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INDIA POST PAYMENTS BANK गंभीर वित्तीय संकट में, सैलरी देने का भी संकट!

पोस्टल डिपार्टमेंट को ऐसा लग रहा है कि इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक के ऑपरेशंस से वित्तीय फायदा नहीं हो रहा है। इसी वजह से बैंक ने नई भर्तियों पर रोक लगा दी है। विभाग अब इसे छोटे फाइनेंस बैंक में तब्दील करना चाहता है और रिजर्व बैंक की इजाजत की राह देख रहा है।

Author नई दिल्ली | Published on: October 24, 2019 8:51 AM
तस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (file photo)

Indian post, Slowdown: सरकार ने पिछले साल बेहद शानदार तरीके से INDIA POST PAYMENTS BANK को लॉन्च किया था। हालांकि, अब यह गंभीर वित्तीय संकट से गुजर रहा है। एक अंग्रेजी अखबार में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, बैंक पर सैलरी देने का बोझ बढ़ रहा है और उसका कारोबार भी काफी मंदा रहा है।

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द टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित खबर के मुताबिक, पोस्टल डिपार्टमेंट को ऐसा लग रहा है कि इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक के ऑपरेशंस से वित्तीय फायदा नहीं हो रहा है। इसी वजह से बैंक ने नई भर्तियों पर रोक लगा दी है। विभाग अब इसे छोटे फाइनेंस बैंक में तब्दील करना चाहता है और रिजर्व बैंक की इजाजत की राह देख रहा है। यह दर्जा मिलने के बाद 1 लाख रुपये से ज्यादा का डिपॉजिट ले सकेगा।

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सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि पेमेंट बैंक का मॉडल शुरू से ही व्यवहारिक नहीं था। तकनीक पर बहुत ज्यादा पैसा खर्च किया गया। एक आकलन के मुताबिक, कोर बैंकिग सिस्टम और अन्य तकनीक स्थापित करने के लिए 1000 करोड़ रुपये तक खर्च किए गए। एक सूत्र ने तो यहां तक दावा किया कि ऐसी तकनीक की जरूरत ही नहीं थी। मैनपावर पर होने वाला खर्च भी धीरे धीरे बोझ बन गया और इस मद में करीब 250 करोड़ रुपये खर्च हो गए।

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बता दें कि पेमेंट बैंकों को पूर्व आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन के दिमाग की उपज माना जाता है। ये बैंक लोन नहीं देते हैं और एक संपूर्ण बैंक की तरह सेवाएं भी प्रदान नहीं करते। इन बैंकों को 1 लाख रुपये से ज्यादा का डिपॉजिट लेने की भी इजाजत नहीं होती। हालांकि, देश के सुदूर इलाकों में बैंकिग सिस्टम को पहुंचाने में ये मदद कर सकते हैं।

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