केंद्र सरकार ने हाल ही में 22% से 30% इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E22-E30) को केंद्रीय उत्पाद शुल्क (एक्साइज ड्यूटी) से छूट दे दी है। इससे इन ईंधनों का टैक्स ट्रीटमेंट मौजूदा 20% इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20) के बराबर हो गया है, जो फिलहाल पेट्रोल पंपों पर उपलब्ध है।

इसके अलावा, सरकार ने 85% इथेनॉल मिश्रित ईंधन (E85) और 100% इथेनॉल ईंधन (E100) को मान्यता देने के लिए केंद्रीय मोटर वाहन नियमों (CMVR) में संशोधन का प्रस्ताव भी रखा है।

ये दोनों कदम इस बात का संकेत हैं कि सरकार देश के वाहन और ईंधन इकोसिस्टम को इथेनॉल के ज्यादा इस्तेमाल के अगले चरण के लिए तैयार करना चाहती है। हालांकि, इन दोनों फैसलों के उद्देश्य और असर अलग-अलग हैं।

पहला कदम (E20 फ्यूल से ज्यादा ब्लेंड में बदलाव) ज्यादातर पेट्रोल कारों के लिए है।

दूसरा कदम (E85 और ज्यादा फ्यूल को मान्यता देने के लिए ड्राफ्ट संशोधन) फ्लेक्स फ्यूल व्हीकल्स नाम की एक पूरी नई कैटेगरी को टारगेट करता है। ऐसी गाड़ियां पेट्रोल और इथेनॉल के अलग-अलग ब्लेंड पर चलने के लिए डिजाइन की गई हैं, लेकिन अभी भी इंडियन मार्केट में बड़े पैमाने पर आने में कुछ समय लगेगा।

भारत जहां E20 के बाद E25, E30, E85 और E100 जैसे ईंधनों की दिशा में आगे बढ़ने की तैयारी कर रहा है, वहीं ब्राजील का अनुभव यह समझने में मदद कर सकता है कि हाई-इथेनॉल मिश्रित ईंधनों और फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों का इकोसिस्टम बड़े पैमाने पर कैसे काम करता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि ब्राजील का इथेनॉल मॉडल कैसे काम करता है और वहां हाई-इथेनॉल ईंधनों का इस्तेमाल किस तरह किया जाता है…

ब्राजील का एथेनॉल मॉडल कैसे काम करता है?

इथेनॉल-ब्लेंडेड ईंधन के साथ ब्राजील का अनुभव कई दशकों पुराना है। दक्षिण अमेरिकी देश ने 1970 के दशक में तेल बाजार की अनिश्चितताओं के जवाब में अपना इथेनॉल कार्यक्रम शुरू किया था। अगले पांच दशकों में उसने गन्ने से बनने वाले इथेनॉल को पेट्रोल के एक प्रभावी विकल्प के रूप में विकसित किया।

आज ब्राजील के लगभग हर पेट्रोल पंप पर उपभोक्ताओं को विकल्प मिलता है। वे 27% से 32% इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल या E100 यानी शुद्ध हाइड्रस इथेनॉल में से किसी भी ईंधन का चुनाव कर सकते हैं। इसके साथ ही, वहां कार निर्माताओं को फ्लेक्स-फ्यूल वाहन बनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया, जो अलग-अलग इथेनॉल मिश्रण वाले ईंधनों पर चल सकते हैं।

ब्राजील में फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों की लोकप्रियता का एक बड़ा कारण सरकारी मूल्य समर्थन भी रहा है। सरकार की नीतियों के कारण इथेनॉल मिश्रित ईंधन अक्सर पेट्रोल की तुलना में सस्ता मिलता है। यही वजह है कि वाहन मालिक ईंधन भरवाते समय कीमत के आधार पर अपनी पसंद का ईंधन चुन सकते हैं।

भारत और ब्राजील के बीच सबसे बड़ा अंतर भी यही है। भारत में फिलहाल पेट्रोल पंपों पर उपभोक्ताओं के पास अलग-अलग ईंधन मिश्रण चुनने का विकल्प नहीं है, जबकि ब्राजील में यह व्यवस्था वर्षों से मौजूद है।

खबर के मुताबिक, ब्राजील में इथेनॉल का एक फायदा बेहतर एक्सेलरेशन भी माना जाता है, जिसने वहां इसके इस्तेमाल को बढ़ावा देने में मदद की। 1980 के दशक के आखिर तक वहां बिकने वाली हर 10 नई कारों में से नौ ऐसी थीं जो इथेनॉल आधारित ईंधन पर चल सकती थीं।

ब्राजील ने इथेनॉल नीति को चरणबद्ध तरीके से लागू किया, ताकि पहले से वाहन खरीद चुके लोगों को किसी तरह की असुविधा या नुकसान महसूस न हो। यही वजह है कि वहां इथेनॉल आधारित ईंधन और फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों का संक्रमण अपेक्षाकृत आसान रहा।

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देश में पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने का दायरा लगातार बढ़ रहा है और सरकार इसे ऊर्जा सुरक्षा व प्रदूषण कम करने के अहम उपाय के रूप में देख रही है। यही वजह है कि एथेनॉल उत्पादन और एथेनॉल ब्लेंडिंग दोनों पर तेजी से काम हो रहा है। सरकार के अनुसार, 31 अक्टूबर 2025 तक भारत की एथेनॉल उत्पादन क्षमता बढ़कर 1,953 करोड़ लीटर प्रतिवर्ष हो चुकी है।

लेकिन आखिर एथेनॉल क्या होता है, इसे किन फसलों से बनाया जाता है। आइए समझते हैं…