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आज का कर्ज, भविष्य में न बन जाए मर्ज, किसी भी जरूरत के लिए लोन लेने से पहले ध्यान रखें ये 5 जरूरी बातें

किसी भी प्लान पर काम करने से पहले कर्ज को लेकर भी सोचने की जरूरत है ताकि जरूरत पर लिया गया कर्ज भविष्य में मर्ज न बन जाए। खासतौर पर आर्थिक मंदी के इस दौर में इस बात ध्यान रखना बेहद जरूरी है।

कर्ज लेने से पहले ध्यान रखें ये जरूरी बातें

हम ऐसे दौर में हैं, जब कर्ज किसी भी काम के लिए बेहद अहम भूमिका अदा करता है। घर बनाने से लेकर गाड़ी लेने तक में कर्ज की जरूरत अकसर पड़ जाती है। हालांकि किसी भी प्लान पर काम करने से पहले कर्ज को लेकर भी सोचने की जरूरत है ताकि जरूरत पर लिया गया कर्ज भविष्य में मर्ज न बन जाए। खासतौर पर आर्थिक मंदी के इस दौर में इस बात ध्यान रखना बेहद जरूरी है। आइए जानते हैं, कर्ज की प्लानिंग के लिए जरूरी हैं कौन सी 5 बातें…

लिमिट से ज्यादा न लें कर्ज: यदि कर्ज से इतर अन्य स्रोतों के जरिए आप अपनी जरूरत पूरी कर सकते हैं तो फिर ज्यादा कर्ज लेने की जरूरत नहीं है। इसके अलावा यह भी ध्यान रखते हैं कि आपके कर्ज की ईएमआई आपकी कुल कमाई से 40 फीसदी से अधिक न होने पाए। यदि कर्ज की किस्तें 50 से 70 फीसदी तक या उससे भी अधिक हो जाती हैं तो फिर भविष्य के लिए सेविंग्स करना मुश्किल हो जाएगा।

शौक पूरे करने को न लें लोन: इस मंदी के दौर में यह ध्यान रखें कि सिर्फ जरूरतों के लिए ही कर्ज लें। शौक के लिए कर्ज लेने से बचें। गैजेट्स या अन्य शौक पूरे करने के लिए लिया गया कर्ज भविष्य में आपको मुश्किल में डाल सकता है। यही नहीं निवेश के लिए भी लोन लेने से बचें क्योंकि कोई भी निवेश लिए गए कर्ज की भरपाई मुश्किल ही कर पाता है।

लोन की अवधि को रखें कम: आमतौर पर कम ईएमआई के नाम पर बैंकों की ओर से ग्राहकों को लुभाने की कोशिश की जाती है और ज्यादा लंबे समय का लोन ऑफर किया जाता है। हालांकि होम लोन के मामले में ऐसा किया जा सकता है क्योंकि पर्सनल लोन के मुकाबले ब्याज कम लगती है और राशि भी अधिक होती है।

कम ब्याज के कर्ज को दें प्राथमिकता: ऐसा कर्ज लेने से बचें, जिसमें ब्याज की दर अधिक हो। भले कुछ वक्त ले लें, लेकिन ऐसा लोन ही लें जिस पर ब्याज की दर कम से कम हो। ज्यादा ब्याज वाला लोन भविष्य में संकट का सबब बन सकता है।

सिर्फ ब्याज की छूट के लिए न लें कर्ज: सरकार की ओर से कुछ कर्जों पर टैक्स में राहत दी जाती है। ऐसे बहुत से कर्जधारक हैं, जो सिर्फ टैक्स के फायदों के लिए ही लोन को जारी रखते हैं। उदाहरण के तौर पर इनकम टैक्स ऐक्ट के सेक्शन 80EE के तहत होम लोन पर छूट मिलती है। इसके अलावा एजुकेशन लोन के ब्याज पर भी रिलीफ मिलती है। हालांकि सिर्फ इस छूट के लिए ही लोन को जारी रखने से बचना चाहिए।

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