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लोन पर मोराटोरियम लिया था तो रखें ध्यान, ऐसा करने पर गिर सकता है क्रेडिट स्कोर, कर्ज मिलना होगा मुश्किल

बैंकों की ओर से कर्जधारकों को इस संबंध में मेसेज भी भेजे जा रहे हैं और आगाह किया जा रहा है कि यदि सितंबर से किस्तें समय पर न अदा की गईं तो क्रेडिट हिस्ट्री पर विपरीत असर पड़ सकता है।

Edited By यतेंद्र पूनिया नई दिल्ली | Updated: September 3, 2020 3:10 PM

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की ओर से घोषित EMI मोराटॉरियम की सुविधा 31 अगस्त 2020 को खत्म हो गई। इस स्कीम के अंतर्गत कर्जधारकों को क्रेडिट स्कोर पर बिना किसी प्रभाव के मार्च से अगस्त तक EMI पेमेंट की छूट दी गई थी। अब अगर आप लोन रिस्ट्रक्चरिंग के योग्य हैं तो फिर बैंक से कर्ज पर यह सुविधा ले सकते हैं, लेकिन इसे लेकर कुछ सावधानी भी बरतने की जरूरत है। EMI मोराटोरियम को RBI की गाइडलाइंस के मुताबिक अगर आपने किस्तों को स्थगित करने का विकल्प चुना है तो आपके क्रेडिट स्कोर पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। लेकिन अब इस अवधि के समाप्त होने के बाद लोन की रिस्ट्रक्चरिंग कराने पर ऐसा नहीं होगा।

AskCred की संस्थापक और सीईओ आरती खन्ना कहती हैं कि अगर आपने कोरोनावायरस की अवधि के दौरान EMI अदा नहीं की है तो आपके क्रेडिट स्कोर पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। लेकिन अब लोन की रिस्ट्रक्चरिंग कराना महंगा सौदा साबित हो सकता है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक यदि नई स्कीम के तहत ग्राहक अपने लोन का पुनर्गठन कराता है और बाद में नए लोन पर डिफॉल्टर हो जाता है तो उसके क्रेडिट स्कोर पर बहुत प्रभाव पड़ेगा। इसके अलावा बिना रिस्ट्रक्चरिंग के भी यदि ग्राहक मोराटोरियम की अवधि के बाद लोन समय पर नहीं अदा कर पाते हैं तो क्रेडिट स्कोर खराब होगा। बैंकों की ओर से कर्जधारकों को इस संबंध में मेसेज भी भेजे जा रहे हैं और आगाह किया जा रहा है कि यदि सितंबर से किस्तें समय पर न अदा की गईं तो क्रेडिट हिस्ट्री पर विपरीत असर पड़ सकता है।

मौजूदा स्थिति में ऐसे लाखों लोग हैं, जिन्हें अब भी लोन की किस्तें चुकाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे ग्राहक लोन का बैलेंस ट्रांसफर कराकर ब्याज में राहत पा सकते हैं। इसके अलावा बैंक से बातचीत कर ईएमआई भी कम कराई जा सकती है। इससे लोन की अवधि बढ़ जाएगी, लेकिन किस्तों की नियमित अदायगी से ग्राहक की क्रेडिट हिस्ट्री पर विपरीत असर नहीं पड़ेगा। वहीं क्रेडिट कार्ड बकाये की बात करें तो उसे रोकना बेहद महंगा सौदा साबित हो सकता है। ऐसे में बेहतर यही है कि पर्सनल लोन या फिर गोल्ड लोन लेकर बकाया अदा किया जाए। क्रेडिट कार्ड की तुलना में लोन पर ब्याज कम होता है।

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