाएगी। लेकिन इससे हम अन्य देशों के मुकाबले कम प्रभावित होंगे।’

अमेरिका में साल के मध्य से आर्थिक वृद्धि में तेजी के साथ फेडरल रिजर्व ने ब्याज दर बढ़ायी है। एक दशक में दूसरा मौका है जब ब्याज दर बढ़ायी गयी है। पिछली बार दिसंबर 2015 में ब्याज दर बढ़ायी गयी थी। सुब्रमणियम ने कहा, ‘यह उम्मीद के अनुरूप है। भारतीय अर्थव्यवस्था इसके प्रभाव से निपटने के लिये पूरी तरह तैयार है। मुझे लगता है कि रिजर्व बैंक की नीति में भी इसे उपयुक्त तरीके से ध्यान में रखा गया है। मुझे लगता है कि कुछ अल्पकालीन चीजें होंगी लेकिन हमें इसको लेकर चिंता करने की जरूरत नहीं है।’ उन्होंने कहा, ‘रिजर्व बैंक इस पर सही निर्णय करेगा। उतार-चढ़ाव और अनिश्चितता के समय में मजबूत वृहद अर्थव्यवस्था की जरूरत होती है जो हमारे पास है। मैं इसको लेकर थोड़ा कम चिंतित हूं।’

उल्लेखनीय है कि पिछले सप्ताह रिजर्व बैंक ने ब्याज दरों पर यथास्थित बनाये रखी। उसने कहा कि वह नोटबंदी तथा अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दर में वृद्धि के प्रभाव को देखने के लिये प्रतीक्षा करना चाहता है। मुख्य आर्थिक सलाहकार सुब्रमणियम ने कहा कि उभरते बाजारों से कोष का बड़े पैमाने पर बाह्य प्रवाह हुआ है लेकिन चूंकि भारत निवेश का आकर्षक स्थल है, इसलिये यहां प्रभाव कम होगा। ओपेक तथा गैर-ओपेक देशों द्वारा तेल उत्पादन में 2008 के बाद पहली बार कटौती के निर्णय से ईंधन के दाम में तेजी के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि पिछले 5-7 साल में तेल बाजार का काफी विकास हुआ है। कच्चे तेल की कीमतें कहां तक ऊपर जा सकती है शेल तेल और गैस के उत्पादन को देखते हुये इसकी अब एक स्वभाविक सीमा दिखाई देती है। उल्लेखनीय है कि ओपेक तथा गैर-ओपेक देशों द्वारा उत्पादन में कटौती पर सहमति से तेल का दाम 17 महीने के उच्च स्तर पर चला गया है। हालांकि, अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दर बढ़ाये जाने से इसमें कमी आयी है। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट तेल का भाव न्यूयार्क मर्केन्टाइल एक्सचेंज में 1.94 डॉलर घटकर 51.04 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं ब्रेंट का दाम 1.82 डॉलर या 3.3 प्रतिशत घटकर 53.90 डॉलर प्रति बैरल रह गया।

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