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IIT की फीस दोगुनी से ज्यादा

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) के स्नातक पाठ्यक्रमों की फीस दोगुनी से ज्यादा करने का प्रस्ताव किया है।

Author नई दिल्ली | April 8, 2016 2:07 AM
(File Photo)

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) के स्नातक पाठ्यक्रमों की फीस दोगुनी से ज्यादा करने का प्रस्ताव किया है। सूत्रों के अनुसार यह फैसला इस साल से शुरू होने वाले सत्र में दाखिला लेने वाले छात्रों पर लागू होगा। उन्हें अब 90 हजार की जगह दो लाख की सालाना फीस देनी होगी। इसके साथ ही मंत्रालय के प्रस्ताव में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, दिव्यांगों और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों (जिनकी सालाना आय एक लाख से कम है) के छात्रों की फीस माफ कर दी गई है। जबकि पांच लाख से कम आय वर्ग के लिए फीस में दो तिहाई की छूट का प्रावधान है।

आइआइटी प्रवेश के लिए जेईई (संयुक्त प्रवेश परीक्षा)-2017 के संबंध में किए गए एक अहम फैसले में जेईई मुख्य परीक्षा में रैंक निर्धारण में बारहवीं के अंकों पर दिए जाने वाला वेटेज हटा दिया गया है। साथ ही जेईई के लिए योग्यता में बाकी पेज 8 पर उङ्मल्ल३्र४ी ३ङ्म स्रँी 8
बारहवीं की परीक्षा में प्रदर्शन को एक मुख्य आधार बनाया गया है।

आइआइटी फीस में 122 फीसद की बढ़ोतरी के साथ ही यहां से स्नातक करने का सपना देखने वाले छात्रों के लिए पढ़ाई महंगी हो जाएगी। मानव संसाधन मंत्रालय के प्रस्ताव के अनुसार इस शैक्षिक सत्र में दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों को अब दो लाख सालाना फीस देनी होगी। हालांकि बढ़ी हुई फीस पुराने विद्यार्थियों (जो आइआइटी में नामांकित हैं और पढ़ाई कर रहे हैं) पर लागू नहीं होगी। इसके साथ ही मंत्रालय के बयान के अनुसार एससी-एसटी, दिव्यांगों और उन गरीब परिवारों के बच्चों (जिनकी वार्षिक आय एक लाख से कम है) को फीस में 100 फीसद छूट मिलेगी।

मंत्रालय के फैसले के अनुसार एक लाख से पांच लाख तक की सालाना आय वाले परिवारों के बच्चों को फीस में दो तिहाई की छूट मिलेगी। अन्य सभी विद्यार्थियों को विद्या लक्ष्मी योजना के तहत फीस के लिए ब्याज मुक्त कर्ज मुहैया कराया जाएगा। मंत्रालय द्वारा जारी बयान के अनुसार फीस संबंधी इस प्रस्ताव को आइआइटी काउंसिल की अगली बैठक में अनुमोदन के लिए रखा जाएगा।

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने आइआइटी प्रवेश के लिए जेईई-2017 में परिवर्तन को भी गुरुवार को अधिसूचित कर दिया। इस बदलाव के अनुसार छात्रों का 12वीं कक्षा की परीक्षा में प्रदर्शन जेईई के लिए योग्य होने का आधार होगा। जेईई के लिए योग्य होने के लिए अभ्यर्थियों को 12वीं में कम से कम 75 फीसद अंक लाने होंगे या फिर उन्हें अपने बोर्ड से संचालित 12वीं परीक्षा में शीर्ष 20 परसेंटाइल में आना होगा। एससी और एसटी छात्रों के लिए 65 फीसद अंक की ही जरूरत होगी।

मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार वर्तमान में जेईई मुख्य परीक्षा में रैंक निर्धारण के लिए 12वीं कक्षा के अंक पर दिया जाने वाला 40 फीसद वेटेज हटा दिया गया है। मंत्रालय के अनुसार यह निर्णय अशोक मिश्र समिति के रिपोर्ट और जनता के फीडबैक के आधार पर ली गई है। कई राज्य बोर्ड से पास होने वाले विद्यार्थियों की शिकायत रहती थी कि सीबीएसई की तुलना में उनके बोर्ड में कम अंक आते हैं।

मंत्रालय ने सभी आइआइटी से इस फीस बढ़ोतरी से आने वाली आय का उपयोग संरचना विकास में करने का निर्देश दिया है ताकि छात्रों को बेहतर सुविधा मिल सके। फीस में इस बढ़ोतरी के पीछे यह तर्क दिया गया है कि सभी आइआइटी को प्रबंधन की लागत छात्रों की फीस से ही वहन करनी है। मंत्रालय के अनुसार सरकार आइआइटी के प्रत्येक छात्र पर सालाना छह लाख रुपए खर्च करती है।

फीस बढ़ोतरी का प्रस्ताव आइआइटी काउंसिल की स्थायी समिति (एससीआइसी) के पिछले महीने की बैठक में की गई अनुसंशा के आधार पर की गई है। हालांकि इस समिति ने फीस को तीन लाख करने की सिफारिश की थी लेकिन केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी ने इसे खारिज करते हुए फीस दो लाख ही रखने को कहा।

सूत्रों के अनुसार इन निर्णयों के पीछे केंद्रीय मानव संसाधन स्मृति ईरानी का उद्देश्य यह है कि ज्यादा से ज्यादा गरीब और पिछड़े तबके के छात्र आइआइटी में आ सकें जिनके लिए सबसे बड़ी चुनौती फीस और राज्य बोर्ड में कम नंबर का आना था। इसके पहले 2013, 2008 और 1998 में आइआइटी की फीस में संशोधन किया गया था।

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