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गिरवी रखे शेयर, हजारों करोड़ का लोन, जानें- कैसे संकट में घिरते गए बिग बाजार वाले किशोर बियानी

एक तरफ फ्यूचर ग्रुप कारोबार में कमी से जूझ रहा था तो दूसरी तरफ कर्ज में इजाफा होता गया। इसी के चलते किशोर बियानी का बिग बाजार कर्ज के भी 'बिग संकट' में घिर गया। इसके बाद कोरोना काल फ्यूचर ग्रुप के भविष्य के लिए सबसे बड़ा संकट साबित हुआ।

kishore biyaniजानें, कैसे कर्ज के संकट में घिरते चले गए बिग बाजार वाले किशार बियानी

कभी भारत के रिटेल किंग कहे जाने वाले किशोर बियानी का साम्राज्य अब मुकेश अंबानी के रिलायंस इंडस्ट्रीज का हिस्सा बनने की ओर है। रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड की ओर से 23,000 करोड़ रुपये की डील के तहत किशोर बियानी के फ्यूचर ग्रुप का अधिग्रहण किया जा सकता है। बिग बाजार, FBB, ईजीडे जैसे ब्रांड्स के जरिए देश भर में छा जाने वाली किशोर बियानी की कंपनी पर फिलहाल 12,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज है। यही नहीं खुद किशोर बियानी और उनके फैमिली की हिस्सेदारी भी गिरवी रखी है। आइए जानते हैं, कैसे कर्ज के भीषण संकट में घिरते चले गए किशोर बियानी…

कारोबार घटता गया, कर्ज बढ़ता गया: ‘सबसे सस्ता, सबसे अच्छा’ की टैगलाइन से मशहूर हुए बिग बाजार ने एक समय में देश भर में धाक जमाई थी। लेकिन देखते ही देखते कुछ सालों में रिटेल इंडस्ट्री का यह बड़ा ब्रांड संकट में घिर गया। दरअसल महंगी लागत से शुरू किए गए बिग बाजार, फैशन ऐट बिग बाजार के रिटेल स्टोर शुरुआती दौर में एक अच्छा कारोबार दे रहे थे। लेकिन बीते कुछ सालों में मंदी के चलते ग्राहकों के रुझान में बड़ा बदलाव आया है। ऑनलाइन शॉपिंग और मॉल्स आदि के प्रति पहले जैसा रुझान न होने के चलते फ्यूचर ग्रुप को करारा झटका लगा है। एक तरफ फ्यूचर ग्रुप कारोबार में कमी से जूझ रहा था तो दूसरी तरफ कर्ज में इजाफा होता गया। इसी के चलते किशोर बियानी का बिग बाजार कर्ज के भी ‘बिग संकट’ में घिर गया। इसके बाद कोरोना काल फ्यूचर ग्रुप के भविष्य के लिए सबसे बड़ा संकट साबित हुआ।

12,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज: दिसंबर, 2019 में समाप्त हुई तिमाही में कंपनी के प्रॉफिट में 15 पर्सेंट की गिरावट देखने को मिली थी। इसके अलावा राजस्व भी तीन पर्सेंट कम हुआ है। इसके बाद कोरोना संकट ने इस समस्या को और बढ़ाने का काम किया। रेटिंग एजेंसी ICRA ने मार्च, 2020 में फ्यूचर ग्रुप की रेटिंग को निगेटिव कर दिया था। रेटिंग एजेंसी ने लिखा था, ‘ICRA ने यह नोट किया है कि कंपनी के कर्ज में लगातार इजाफा हो रहा है क्योंकि समूह की सभी कंपनियों पर बकाया कर्ज लगातार बढ़ रहा है। सितंबर, 2019 तक फ्यूचर ग्रुप की लिस्टेड कंपनियों पर 12,778 करो़ड़ रुपये का कर्ज है, जो मार्च 2019 में 10,951 करोड़ रुपये था।’

गिरवी रखे हैं बियानी फैमिली के शेयर: फ्यूचर ग्रुप में किशोर बियानी और उनके परिवार की करीब 33.5 पर्सेंट की हिस्सेदारी है, जिसका लगभग पूरा हिस्सा गिरवी रखा हुआ है। एक तरफ कारोबार में गिरावट, दूसरी तरफ बढ़ता कर्ज और तीसरा गिरवी रखे शेयरों के संकट ने फ्यूचर समूह को बिकने की कगार पर ला खड़ा किया, जिसकी तलाश रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के तौर पर पूरी होने जा रही है।

बिग बाजार का नाम नहीं बदलेगा रिलायंस: सूत्रों के मुताबिक रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड 23,000 से 25,000 करोड़ रुपये तक की रकम में फ्यूचर समूह का अधिग्रहण कर सकता है। हालांकि इसके बाद भी शुरुआती कुछ सालों में बिग बाजार, FBB, सेंट्रल, ईजीडे और ब्रांड फैक्ट्री के नाम जारी रह सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक रिलायंस ग्रुप का मानना है कि जब तक इन ब्रांड्स की मार्केट में साख बेहतर है, तब तक इनके नाम से ही कारोबार किया जाएगा। रिलायंस इंडस्ट्रीज की रिटेल चेन कंपनी रिलायंस रिटेल वेंचर्स लिमिटेड के तहत फ्यूचर ग्रुप का अधिग्रहण होगा।

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