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इनकम टैक्स रिटर्न भरने के लिए बेहद जरूरी हैं ये दस्तावेज, मेडिकल इंश्योरेंस से एफडी तक जानें किसका क्या काम

टैक्सपेयर अपने इनकम टैक्स रिटर्न भरते वक्त केंद्र सरकार के खजाने में दिए गए टैक्स का उल्लेख Form 26AS में कर उसे अपने Form 16 के साथ टेली कर सकते हैं। सरकार ने बीते साल ही नया फॉर्म 26AS जारी किया है।

Author Edited By यतेंद्र पूनिया नई दिल्ली | Updated: September 4, 2020 3:15 PM
income tax returnइनकम टैक्स रिटर्न भरने से पहले इन दस्तावेजों का रखें ध्यान

फाइनेंशियल ईयर 2019-20 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न भरने की आखिरी तारीख 30 नवंबर है। ऐसे में अब ज्यादा समय नहीं बचा है। आखिकी वक्त में भागदौड़ करने से बेहतर है कि इस काम को पहले ही निपटा लिया जाए। हालांकि इनकम टैक्स रिटर्न भरने जा रहे हैं तो कुछ दस्तावेजों का भी ध्यान रखना जरूरी है। आइए जानते हैं, आईटीआर के लिए कौन से दस्तावेज हैं जरूरी…

फॉर्म 16 है बेहद जरूरी: इनकम टैक्स रिटर्न भरने को सभी सैलरीड व्यक्तियों के लिए Form 16 एक मुख्य दस्तावेज है। यह नियोक्ता द्वारा दिया गया सर्टिफिकेट है, जिसमें टैक्स कटौती की विस्तृत जानकारी के साथ-साथ कर्मचारियों को दी जाने वाली सैलरी और उनके टीडीएस की जानकारी भी होती है। प्रत्येक एंप्लॉयर का उत्तरदायित्व है कि जिन कर्मचारियों की सैलेरी से इनकम टैक्स की कटौती की गई है, उनको Form 16 इश्यू करे।

फॉर्म 16 के हैं दो पार्ट: फॉर्म के पहले हिस्से में नियोक्ता द्वारा वित्तीय वर्ष में काटा गया इनकम टैक्स आता है। इसमें कर्मचारी के परमानेंट अकाउंट नंबर (PAN) और एंप्लॉयर के टैक्स डिडक्शन अकाउंट नंबर की जानकारी होती है, जबकि Part B में कर्मचारी के ग्रॉस इनकम ब्रेक-अप की जानकारी होती है।

फॉर्म 26AS: इनकम टैक्स डिपार्टमेंट एक वार्षिक कंसोलिडेटेड टैक्स स्टेटमेंट बनाता है, जिसे Form 26AS के नाम से जाना जाता है। परमानेंट अकाउंट नंबर का प्रयोग कर आप इनकम टैक्स की वेबसाइट से इसका आसानी से उपयोग कर सकते हैं। इसमें सैलरीड क्लास लोगों के टीडीएस और वित्तीय वर्ष में दिए गए टैक्स की जानकारी होती है। टैक्सपेयर अपने इनकम टैक्स रिटर्न भरते वक्त केंद्र सरकार के खजाने में दिए गए टैक्स का उल्लेख Form 26AS में कर उसे अपने Form 16 के साथ टेली कर सकते हैं। सरकार ने बीते साल ही नया फॉर्म 26AS जारी किया है। इसमें टैक्सपेयर की ओर से किए गए वित्तीय लेनदेन की जानकारी दी जाती है।

टैक्स सेविंग इन्वेस्टमेंट: अगर कंपनियां/संस्था अपने टैक्स सेविंग इन्वेस्टमेंट अपने कर्मचारियों को देने में नाकामयाब रही हैं तो व्यक्ति को टैक्स सेविंग इन्वेस्टमेंट के सबूत इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को देने चाहिए। इसमें एलआईसी प्रीमियम की रसीद, मेडिकल इंश्योरेंस की रसीद, पब्लिक प्रोविडेंट फंड (पीपीएफ) की पासबुक, 5 साल की एफडी रसीदें, म्यूच्यूअल फंड इन्वेस्टमेंट की जानकारी, होम लोन रीपेमेंट का स्टेटमेंट, डोनेशन की रसीद या ट्यूशन फीस की रसीद हो सकती है।

इंटरेस्ट इनकम से संबंधित सर्टिफिकेट: एक व्यक्ति सैलरी से अलावा सेविंग अकाउंट डिपॉजिट, बैंक या पोस्ट ऑफिस में जमा फिक्स्ड डिपॉजिट से भी आय करता है। इस ब्याज को लेकर वित्तीय संस्थानों की ओर से सर्टिफिकेट भी जारी किया जाता है। इनकम टैक्स एक्ट के Sec 80TTA के अंतर्गत एक व्यक्ति बैंक या पोस्ट ऑफिस के सेविंग अकाउंट से अर्जित इंटरेस्ट पर 10,000 रूपए तक की टैक्स कटौती की मांग कर सकता है।

मेडिकल इंश्योरेंस: सेक्शन 80D के अंतर्गत हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम के पेमेंट पर ₹25000 तक का क्लेम किया जा सकता है। इंश्योरेंस पॉलिसी खुद व्यक्ति की, उसके पति/पत्नी या बच्चों की भी हो सकती है। बुजुर्ग व्यक्तियों के मामले में इसकी लिमिट 50,000 रुपए तक है। इस सेक्शन के तहत अगर आप अपने माता-पिता का प्रीमियम भर रहे हैं तो आप अतिरिक्त कटौती की भी मांग कर सकते हैं। इन सबके ‌अलावा हाउसिंग लोन पर इंटरेस्ट और एजुकेशन पॉलिसी भी टैक्स सेविंग का एक तरीका हो सकते हैं।

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