दुनिया के सबसे बड़े शेयर बाजारों की रैंकिंग में हाल ही में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। दक्षिण कोरिया ने भारत को पीछे छोड़ते हुए दुनिया के छठे सबसे बड़े शेयर बाजार का स्थान हासिल कर लिया है। कुछ समय पहले तक भारत इस स्थान पर था, लेकिन अब वह एक पायदान नीचे खिसक गया है।
यह बदलाव सिर्फ रैंकिंग का मामला नहीं है, बल्कि इससे यह भी पता चलता है कि अलग-अलग देशों के शेयर बाजारों का प्रदर्शन कैसा रहा है और निवेशकों का रुझान किस ओर है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर दुनिया के सबसे बड़े शेयर बाजारों की रैंकिंग किस आधार पर तय होती है और दक्षिण कोरिया भारत से आगे कैसे निकल गया। आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं…
कैसे तय होती है दुनिया के शेयर बाजारों की रैंकिंग?
दुनिया के शेयर बाजारों की रैंकिंग आमतौर पर मार्केट कैपिटलाइजेशन (जिसे मार्केट कैप भी कहा जाता है) के आधार पर तय की जाती है। इसका मतलब है कि किसी देश के स्टॉक एक्सचेंजों में लिस्टेड सभी कंपनियों का कुल बाजार मूल्य कितना है। जितना अधिक कुल मार्केट कैप होगा, उस देश का शेयर बाजार वैश्विक रैंकिंग में उतना ऊपर माना जाता है।
क्या होता है मार्केट कैप?
किसी कंपनी के एक शेयर की मौजूदा कीमत को उसके कुल जारी शेयरों की संख्या से गुणा करने पर उसका मार्केट कैप निकलता है। किसी देश के सभी लिस्टेड शेयरों के मार्केट कैप को जोड़कर उस देश के शेयर बाजार का कुल आकार तय किया जाता है।
भारत को कैसे पीछे छोड़ गया दक्षिण कोरिया?
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण कोरिया के शेयर बाजार ने भारत को पीछे छोड़ते हुए दुनिया के छठे सबसे बड़े बाजार का दर्जा हासिल कर लिया है। इसकी मुख्य वजह चिप बनाने वाली दिग्गज कंपनियों के शेयरों में आई जबरदस्त तेजी है।
ब्लूमबर्ग द्वारा जुटाए गए आंकड़ों के अनुसार, कोरियाई स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप इस साल 86% बढ़कर 5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया है, जबकि भारत का मार्केट कैप घटकर 4.8 ट्रिलियन डॉलर रह गया है।
क्या हैं इसके पीछे मुख्य कारण?
AI और चिप कंपनियों का बूम
Samsung Electronics Co. और SK Hynix Inc. (जो हाल ही में 1 ट्रिलियन डॉलर के मूल्यांकन वाले क्लब में शामिल हुई हैं) ने कोरिया के इक्विटी बाजार में आई इस तेजी को मुख्य रूप से आगे बढ़ाया है।
कोरियाई बाजार में रिकॉर्ड तेजी
AI मेमोरी चिप्स के क्षेत्र में अपनी मज़बूत पकड़ के दम पर इन कंपनियों ने Kospi इंडेक्स के 2026 तक के अनुमानित लाभ को 100% से भी अधिक के स्तर पर पहुंचा दिया है। इस साल कोरिया ने कनाडा, जर्मनी, ब्रिटेन और फ्रांस जैसे देशों को पीछे छोड़ दिया है।
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार Asset Value Investors के वरिष्ठ निवेश विश्लेषक Ross McGarry ने कहा, ‘भारत के करीब पहुंचना एक बहुत बड़ी उपलब्धि है, खासकर ऐसे बाज़ार के लिए जिसने कुछ समय पहले तक Kospi 5,000 के स्तर को छूने का एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया था।’
उन्होंने आगे कहा, “हालांकि, इस साल बाजार में आई तेजी का मुख्य श्रेय ‘मेमोरी साइकिल’को जाता है। इस पूरी तेजी को आगे बढ़ाने का मुख्य काम Samsung और SK Hynix जैसी कंपनियों ने ही किया है। अब असली परीक्षा यह है कि क्या कोरियाई बाजार, कॉर्पोरेट प्रशासन में किए जाने वाले वास्तविक सुधारों के दम पर, अपने इस बढ़े हुए मूल्यांकन को लंबे समय तक बनाए रख पाता है या नहीं।’
भले ही बाजार मूल्य के मामले में कोरिया ने भारत को पीछे छोड़ दिया हो, लेकिन अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के अनुमानों के अनुसार, भारत की 4.15 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था अभी भी सियोल की 1.93 ट्रिलियन डॉलर की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वाली अर्थव्यवस्था से कहीं अधिक बड़ी है।
क्या यह स्थिति स्थायी है?
जरूरी नहीं है। शेयर बाजार की रैंकिंग निरंतर बदलती रहती है। यदि भारत में विदेशी निवेश लौटता है, कॉर्पोरेट मुनाफा बढ़ता है और अर्थव्यवस्था मजबूत रहती है, तो भारत फिर से ऊंची रैंकिंग हासिल कर सकता है। वहीं दक्षिण कोरिया की मौजूदा बढ़त काफी हद तक एआई और सेमीकंडक्टर सेक्टर की तेजी पर निर्भर है।
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औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) की नई सीरीज में केंद्र सरकार ने बड़ा बदलाव किया है। सरकार ने इसका आधार वर्ष 2011-12 से बदलकर 2022-23 कर दिया है, जो 1 जून 2026 से लागू होगा। इसके साथ ही पहली बार छोटे खनिज, रेयर अर्थ मिनरल्स, गैस सप्लाई, पानी सप्लाई और कचरा प्रबंधन जैसे सेक्टर भी इसमें जोड़े गए हैं। यहां पढ़ें पूरी खबर…
