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इनकम टैक्स में किए गए ये अहम बदलाव आज से हो गए लागू

5 लाख से 50 लाख रुपये के बीच की इनकम वालों को टैक्स में होगा 12,900 रुपये का फायदा।

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतिकात्मक तौर पर। (फाइल फोटो)

नया वित्त वर्ष 2017-18 शुरू हो गया है। फरवरी में पेश किए गए बजट में इस साल के लिए कुछ नियमों में बदलाव किए गए थे। बदलाव के नियम आज (1 अप्रैल) से लागू हो गए हैं। आइये जानते हैं इन अहम बदलवों के बारे में। सरकार ने इनकम टैक्स रेट में कमी कर दी है। अब 2.5 लाख रुपये से लेकर 5 लाख रुपये कमाने वाले लोगों को अब 5 फीसदी ही इनकम टैक्स देना होगा। पहले यह 10 फीसदी था। इकॉनमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक सालाना एक करोड़ रुपये से ज्यादा कमाने वाले लोगों को इससे 12,500 रुपये का फायदा होगा। अगर सरचार्ज और सेस मिला लिया जाए तो 14806 रुपये का फायदा होगा। जिनकी इनकम 5 लाख से 50 लाख रुपये के बीच है उन्हें 12,900 रुपये का टैक्स में फायदा मिलेगा। साढ़े तीन लाख रुपये की आय वाले करदाताओं की टैक्स छूट घटकर अब 2500 रुपये सालाना हो गई है। पहले पांच लाख रुपये की आय पर यह छूट 5,000 रुपये थी। टैक्स की दरों और छूट में हुए बदलाव के कारण सालाना 3.5 लाख रुपये की आय वाले करदाता को अब 2,575 रुपये टैक्स देना होगा, जबकि पहले 5150 रुपये देने होते थे।

5 लाख रुपये तक की कैटेगरी में पहली बार टैक्स देने वालों के लिए केवल एक ही फॉर्म होगा। इस श्रेणी के तहत पहली बार टैक्स रिटर्न फाइल करने वाले जांच के अधीन नहीं आते। राजीव गांधी इक्विटी सेविंग्स स्कीम में पहली बार पैसे लगाकर वापस निकालने वाले लोगों को 2017-18 में टैक्स नहीं देना होगा। अगर एक अप्रैल 2017 के पहले किसी ने डिडक्शन क्लेम किया हो, तो उसे अगले दो साल तक और उसका लाभ मिल सकता है।

वित्त वर्ष 2017-18 के लिए यदि 31 दिसंबर तक टैक्स भरते हैं तो आपको 5,000 रुपये का जुर्माना देना होगा। अगर 31 दिसंबर के बाद टैक्स देते हैं तो यह जुर्माना और ज्यादा भी हो सकता है। वहीं, देरी से टैक्स देने पर पांच लाख रुपये तक की इनकम वालों पर 1,000 रुपये का जुर्माना लगेगा।

अचल संपत्ति का लॉन्ग टर्म होल्डिंग पीरियड जो कि पहले तीन साल होता था, अब उसे घटाकर दो साल कर दिया गया है। इससे सुनिश्चित होगा कि दो साल से अधिक समय तक मालिकाना हक वाली संपत्ति पर घटा हुआ 20 फीसदी टैक्स लगे और फिर से निवेश करने पर वह अलग-अलग छूट के लिए योग्य रहे।

संशोधन की वजह से लॉन्ग टर्म कैपिटन गेन पर टैक्स कम लगेगा। कीमत की तुलना के लिए आधार वर्ष 1 अप्रैल, 1981 से बदलकर एक अप्रैल, 2001 किया गया। टैक्स रिटर्न में रिविजन की मियाद दो साल से घटकर एक साल हो गई है।

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