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कार या बाइक हो जाए चोरी तो आसानी से बीमा क्लेम के लिए करें ये 5 काम, एफआईआर के लिए तुरंत पहुंचे थाने

Insurance claim for stolen vehicle: वाहन चोरी होने पर बिना कोई वक्त गंवाए सबसे पहले आपको नजदीकी पुलिस थाने जाना चाहिए और घटना की एफआईआर दर्ज करानी चाहिए।

इस भयावह बीमारी से आज ना सिर्फ भारत बल्कि पूरी दुनिया लड़ रही है,

Insurance claim for stolen vehicle: वाहन का बीमा किसी दुर्घटना की स्थिति में तो मददगार होता ही है बल्कि गाड़ी चोरी होने पर भी आर्थिक क्षति की भरपाई करता है। हालांकि वाहन चोरी होने पर इंश्योरेंस क्लेम की प्रक्रिया को लेकर लोग काफी परेशान रहते हैं। दरअसल इसके पीछे सही दस्तावेज न होना होता है। इसके अलावा पूरे प्रॉसेस की जानकारी के अभाव के चलते भी ऐसी स्थिति देखने को मिलती है। आइए जानते हैं, कैसे गाड़ी चोरी होने पर कर सकते हैं इंश्योरेंस क्लेम…

तुरंत दर्ज कराएं FIR: वाहन चोरी होने पर बिना कोई वक्त गंवाए सबसे पहले आपको नजदीकी पुलिस थाने जाना चाहिए और घटना की एफआईआर दर्ज करानी चाहिए। आगे की पूरी प्रक्रिया के लिए यह एफआईआर सबसे अहम दस्तावेज होती है।

क्लेम फॉर्म भरें: पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराने के बाद बीमा धारक को तत्काल इंश्योरेंस कंपनी के कस्टमर सर्विस सेंटर पर कॉल करना चाहिए और क्लेम फॉर्म भरना चाहिए। यहां आपको पॉलिसी नंबर, वाहन की डिटेल भरनी होगी। इसके अलावा वाहन चोरी की घटना के दिन और समय का भी पूरा विवरण देना होगा।

ये दस्तावेज होंगे जरूरी: सही ढंग से भरा हुआ क्लेम फॉर्म, वाहन का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट, ड्राइविंग लाइसेंस, पॉलिसी डॉक्युमेंट, एफआईआर की कॉपी और आरटीओ को चोरी की जानकारी देने वाला लेटर इंश्योरेंस कंपनी को देना होगा।

कैसे होगा सेटलमेंट: एक बार पुलिस जब अपनी जांच पूरी करने के बाद नॉन ट्रेसेबल रिपोर्ट जमा करेगी तो आपको अपने वाहन की आरसी बीमा कंपनी को सौंपनी होगी। इसके अलावा गाड़ी की चाबी कंपनी को देनी होगी।

अप्रूवल के बाद 7 दिनों में आएगा पैसा: बीमाधारक को कंपनी को रिपेयर इनवॉइस सौंपना होगा। इसके बाद सर्वेयर की रिपोर्ट के आधार पर 7 वर्किंग डेज के भीतर बीमा की राशि अकाउंट में आ जाएगी।

इन बातों का जरूर ध्यान रखें: घटना होने के तुरंत बाद आपको रोड टैक्स ऑफिसर से डुप्लिकेट आरसी लेनी चाहिए। इसके अलावा यदि गाड़ी पर लोन बकाया है तो फिर बीमे से मिली रकम संबंधित बैंक को देनी होगी। उसके बाद भी यदि लोन की राशि बची रह जाती है तो उसका वहन बीमा धारक को ही करना होगा।

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