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इंटरनेट बैंकिंग या डेबिट-क्रेडिट से जुड़े फ्रॉड का हो गए शिकार? यह है शिकायत का तरीका

कोई फ्रॉड किसी के बैंक खाते, डेबिट या क्रेडिट कार्ड, ऑनलाइन लेन-देन ई-मेल स्पूफिंग, फिशिंग या किसी के कार्ड को क्लोन करके किया जा सकता है। आरबीआई के नियमों के मुताबिक इसकी जानकारी संबंधित बैंक को फ्रॉड के 3 दिन के भीतर दी गई है तो ग्राहक को भुगतान करने की आवश्यकता नहीं है।

बैंकों ने कस्टमर्स को कार्ड बदलवाने के बारे में सूचना दे दी है। (फोटो सोर्स : Indian Express)

आप क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करते हैं। आधी रात में अगर आपके पास एक मैसेज आए कि आपके क्रेडिट कार्ड से 1000 मील दूर शॉपिंग की गई है, जबकि कार्ड आपके पास ही रखा है, तो जाहिर है कि कोई भी परेशान हो जाएगा। डिजिटल का दौर है, इस दौर में जब वित्तीय लेनदेन की बात आती है तो इसमें होने वाले फ्रॉड को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। कोई फ्रॉड किसी के बैंक खाते, डेबिट या क्रेडिट कार्ड, ऑनलाइन लेन-देन ई-मेल स्पूफिंग, फिशिंग या किसी के कार्ड को क्लोन करके किया जा सकता है। जिस वक्त आपको पता चले कि आपके क्रेडिट / डेबिट कार्ड पर एक संदिग्ध लेनदेन किया गया है, तुरंत कार्ड जारीकर्ता को सूचित करें। इसके लिए बैंक के साथ औपचारिक शिकायत दर्ज करनी चाहिए और कार्ड या खाते को तुरंत ब्लॉक करने के लिए संबंधित कस्टमर केयर को कॉल करना चाहिए।

ये हैं दस्तावेज: यदि आपके साथ नेट बैंकिंग, एटीएम लेनदेन, या किसी अन्य ऑनलाइन लेनदेन से संबंधित धोखाधड़ी हुई है, तो आपको इसकी शिकायत दर्ज करानी होगी, लेकिन, बैंक या कार्ड जारीकर्ता के साथ लिखित शिकायत दर्ज करने से पहले, सुनिश्चित करें कि आपके पास कम से कम निम्नलिखित दस्तावेज हैं:
संबंधित बैंक के पिछले छह महीने का स्टेटमेंट।
कथित लेनदेन से संबंधित एसएमएस की एक कॉपी बनाएं।
बैंक रिकॉर्ड में दिखाए गए अनुसार आपके आईडी प्रमाण और पता प्रमाण की कॉपी।
उपर्युक्त दस्तावेजों के साथ पूरी घटनाओं को समझाते हुए अपने निकटतम पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराएं।
साइबर दुनिया में कई नकली ऐप्स हैं। किसी ऐप के माध्यम से किए गए किसी भी वित्तीय धोखाधड़ी के मामले में, उपर्युक्त दस्तावेजों के अतिरिक्त, ऐप का स्क्रीनशॉट और उस स्थान से जहां यह डाउनलोड किया गया था, उसका स्क्रीनशॉट भी देना होगा।

कहां करें शिकायत: इकॉनोमिक टाइम्स के मुताबिक स्थानीय पुलिस स्टेशन में इससे जुड़ी केवल एक एफआईआर दर्ज कराई जानी चाहिए। अगर पुलिस एफआईआर दर्ज करने से इंकार कर देती है, तो सीआरपीसी के सेक्शन 156 (3) के तहत अदालत से संपर्क किया जा सकता है,  लेकिन, अगर पुलिस आपको शिकायत दर्ज करने के लिए साइबर सेल में जाने के लिए कहती है तो क्या होगा? विशेषज्ञ के मुताबिक इसके लिए आपको साइबर सेल से संपर्क करने की आवश्यकता नहीं है। आप स्थानीय पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज करा सकते हैं। मामले पुलिस स्टेशनों द्वारा साइबर सेल में भेजे जाते हैं।”

यदि आप पुलिस में शिकायत दर्ज कराने के बाद भी साइबर सेल के साथ सीधे शिकायत दर्ज करना चाहते हैं, तो आप ऐसा कर सकते हैं। आपके नजदीकी साइबर सेल का विवरण इंटरनेट पर पाया जा सकता है। कुछ शहरों के आर्थिक और साइबर अपराधों के लिए ऑनलाइन शिकायत दर्ज प्रणाली निम्नानुसार है:
Delhi: https://205.147.111.155:84/
Noida: https://www.cccinoida.org/registration
Mumbai: Email : cp.thane.online@mahapolice.gov.in

कितना पैसा मिलेगा पैसा: अब, यदि धोखाधड़ी होती है और बैंक गलती नहीं करता है और यह स्कैमिंग, फिशिंग इत्यादि के माध्यम से किसी तीसरे पक्ष द्वारा किया गया था, आरबीआई के नियमों के मुताबिक इसकी जानकारी संबंधित बैंक को फ्रॉड के 3 दिन के भीतर दी गई है तो ग्राहक को भुगतान करने की आवश्यकता नहीं है। इसके बाद लेनदेन की सूचना देने पर आरबीआई द्वारा सेट की गई मिनिमम वेल्यू या फ्रॉड में गई राशि जो भी कम होगी वही मिलेगी। भारतीय रिजर्व बैंक की अधिसूचना में कहा गया है कि, यदि आप इसकी जानकारी देने में सात दिन से अधिक समय लेते हैं, तो ग्राहक को कितना पैसा दिया जाएगा यह बैंक के बोर्ड अनुमोदित नीति के अनुसार निर्धारित किया जाएगा।

आरबीआई के नियमों के मुताबिक, बैंक को सूचित करने के बाद 90 दिनों के भीतर यह केस  खत्म होना चाहिए। बैंकों को ग्राहक द्वारा अधिसूचना की तारीख से 10 कार्य दिवसों के भीतर ग्राहक के खाते में अनाधिकृत इलेक्ट्रॉनिक लेनदेन को क्रेडिट या रिवर्स करना होता है। क्रेडिट कार्ड धोखाधड़ी विदेशों में उनके उपयोग के मामले में अधिक आम माना जाता है।

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