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कारोबार सुगमता के मामले में भारत 130वें स्थान पर

भारत कारोबार के लिए सुगमता की दृष्टि से विश्व बैंक की ओर से जारी सालाना रैंकिंग में इस बार 189 देशों में अपनी स्थिति बेहतर कर 130वें स्थान पर पहुंच गया है...

Author वाशिंगटन | October 28, 2015 11:29 PM
विश्व बैंक (फाइल फोटो)

भारत कारोबार के लिए सुगमता की दृष्टि से विश्व बैंक की ओर से जारी सालाना रैंकिंग में इस बार 189 देशों में अपनी स्थिति बेहतर कर 130वें स्थान पर पहुंच गया है जो पिछले साल से 12 स्थान ऊंचा है। विश्व बैंक के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इसे उल्लेखनीय उपलब्धि कहा है।

विश्व बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री और वरिष्ठ उपाध्यक्ष कौशिक बसु ने भारत की रैंकिंग पर अपनी टिप्पणी में कहा कि कारोबार में सुगमता की रैंकिंग में 12 पायदान ऊपर चढ़ना भारत जैसे आकार की अर्थव्यवस्था के लिए उल्लेखनीय उपलब्धि है। बसु ने एक बातचीत में कहा कि किसी भी बड़ी अर्थव्यवस्था के लिए 12 पायदान का सुधार एक उल्लेखनीय उपलब्धि है। पिछले साल भारत 142वें स्थान पर था उसे देखते हुए 130वें स्थान पर पहुंचना बहुत अच्छा संकेत है। भारत में हालात जिस तरफ बढ़ रहे हैं, यह उनकी ओर अच्छा संकेत है।

‘कारोबार में सुगमता पर विश्व बैंक की रपट-2016’ में सिंगापुर पहले स्थान पर है। उसके बाद न्यूजीलैंड, डेनमार्क, दक्षिण कोरिया, हांगकांग, ब्रिटेन और अमेरिका का स्थान है। इस सूची में चीन 84वें, पाकिस्तान 138वें स्थान पर है। पाकिस्तान पिछली सूची के अपने 128वें स्थान से दस पायदान नीचे लुढ़क गया है जबकि चीन छह पायदान ऊपर आ गया है। विश्व बैंक ने भारत में कारोबार शुरू करने संबंधी नियमों को सरल बनाए जाने का विशेष रूप से उल्लेख किया है जिसमें न्यूनतम चुकता पूंजी और कारोबार शुरू करने के प्रमाणपत्र की अनिवार्यता खत्म किए जाने जैसे प्रावधानों का उल्लेख है।

विश्व बैंक के वरिष्ठ अधिकारी और वैश्विक संकेतकों के निदेशक जोपेज क्लारोस ने कहा- भारत के बारे में खास बात यह है कि वे सुधार की ऐसी प्रक्रिया में लगे हैं जो बहुत ही महत्त्वाकांक्षी दिखती है जिससे कारोबार में सुगमता के संकेतकों को प्रभावित करने वाले बहुत से क्षेत्र प्रभावित होंगे। मुझे उम्मीद है कि यह प्रक्रिया जारी रही और इसे मजबूत बनाए रखा गया व अधिकारी उसी दृढ़निश्चय के साथ चलते रहे जो संकल्प उन्होंने पिछले साल दिखाया था तो हम इसमें अगले साल बड़ा सुधार देख सकते हैं।

क्लोरोस ने भारत में तीव्र गति से आर्थिक वृद्धि की संभावनाओं को मजबूत बताया और युवा आबादी के अनुकूल अनुपात का उल्लेख करते हुए कहा कि कारोबार में सुगमता बढ़ने से देश को बहुत बड़ा लाभ हो सकता है। उन्होंने कहा कि यह लाभ केवल भारत को ही नहीं बल्कि विश्व अर्थव्यवस्था तक फैलेगा। उन्होंने कहा- चूंकि भारत एक बड़ी अर्थव्यवस्था है, इसके विश्व अर्थव्यवस्था पर प्रभाव के रूप में अंतरराष्ट्रीय फलितार्थ होंगे। भारत ने कारोबार के नियम कायदों को आसान बनाने में अच्छी कामयाबी पाई है। 2004 में जहां कोई कंपनी शुरू करने में 127 दिन लग जाते थे वहीं 2015 में कारोबार 29 दिन में शुरू किया जा सकता है।

भारत ने कर्ज वसूली ट्रिब्यूनल स्थापित कर बैंक कर्ज वसूली प्रक्रिया तेज की है। वसूल नहीं हो रहे कर्ज में 28 फीसद की कमी आई है। यह कर्ज सस्ता करने में सहायक हुआ है। देश में 2010 में वैट के अनलाइन पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू हुई। पिछले साल कारोबार शुरू करने के लिए न्यूनतम चुकता पूंजी की व्यवस्था खत्म कर दी गई और इस दिशा में और सुधार किए जा रहे हैं। दिल्ली, मुंबई में बिजली का कनेक्शन हासिल करना आसान हो गया है। निर्माण का परमिट हासिल करने में आसानी के पैमाने पर भारत 183वें स्थान पर है जबकि बिजली कनेक्शन में आसानी की दृष्टि से 70वीं रैंकिंग है।

छोटे निवेशकों के संरक्षण के मामले में भारत 8वें, कर्ज हासिल करने की आसानी में 42वें, कर चुकाने व व्यावसायिक अनुबंधों के अनुपालन के मामले में क्रम से 157वें और 178वें स्थान पर है। विदेश व्यापार के मामले में रैंकिंग 133वीं और दिवालियापन के विवाद निपटाने में 136वीं है। रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में 22 देश ऐसे हैं जिनमें दिवालियापन के मामले सुलझाने में 1000 दिन से भी ज्यादा समय लग जाता है। उनमें से चार देश दक्षिण एशिया के हैं। इनमें भारत के अलावा अफगानिस्तान, बांग्लादेश और श्रीलंका का नाम है। इस क्षेत्र में संपत्ति के बैनामे में औसतन 98 दिन लग जाते हैं जबकि विश्व औसत इसके आधे से भी कम है। अनुसंधान से यह बात सामने आई है कि किसी कर की अभिकल्पना में खामी से कंपनियों में बड़ा डर पैदा हो सकता है।

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