ईरान और इज़रायल के बीच जारी भीषण युद्ध की वजह से पूरी दुनिया में तेल संकट की आशंका बढ़ गई है। जिस तरह से Strait of Hormuz में जहाज़ों की आवाजाही प्रभावित हुई है, उससे वैश्विक तेल सप्लाई बुरी तरह बाधित हो रही है। इसी वजह से एक बार फिर भारत ने रूसी तेल का आयात बढ़ाना शुरू कर दिया है।
रूस से कितना तेल आयात कर रहा भारत?
तेल आयात के आंकड़ों में मार्च के सिर्फ 11 दिनों के भीतर ही बड़ा उछाल देखने को मिला है। युद्ध शुरू होने से पहले तक के आंकड़े भी काफी चौंकाने वाले हैं। भारत फरवरी में रूस से प्रतिदिन करीब 8 लाख बैरल तेल आयात कर रहा था।
लेकिन अब जब ईरान-इज़रायल युद्ध शुरू हो चुका है और यह अपने बारहवें दिन में पहुंच चुका है, तो भारत का रूस से तेल आयात मार्च के पहले 11 दिनों में ही करीब 1.5 मिलियन बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया है। जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में भारत रूस से और ज्यादा तेल आयात कर सकता है, अगर युद्ध इसी तरह जारी रहा और स्ट्रेट ऑफ हॉरमोज की स्थिति सामान्य नहीं हुई। वर्तमान में भारत अपनी तेल जरूरतों का करीब 40 फीसदी आयात Strait of Hormuz के जरिए करता रहा है। इसमें इराक, सऊदी अरब और यूएई जैसे देशों से आने वाली सप्लाई शामिल रहती है।
आने वाले दिनों में क्या स्थिति रहेगी?
Kpler में एनर्जी सेक्टर के लीड एनालिस्ट सुमित रिटोलिया ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कहा कि मौजूदा हालात को देखते हुए रूस से तेल आयात 2 मिलियन बैरल प्रतिदिन तक पहुंच सकता है। जरूरत पड़ने पर यह आंकड़ा इससे भी ज्यादा हो सकता है, अगर क्षेत्र की स्थिति जल्द सामान्य नहीं होती।
जानकारी के लिए बता दें कि ट्रंप प्रशासन की नई टैरिफ नीति की वजह से भारत ने पिछले कुछ समय में रूस से तेल आयात कम कर दिया था। आंकड़े बताते हैं कि इस साल फरवरी में भारत ने रूस से सिर्फ करीब 1 मिलियन बैरल प्रतिदिन क्रूड ऑयल आयात किया था, जो 2025 के उच्चतम स्तर से काफी कम था। विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि अगर स्ट्रेट ऑफ हॉरमोज में तनाव बना रहता है, तो अमेरिका को भी इस बात से खास आपत्ति नहीं होगी कि भारत रूस से तेल आयात बढ़ाए। पिछले हफ्ते अमेरिका ने भारत को 30 दिन की अस्थायी छूट भी दी थी। इस छूट के तहत भारत उन रूसी तेल टैंकरों से तेल खरीद सकता है जो पहले से समुद्र में मौजूद हैं।
हालांकि भारत सरकार ने साफ कर दिया है कि देश के पास फिलहाल करीब 6 से 8 हफ्तों का कच्चे तेल और ईंधन का भंडार मौजूद है। ऐसे में तत्काल किसी संकट की आशंका नहीं है और सप्लाई लगातार जारी रहेगी। इसके अलावा भारत की कई तेल कंपनियां दुनिया के बड़े सप्लायर्स और अंतरराष्ट्रीय ट्रेडरों के संपर्क में भी हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त तेल की व्यवस्था की जा सके। अब तेल का सीधा कनेक्शन वर्तमान में जारी ईरान-इजरायल युद्ध से है जहां हर पल कुछ ना कुछ बदल रहा है। युद्ध की हर अपडेट के लिए यहां क्लिक करें
