बापोस्ट समूह के मुखिया और खुद एक बड़े निवेशक सेठ क्लारमैन ने ‘द अटलांटिक’ में वारेन बफेट के लिए एक भावनात्मक विदाई संदेश में लिखा कि वारेन की अरबों डालर की दौलत बहुत ही साधारण और बुनियादी तरीकों से बनाई गई थी। यह सिर्फ किस्मत का खेल नहीं था बल्कि यह एक खास तरीके और फार्मूले को बिना रुके बार-बार अनुसरण करने का नतीजा था। जबकि भारतीय निवेशकों की फितरत उतार-चढ़ाव वाले क्षेत्रों में बहुत तेजी से मुनाफा कमाने की होती है।
खराब शेयरों को ढोना बंद करें
निवेश गुरु पीटर लिंच की बात को दोहराते हुए क्लारमैन कहते हैं कि, बफेट ने कभी भी अपने फूलों (अच्छे शेयरों) को नहीं काटा और न ही खरपतवार (खराब शेयरों) को पानी दिया। क्लारमैन बताते हैं कि बफेट की असल काबिलियत यह थी कि उनमें बेहतरीन कंपनियों को सालों तक पकड़ कर रखने की समझ और हिम्मत थी। इसलिए आप अपने पोर्टफोलियो की जांच कीजिए, अगर किसी कंपनी के बुनियादी सिद्धांत कमजोर हो चुके हैं, कमाई ठहरी हुई है या प्रबंधन सवालों के घेरे में है, तो उसे पकड़े रखने के फैसले पर दोबारा सोचिए।
खराब वक्त में परीक्षा के लिए तैयार रहें
क्लारमैन बताते हैं जब बाजार ऊपर जा रहा होता है, तो हर व्यापारी खुद को अक्लमंद समझता है क्योंकि चढ़ता हुआ बाजार हर छोटे-बड़े शेयर को ऊपर ले जाता है, लेकिन बफेट ने शेयर बाजार की तेजी और मंदी, आर्थिक संकट, युद्ध और महामारियों का सामना बड़ी आसानी से किया क्योंकि वे कभी बिना तैयारी के नहीं रहे।
अगर आप बफेट की तरह निवेश करना चाहते हैं, तो आपको मजबूत स्थिति से काम करना चाहिए, न कि मजबूरी या हड़बड़ाहट में। आपको बफेट की तरह अपना खुद का ‘फ्लोट’ बनाना चाहिए। एक आम निवेशक के तौर पर, आपका फ्लोट आपका इमरजेंसी फंड और कर्ज-मुक्त होना है।
अगर आप उधार के पैसे पर ट्रेडिंग कर रहे हैं या शेयर खरीदने के लिए निजी कर्ज ले रहे हैं, तो असल में आप बिना तैयारी के काम कर रहे हैं। इसलिए, यह पक्का करें कि आपके पास इतना पैसा अलग रखा हो कि अगर दो साल तक बाजार मंदा रहे, तो भी आपको अपने शेयरों को छूना न पड़े।
जटिल शब्दों के जाल से बचें
बफेट ने अल्बर्ट आइंस्टीन की उस बात को सच कर दिखाया, जिसमें कहा गया था कि अगर आप किसी चीज को छह साल के बच्चे को नहीं समझा सकते, तो इसका मतलब है कि आप खुद उसे ठीक से नहीं समझते हैं। भारत के निवेश जगत में अक्सर निवेशक हरित हाइड्रोजन थीम या रक्षा निर्यात ‘आर्डर बुक’ जैसे भारी-भरकम हौव्वा के पीछे छिप जाते हैं।
अगर किसी कारोबार माडल को समझाने के लिए पीएचडी की जरूरत पड़े, तो बफेट के मानकों पर वह शायद अच्छा कारोबार नहीं है। किसी आइपीओ या एसएमई शेयर में ‘बाय’ बटन दबाने से पहले ‘रिलेटिव टेस्ट’ जरूर करें।
क्या आप तीन सरल वाक्यों में बता सकते हैं कि कंपनी पैसा कैसे कमाती है, ग्राहक उसे क्यों नहीं छोड़ेंगे और वह आगे कैसे बढ़ेगी? या क्या आप उस कारोबार माडल को एक 6 साल के बच्चे को समझा सकते हैं? कहने का मतलब शेयर चुनने के लिए ऐसी कंपनी तलाशिए जिसका बिजनेस माडल समझने में आसान हों, जो लगातार पैसा कमाती हों और अपने इलाके या अपने छोटे से बाजार में आगे हों। जटिल माडल से बचें।
‘बोरिंग अल्फा’ विश्लेषण पर ध्यान दें
एक आम निवेशक अपना दिन-रात कंपनियों की मोटी-मोटी वार्षिक रपटें और उनके ‘फुटनोट’ खंगालने में नहीं लगाता, लगा भी नहीं सकता। इसलिए वह बाजार के सलाहकारों पर भरोसा कर लेता है और मान्य ट्रेंड में बह जाता है। बफेट इनसे बचते थे। वे खुद कंपनियों की गहरी जांच-पड़ताल करते थे व विश्लेषण पर पूरा ध्यान देते थे।
वे कंपनी की ऐसी बातें पकड़ते थे जो बाजार की नजर से छूट गई होती थीं। यह काम बोरिंग (उबाऊ) जरूर है पर इसमें मुनाफा (अल्फा) छुपा होता है। इसलिए किसी कंपनी के शेयर खरीदने का पहले और खरीदने के बाद भी उसकी अच्छी तरह गहरी छानबीन करें।
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