पश्चिम एशिया में बढ़ते संकट के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा आपूर्ति सुरक्षित करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। अमेरिकी वित्त विभाग से 30 दिन की विशेष छूट मिलने के बाद भारतीय रिफाइनरी कंपनियों ने देश के पास समुद्र में फंसे करीब 1.5 करोड़ बैरल रूसी कच्चे तेल की खरीद फिर से तेज कर दी है।

रिफाइनरियां यह कदम पश्चिम एशिया में आपूर्ति बाधाओं से पैदा हुई चिंताओं के बीच उठा रही हैं। सूत्रों ने कहा कि अमेरिकी वित्त विभाग ने भारत को समुद्र में फंसे रूसी तेल कार्गो खरीदने की अनुमति देने के लिए 30 दिवसीय लाइसेंस जारी किया है जिसके बाद रिफाइनरी कंपनियों ने अपनी खरीद तेज कर दी है।

रूस के तेल के शीर्ष खरीदारों में शामिल भारत ने अमेरिका के दबाव के बाद अपनी रूसी तेल की खरीद कम कर दी थी। फरवरी में भारत का रूसी कच्चे तेल का आयात घटकर 10.4 लाख बैरल प्रति दिन रह गया जो नवंबर 2022 के बाद सबसे निचला स्तर है।

अमेरिका ने भारतीय वस्तुओं पर शुल्क में कटौती को भारत द्वारा रूसी कच्चे तेल की खरीद कम करने से जोड़ दिया था। सूत्रों ने कहा कि इसके कारण रूसी तेल के कई जहाज समुद्र में ही फंस गए थे। भारत अब पश्चिम एशिया की आपूर्ति में व्यवधान के बीच अपनी खरीद को एडजस्ट कर रहा है। ऐसे में भारतीय रिफाइनरियां अब घरेलू ईंधन की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए समुद्र में मौजूद रूसी कार्गो और अन्य स्रोतों से खरीद के बीच संतुलन बना रही हैं।

सूत्रों ने कहा कि अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में रूसी तेल के एक दर्जन से अधिक टैंकर मौजूद हैं। इसके अलावा आठ अन्य जहाज सिंगापुर के पास खड़े हैं जो कुछ ही दिन में भारत पहुंच सकते हैं। जिंस कारोबार का विश्लेषण करने वाली कंपनी केप्लर के सुमित रितोलिया ने कहा कि छूट मिलने के बाद रिफाइनरियां तेजी से खरीद शुरू कर सकती हैं, जिससे निकट भविष्य में रूसी तेल का आयात 16 से 20 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच सकता है।

अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट (Scott Bessent) ने गुरुवार को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह फैसला सोच-समझकर लिया गया है और इसका उद्देश्य केवल पहले से समुद्र में फंसे हुए तेल के लेन-देन को अधिकृत करना है जिससे रूसी सरकार को कोई बड़ा वित्तीय लाभ नहीं होगा।

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(एजेंसी इनपुट के साथ )