भारत दुनिया की पांचवीं अर्थव्यवस्था रहने के बाद अब एक पायदान फिसल गया है। इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक भारत की जीडीपी रैंकिंग 5वें स्थान से घटकर 6वें स्थान पर आ गई है और ब्रिटेन (UK) फिर से भारत से आगे निकल गया है।
IMF के अनुमान के अनुसार 2025 और 2026 में भी भारत छठे स्थान पर रह सकता है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव मुख्य रूप से डॉलर के मुकाबले रुपये के कमजोर होने के कारण हुआ है।
6वें स्थान पर रहने का अनुमान
IMF के अनुसार, भारत की जीडीपी 2025 (वित्तीय वर्ष 2026) में 3.92 ट्रिलियन डॉलर और 2026 ( वित्तीय वर्ष 2027) में 4.15 ट्रिलियन डॉलर होने का अनुमान है। वही, यूके की जीडीपी 2025 में 4 ट्रिलियन डॉलर और 2026 में 4.26 ट्रिलियन डॉलर होने की उम्मीद है। जापान 4.44 ट्रिलियन डॉलर और 4.38 ट्रिलियन डॉलर रहने की उम्मीद है।
क्या होती है जीडीपी?
जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) एक वित्त वर्ष में किसी भी देश में बनी वस्तुओं और सेवाओं का मूल्य होता है। अगर किसी देश की जीडीपी ज्यादा होती है तो उस देश के लोगों का जीवन स्तर काफी बेहतर होता है, उन्हें विकसित देश कहा जाता है। वहीं, अगर किसी देश की जीडीपी कमजोर है तो उसे विकासशील देश कहा जाता है।
जीडीपी का बेस ईयर क्या होता है?
जीडीपी के बेस ईयर की गणना रियल जीडीपी निर्धारित करने के लिए की जाती है, जिसमें एक विशेष वर्ष के बराबर प्राइस निर्धारित किए जाते हैं। ये एक ऐसा मानक है जिसके आधार पर वर्षों में आर्थिक विकास की तुलना की जाती है।
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8वें वेतन आयोग से जुड़ी प्रक्रिया अब औपचारिक रूप से शुरू हो गई है। आयोग केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स के वेतन-पेंशन ढांचे में संभावित बदलाव से पहले विभिन्न कर्मचारी यूनियनों, संगठनों और अन्य हितधारकों से सुझाव ले रहा है। यहां पढ़ें पूरी खबर…
