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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का करारा वार- अब भारत को नहीं लेने देंगे विकासशील देश होने का फायदा

वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गनाइजेशन एक ऐसी संस्था है जो कि विश्व के अलग-अलग देशों के बीच अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को नियंत्रित करता है।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार (14 अगस्त 2019) को कहा है कि वह अब भारत को विकासशील देश होने का फायदा नहीं लेने देंगे। इसके साथ ही ट्रंप ने चीन को भी विकासशील देश मानने से इनकार कर दिया है। ट्रंप ने कहा है कि ‘भारत और चीन विकासशील देश के टैग के साथ वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूटीओ) से फायदा उठा रहे हैं। बीते कई सालों से ऐसा चला आ रहा है। मुझे लगता है कि अब ज्यादा टाइम तक ऐसा नहीं चलने वाला। अमेरिका आगे ऐसा नहीं होने देगा।’

मालूम हो कि वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गनाइजेशन एक ऐसी संस्था है जो कि विश्व के अलग-अलग देशों के बीच अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को नियंत्रित करता है। डब्ल्यूटीओ की अमेरिका को ‘तवोज्जों’ देने की उम्मीद लगाते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि डब्ल्यूटीओ को लगता है कि भारत और चीन जैसे देश अभी भी विकासशील देश हैं। लेकिन वह अब विकासशील नहीं हैं। जुलाई में ट्रंप ने वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गनाइजेशन से पूछा था कि वह किसी देश को किस आधार पर विकासशील देश का टैग देती है।

मालूम हो कि अमेरिका बीते कुछ समय से भारत का लाभार्थी विकासशील देश का दर्जा समाप्त करना चाह रहा है। चीन संग ट्रेड वॉर के साथ-साथ भारत अमेरिका के निशाने पर है। वैसे तो अमेरिका भारत को एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अपना सहयोगी बताता रहा है। लेकिन ट्रंप प्रशासन ने बीते कुछ समय में कुछ ऐसे फैसले लिए है जो भारतीय अर्थव्यवस्था की चुनौतियों को और बढ़ाएंगे। पहले अमेरिका ने ईरान से कच्चे तेल की खरीद पर प्रतिबंध लगाया। यह फैसला ऐसे वक्त में किया गया, जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत काफी बढ़ चुकी है। भारत के लिए तेल की कीमतें नीचे लाना बड़ा चुनौती है। ईरान से तेल की खरीद बंद होने से यह चुनौती और बढ़ गई है।

इसके बाद अमेरिका ने व्यापार में सामान्य तरजीही व्यवस्था यानी जीएसपी खत्म कर दी। जीएसपी के तहत अमेरिका में विकासशील देशों की करीब दो हजार वस्तुएं शुल्क मुक्त भेजी और बेची जा रही थीं। अब कोई भी देश ऐसा नहीं कर सकता। स्वाभाविक ही इससे भारत के व्यापार पर नकारात्मक असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि भारतीय वाणिज्य मंत्रालय ने कहा है कि दो देशों के रिश्तों में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, अमेरिकी फैसले में भी बेहतरी के रास्ते खुल सकते हैं।

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